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दुख का उत्सव मनाने वाली कोई स्त्री ही मेरी नायिका हो सकती है….वो हैं विभा रानी: गीता श्री

वरिष्ठ कथाकार गीता श्री और विभा रानी

साथी की ख़ूबी
वरिष्ठ कथाकार गीता श्री बता रहीं अपनी साथी विभा रानी के बारे में। विभा लेखिका और कलाकार हैं। मुम्बई रहती हैं। समरथ नाम से एक किताब लिखी है। आज विभा जी का जन्मदिन है।

विभा रानी के बारे में
गोनू झा के क़िस्से याद आते तो उनकी किताब पलट लेती. वो मेरे लिए मिथिला अस्मिताकी परिचायक थीं. हिंदी में कविताएँ , कहानियाँ यदाकदा पढ लेती थी और उनकी आँचलिक ख़ुशबू पर हैरां होती कि महानगर में रहते हुए इस ख़ुशबू को कैसे बचा पाईं होगी? कितने नादां थे हम कि हम जान न पाए, यह तो पूरी नौरंगी नटनी हैं हमारी छम्मक छल्लो. पूरा लोक ओढ़े जीती हैं. न भूलती हैं न भूलने देती हैं.
विभा रानी…कई रुप. परिचय देने लगूँ तो लंबी लाइन लिखनी पड़ेगी.
पहले इनका बस नाम भर सुना था. मिलने से पहले जी भर बातें भी हो चुकी थीं. फिर मिलना भी हुआ एक दिन….भोपाल में लाडली मीडिया अवार्ड लेने आए थे हम दोनों. हड़बड़ की मुलाक़ात थी…
फिर मिले दिल्ली में…फिर तो कई शहरों में मिलना हुआ…
उनसे सोहबत भी हुई, मोहब्बत भी हुई और लड़ाई भी खूब. रुठा रुठी भी खूब. ये सब दोस्ती के सोपान हैं…बिना इनके आगे नहीं बढ सकते. बढ़ते रहे…
साथ रहे और सुख में हँसना और दुख में रोना करते रहे. उनके साहस को प्रणाम करते रहे. दुख का उत्सव मनाने वाली कोई स्त्री ही मेरी नायिका हो सकती है….
वे अपने दुखो को गाती हैं, perform करती हैं. उसको स्त्री चेतना के साथ जोड़ कर हौसला गीत में बदल देती हैं. बहुत कुछ लिखा जा सकता है उनके बारे में…
वे मेरी दोस्त हैं. आज उनका जन्म दिन है. उनके साहस, हौसले और सक्रियता को सलाम. रंगकर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सलाम !
एक गतिमान स्त्री को शक्तिमान में बदलते देखना बहुत सुखकारी !
जिओ रे विभा जी ! युगों तक कीर्ति पताका फहरता रहे.

बिहार दिवस पर सुनिए एक अभियान गीत। साइकिल के मेटाफर में।
https://youtu.be/zn3yf-meWcg

नोट: साथी की ख़ूबी मीडिया मिरर का कालम है। जहाँ आप भी अपने साथी पर लिख सकते हैं।

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