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और इस लड़के ने वे सभी गीत साध लिए थे: मालिनी अवस्थी

यतीन्द्र मिश्र
लोक गायिका मालिनी अवस्थी बता रहीं यतीन्द्र मिश्र के बारे में,

साथीकी ख़ूबी
लोक गायिका मालिनी अवस्थी बता रहीं यतीन्द्र मिश्र के बारे में, यतीन्द्र की किताब लता सुर गाथा को सिनेमा की बेहतर किताब होने का पुरस्कार देने की घोषणा हाल में हुई हैं। यतीन्द्र अयोध्या में रहते हैं।

मालिनी अवस्थी की नज़र में यतीन्द्र मिश्र:-
बीस वर्ष पूर्व एक उत्साही तरुण से अयोध्या में भेंट हुई, मोहित, जिसे अब दुनिया यतीन्द्र मिश्र के नाम से जानती है। सामान्य परिचय समान रुचियों के कारण शीघ्र ही घनिष्ठता मे बदल गया। उम्र से कहीं अधिक परिपक्व अध्ययन-रत उस तरुण की साहित्य, संगीत कीगहरी पकड़ उसके उज्ज्वल भविष्य का संकेत देती थी।
पारिवारिक संबंध सा बन गया, मुझे बहुत आदर के साथ भाभी कह पुकारने वाला वह तरुण शिष्य था मूर्धन्य विद्वान पद्मभूषण पंडित विद्यानिवास मिश्र जी का, और मैं सुरसाधिका पद्मविभूषण गिरिजा देवी जी की! यह बड़ा रोचक संबंध था, जहां हम दोनों ने अपने गुरुओं के अलावा एक दूसरों के गुरुओं के चरणों मे बैठ कर एकलव्य की भांति ज्ञान प्राप्त किया।
में बाबू जी से, तो वह अप्पा जी से! राग रागिनी गवैयों के किस्से कहानियों से इतर साहित्य पर चर्चा होती और दुर्लभ लोक साहित्य पर! उसकी दादी के पास लोकगीतों का बेशकीमती खजाना था, और इस लड़के ने वे सभी गीत साध लिए थे। इनसे हटे, तो फिल्मी गीतों का प्रकाण्ड ज्ञान! दरअसल पूरा परिवार ही संगीत साहित्य के रस में भीगा है। लोक शास्त्र साहित्य संगीत फ़िल्म इल्म कुछ भी जानना हो तो मोहित के घर उसकी बुआओं और बहन मिनी के साथ घंटों चर्चा कर बिताए जा सकते हैं।
उस समय का छोटा सा मोहित अब बड़े काम कर रहा है, बहुत बड़ी लकीर खींच रहा है, लता सुरगाथा मे यतीन्द्र मिश्र की संगीत की बारीकियों पर जो गंभीर पकड़ दिखती है, वह अद्भुत है।
विगत अनेक वर्षों से उससे चर्चा होती रही थी लता जी पर आने वाली पुस्तक के विषय पर! उनसे हुए संवाद के किस्से सुनने को मिलते थे और लंबी प्रतीक्षा के बाद जब पुस्तक आई, तो कैसी अनुभूति हुई, वह शब्दों में नही व्यक्त कर सकती।
……
पुस्तक ने चहुँ ओर धूम मचाई हुई है और निरन्तर समीक्षकों की प्रशंसा एवं पुरस्कारा पाती जा रही है लेकिन राष्ट्रीय सम्मान की बात ही अलग है।
“लता सुरगाथा” को राष्ट्रीय फिल्म सम्मान का स्वर्ण कमल दिया जाएगा ।
यह सम्मान यतीन्द्र की दृष्टि, समझ, जानकारी और बारीक अध्ययन और कठिन परिश्रम का परिणाम है लता जी जैसी जागृत सरस्वती से उनके संघर्ष, उनके अनुभव और अनुभूतियों को निकलवाना और उसे मोती समान अक्षरों में पिरो कर सुरीले ढंग से पाठकों के समक्ष रखना, यह असाधारण उपलब्धि है।यह पुरस्कार लेखक और प्रकाशक दोनों को दिया जाता है अतः बधाई अरुण महेश्वरी जी को, अद्विती माहेश्वरी को,
मोहित, तुम्हारी इस उपलब्धि को दादी देख देख मुस्कुरा रही होंगी, भैया, भाभी, बुआओं का आशीर्वाद और मिनी का साथ ऐसे ही तुम्हे नित्य सफलता दिलाता रहे।

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