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बेहतर होगा मीडिया की जगह कोई और करियर देखोः चारुल मलिक

चारुल मलिक, एक्टर
चारुल मलिक इंडिया टीवी की कार्य़कारी सम्पादक व एंकर रही हैं। एबीपी न्यूज व आजतक में एंकर रही हैं। फिलहाल मीडिया छोड़ टीवी जगत में एक्टिंग कर रही हैं। उन्होंने पिछले दिनों ही मीडिया को छोड़ एक्टिंग को करियर को बनाया है। वो बता रही हैं कि मीडिया को उन्होंने कैसे जिया और जाना। 
खुद पर दीजिये ध्यान ,
खुद का कीजिये सम्मान 🙏
मीडिया में नौकरी करने वालो को दूर से देख कर सब मुझसे पूछते हैं ..चारुल जी हमें भी आपकी तरह Journalist / Anchor / Editor बनना है , हमें क्या करना चाहिए मीडिया में आने के लिए ?
सच कहूं अब सबको यही कहती हूँ – हो सके तो कोई और बीट पकड़ लो , यहाँ अब वो बात नहीं रही !
दूसरी बात जो मैं अपने एक्सपीरियंस से बोल रही हूँ .यहाँ सब आपका इस्तेमाल कर रहे हैं . इस गलत फहमी में कभी मत रहना कि आपका शो है ! आप चैनल का अहम हिस्सा है आपके बिना शो कैसे जायेगा ? आप नहीं जाओगे तो पहाड़ टूट पड़ेगा etc etc . यकीन मानिए यहाँ किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता ! Every one is dispensable .
आज आप , कल कोई और , परसों कोई और ..यहाँ किसी को फर्क नहीं पड़ता आप के रहने या न रहने से . लोग मुंह पर ऐसा दिखाएँगे जैसे आप तो बहुत important हो . वह भी सबके सामने नहीं बोलेगा कोई ..अकेले में ..अलग से ..जैसे ही आप मुड़े ..आपके दुश्मन पूरी तैयारी से रेडी हो जायेंगे. अच्छा है चली गयी !
हैरानी की बात यह है जिन लोगो को कुछ नहीं आता चापलूसी के सिवा वह लंबी रेस का घोड़ा साबित होते है ! जो काम जानता है उस से सब डरते है . कही हमारी नौकरी न खा जाए ? कही बॉस इनका काम देखकर तारीफ़ न कर दें ? कही इसकी ताकत ना बढ़ जाए ?
काटो , चलो मिलकर दबाते है .. इसके अच्छे इम्प्रैशन की बैंड बजाते है .मैं मीडिया में काम कर रहे अपने उन होनहार साथियों से यह कहना चाहूंगी की नौकरी में इतना ही दिल लगाएं जितना ज़रूरी है.एक्स्ट्रा करना है तो परिवार के लिए करें. खुद के लिए करें. अगर आप में दम है तो नौकरियां मिलती रहेंगी . जीने के लिए काम करें ! काम करने के लिए ना जीएं .
परिवार वालो पर ध्यान दें. मैं तो अपने करियर में सबसे दूर हो गयी क्यूँकि 365 डेज का शो था.शो बनाना , शो को एंकर करना सब खुद पर ले लिया था. जो काम नहीं करते थे वह आज भी वही है जहाँ थे .CALM से काम करने वाले सब आगे बढ़ गए सबने अपना अपना रास्ता खोज लिया .
इसलिए काम में जान ना लगा दें. जान लगानी है तो परिवार में लगाएं. नयी नौकरी मिल जाती है ! परिवार में से कोई चला जाये तो फिर नहीं आता ! खुद की सेहत पर ध्यान दीजिये . प्राइम टाइम , शो , कॉन्क्लेव सब होते रहेंगे !
एजेंडा साफ़ है …खुद पर दीजिये ध्यान , कीजिये खुद का सम्मान 🙏
कुछ ही लोग आपको ऐसे मिलेंगे जो आपसे दिल से टच में रहेंगे ..बाकी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता की आप कहाँ गए ..आप अब क्या कर रहे हो .चुप चाप जासूसी करने वाले करते रहेंगे लेकिन आपको कॉल करने की हिम्मत नहीं होती ऐसे सो कॉल्ड वेल विशेर्स में.
आज मैं जो कुछ भी हूँ मीडिया के अपने लम्बे करियर में अपनी मेहनत की बदौलत हूँ, न्यूज़ मीडिया इंडस्ट्री ने बहुत सिखाया और बहुत स्ट्रांग बनाया है हमें ! थोड़ा पाया , ज़्यादा खोया ..लेकिन एक बात जो सीखी वो यही है की खुद को याद रखो ..खोने मत दो. जो आपके लिए दिल से सोचता है उसे पहचानो और उनके लिए दिल से डबल करो . जो नहीं करता उसे दूर से प्रणाम करो. खुश रहो ..हर चीज़ को इतना भी सीरियसली मत लो कि बाद में दुःख हो ! मेहनत रंग लाती है ..ज़िंदगी में सुकून के रंग भी ज़रूरी है . बैलेंस खुद से ही बनाना होगा . रास्ते निकालने होंगे !
कोशिश कीजिये खुद में एक ब्रांड बनने की ..जिसकी पूछ मीडिया से बाहर भी हो ताकि आप जब चाहें मन मुताबिक़ स्विच कर सकें !
एक गाना याद आ गया ……..
मतलबी हो जा ज़रा मतलबी,
दुनिया की सुनता है क्यों
ख़ुद की भी सुन ले कभी
कुछ बात ग़लत भी हो जाए
कुछ देर ये दिल भी खो जाए
बेफिकर धड़कनें,
इस तरह से चले
शोर गूंजे यहाँ से वहाँ !!
अगर आप मेरी बात से सहमत है तो वादा कीजिये अपने पर ध्यान देना स्टार्ट करेंगे. अच्छा खाना , एक्सरसाइज , सब छुटियाँ इस्तेमाल करेंगे जो आपका अधिकार है , मैंने तो कभी चेक भी नहीं किया कितनी लीव्स होती है !
EL , PL, Sick leave , Comp off , Week off
सब ले डालना !
मैं मानती हूँ की सब प्रोफेशंस में Stress है पर बाकी प्रोफेशंस में बैलेंस बनाना कहीं आसान है मीडिया के मुक़ाबले , जहाँ मामला 24/7 LIVE नहीं होता !
मेरा मकसद मीडिया को कोसना नहीं है बस यही कहना चाहती हूं कि खुद का ध्यान रखिये !
When you shift your attention to yourself , there are countless opportunities to explore
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