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नटवर सिंह कृत one life is not enough का एक अंश

लेखक: नटवर सिंह
किताब चर्चा: एक ही जिंदगी काफी नहीं लेखक: नटवर सिंह

किताब चर्चा: एक ही जिंदगी काफी नहीं
लेखक: नटवर सिंह
हिंदी अनुवाद: रचना भोला यामिनी
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किताब पर अनुवादक रचना की टिप्पणी
स्मृतियों के वातायन से ..5.
के. नटवर सिंह कृत one life is not enough का मेरा हिंदी अनुवाद ‘एक ही ज़िन्दगी काफ़ी नहीं’

एक अंश. —– महात्मा जी उन दिनों आटोग्राफ पर हस्ताक्षर करने के पांच रुपए लेते थे। मेरे हाथ में पांच का नोट था और उनकी तस्वीर थी। पूरी आशा थी कि मुझे उनके हस्ताक्षर मिल जाएंगे। बेहद भीषण गर्मी थी। गाड़ी सही सही समय पर, तीन बज कर पंद्रह मिनट पर आई और इससे पहले कि वह ठहरती, उस महान आत्मा के तीसरे दर्जे के डिब्बे को खोजने के लिए लोगों ने दीवानों की तरह दौड़ना आरंभ कर दिया। मैं यहां-वहां धक्के खाता रहा और उनके कोच के पास भी नहीं फटक सका।मिनट तेज़ी से बीत रहे थे। मैंने मायूस हो कर, दो डिब्बों के बीच से छलांग लगा दी, दूसरी ओर रेंग कर निकला और खिड़की पर लटक गया। वहां से मुझे बापू दिखाई दिए। घुटा हुआ सिर और कमर में बंधी धोती में टंगी घड़ी। वे तो मेरी कल्पना से कहीं अधिक गहरे रंग के थे। ‘बापू जी! कृपया अपने ऑटोग्राफ दे दीजिए।’ मैं तब तक चिल्लाता रहा, जब तक एक आदमी ने वहां आ कर, मुझे चिल्लाने से मना नहीं किया। ‘कोई आटोग्राफ नहीं। बापू उपवास पर हैं। आज वे मौनव्रत रखे हुए हैं।’ मुझे बाद में पता चला कि मुझे जिस व्यक्ति से फटकार पड़ी थी, वे कोई और नहीं बल्कि गांधी जी के निजी सचिव प्यारेलाल जी थे।

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