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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश और एमसीयू अग्रणी : केजी सुरेश, कुलपति

कार्यक्रम को संबोधित करते कुलपति केजी सुरेश

एमसीयू में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति : गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए क्रियान्वयन’ पर केन्द्रित पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का उद्घाटन, 17 सितम्बर तक होंगे विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति : गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए क्रियान्वयन’ पर केन्द्रित पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का उद्घाटन केरल के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान, मध्यप्रदेश शासन में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव और कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने किया। एफडीपी में 23 राज्यों के 200 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन शामिल हो रहे हैं। एफडीपी को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री खान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य दुनिया में भारत को शिक्षा के क्षेत्र में सुपर नॉलेज पावर बनाना है। यह शिक्षा नीति युवाओं को और अधिक स्किल्ड बनाएगी। वहीं, शिक्षा मंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं का सम्मान और संवर्धन करती है। यह एक भ्रम है कि सिर्फ अंग्रेजी से प्रगति हो सकती है। कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश और एमसीयू अग्रणी भूमिका में हैं।

            एफडीपी के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एवं केरल के राज्यपाल श्री आरिफ खान ने कहा कि हमारे देश का मंत्र है- ‘आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतो’। अर्थात हम अच्छे विचारों का सब ओर से स्वागत करते हैं। यह हमारी संस्कृति है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी भारतीय संस्कृति के सर्वसमावेशी विचार पर जोर देती है। यह विविधताओं का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि सामाजिक उत्तरदायित्व के बिना शिक्षा का कोई महत्व नहीं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थी के भीतर सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने वाली है।

            विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह एक भ्रम है कि अंग्रेजी के बिना प्रगति नहीं हो सकती। हमें जापान और फ़्रांस सहित दुनिया के अनेक देशों को देखना चाहिए, जो अपनी मातृभाषा में ही कार्य करते हैं। हमारे पास तो भाषाओं का गुलदस्ता है। उन्होंने कहा कि किसी भाषा से दिक्कत नहीं है लेकिन यदि अपनी मातृभाषा में शिक्षा मिले तो अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं का सम्मान और संवर्धन करती है। जब हम अपनी शिक्षा नीति की बात करते हैं तब हम अपनी जड़ों से जुड़ कर बात करते हैं। हमें 1947 में ही मैकाले की शिक्षा नीति से मुक्त हो जाना चाहिए था। शिक्षा मंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया का सबसे युवा देश भारत है। हमारे देश बहुत संभावनाओं से भरा हुआ है। आज दुनिया के अनेक प्रश्नों का उत्तर देने का सामर्थ्य भारत में है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो गौरव का भाव पैदा करे और बलिदान के लिए प्रेरित करे। इस सन्दर्भ में उन्होंने श्रीकृष्ण के जन्म, माँ यशोदा और नन्द बाबा के बलिदान और पन्ना धाय के बलिदान के प्रसंग भी सुनाये।

            कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि यह हमारे लिए प्रसन्नता का विषय है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाला पहला प्रदेश है। उन्होंने कहा कि हम पहले विश्वविद्यालय हैं, जिसने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप 7 पाठ्यक्रम लागू किये हैं। जिनमें 5 मीडिया के पाठ्यक्रम हैं। कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत को फिर से ज्ञान के क्षेत्र में विश्वगुरु बनाने वाला दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को क्रियान्वित करने के लिए अन्य विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू साइन किये हैं। जैसे एमसीयू के विद्यार्थी ओपन इलेक्टिव कोर्स में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के ओपन इलेक्टिव कोर्स पढ़ सकेंगे और वहां के विद्यार्थी एमसीयू में संचालित ओपन इलेक्टिव कोर्स पढ़ सकेंगे।

विषय प्रवर्तन कुलसचिव और पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के संयोजक प्रो. अविनाश वाजपेयी ने किया। इस एफडीपी में पांच दिन तक देशभर के विषय विशेषज्ञ उद्बोधन देंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में यह एफडीपी बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में 23 राज्यों से 200 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन एफडीपी की सह-संयोजक सुश्री मनीष वर्मा ने किया। एफडीपी में पहले दिन आईटीएम यूनिवर्सिटी, ग्वालियर के कुलपति प्रो. एसएस भाकर ने एनईपी, एबीसी के क्रियान्वयन एवं शिक्षण पद्धति और जेएनयू के प्रो. मज़हर आसिफ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नवाचारी पाठ्यक्रम एवं शिक्षण पद्धति पर व्याख्यान दिए।

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