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उत्तराखंड से दिल्ली अपना इलाज कराने आए लोगों को रमेश खुद अस्पताल में भर्ती करवा कर आते थे

रमेश भट्ट
रमेश भट्ट

साथी की ख़ूबी
न्यूज़ नेशन के डिप्टी एडीटर रमेश भट्ट जो अब उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के मीडिया प्रमुख बन गए हैं, उनके बारे में बता रहे उनके न्यूज़ नेशन में सहयोगी रहे कमल वशिष्ठ।
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रमेश भट्ट जी को मैं पिछले एक दशक से जानता हूं। हालांकि उनके साथ काम करने का सौभाग्य मुझे न्यूज़ नेशन में मिला। सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यतित्व के धनी रमेश जी के साथ मुझे देश विदेश की यात्राओं पर जाने का अवसर भी मिला।
आज रमेश जी उत्तराखंड सरकार में मुख्यमंत्री के सलाहकार बन चुके हैं लेकिन दिल्ली में पत्रकारिता करते समय कभी भी ऐसा नहीं लगा कि रमेश उत्तराखंड से दूर हों। अपनी माटी से लगाव, उत्तराखंड से जुड़े जनसरोकारों के मुद्दे हमेशा से उनकी कलम के प्रिय विषय रहे। मैंने उनको पहाड़ से युवाओं के पलायन होने पर चिन्तित होते देखा है। बच्चों को पहाड़ी नौले पार करके स्कूल जाती तस्वीरों पर चिन्तित होते देखा है। मैंने देखा है कि उत्तराखंड से दिल्ली अपना इलाज कराने आऐ लोगों को कैसे वे खुद अस्पताल में भर्ती करवा कर आते थे यहाँ तक की कई बार तो रमेश जी ईलाज़ के लिये दिल्ली आये लोगों का रूकने का प्रबंध अपने दिल्ली स्थित घर पर कर दिया करते थे अस्पताल में भर्ती होने पर उनके लिऐ अपने घर से खाना भी भिजवा देते थे। उन्हें याद भी न होगा कि उत्तराखंड से पलायन कर दिल्ली आये कितने बेरोजगारों को उन्होंने नौकरी दिलवाई है।
उत्तराखंड के विभिन्न दर्शनीय एंव तीर्थ स्थलों पर मैंनै उनके साथ यात्राएं की हैं मुझे याद है कि हयात सिंह चिलवाल (एक अंजान व्यक्ति जिन्होंने अकेले के दम पर पहाड़ी चट्टानों को काटकर सड़क बनाई ) जैसे ग्रामीण की स्टोरी को कवर करने के लिये उन्होंने कितनी मेहनत की थी ताकि उत्तराखंड का व्यक्ति भी राष्ट्रीय परिदृश्य पर आ सके। इसके अलावा पाताल भुवनेश्वर, हाट कालिका, जागेश्वर धाम, गर्जिया धाम पर बनाई गई डाक्यूमेंट्री के साथ ही उत्तराखंड आपदा पर उनकी रिपोर्टिंग को काफी सराहा गया।
आज जब वे उत्तराखंड में सरकार के उच्च पद पर नियुक्त किये गये हैं मैं अपनी शुभकामनाएं देना चाहता हूँ और आशा ही नही अपितु विश्वास करता हूं कि उनकी कुशलता का लाभ उत्तराखंड को अवश्य मिलेगा ।

तस्वीर में रमेश और कमल

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