ममता ब

बंगाली पत्रकार फक्कड़ तो होते हैं पर चोर नहीं

एडीटर अटैक   संदर्भः लंदन में बंगाली पत्रकारों द्वारा चम्मच चोरी हाल ही में ये ख़बर पढ़ने को मिली की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ लंदन गए बंगाली पत्रकारों ने वहां के एक होटल में भोज के दौरान चम्मचें चुराईं। चम्मचें चांदी की थीं। खबर के अनुसार पत्रकारों की ये घटना होटल के सीसीटीवी में कैद हो रही थी। होटल के स्टॉफ ने पत्रकारों को बताया कि आप जो कर रहे हैं वो हम देख पा रहे हैं। होटल स्टॉफ ने पत्रकारों से कहा कि वो चुराई हुई चम्मचें वापस कर दें। अंततः पत्रकारों ने चम्मचें वापस कर दीं, जो उन्होंने अपनी जेबों में रख ली थीं।... Read more
गौतम सिद्धार्थ

मैंने देखा गौतम सिद्धार्थ की आंखें भी गीली हो गई थीं

टॉइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार गौतम सिद्धार्थ का हाल ही में ह्दयघात से निधन हो गया। वो दिल्ली रहते थे। गौतम सिद्धार्थ बहुत काबिल, खुशदिल होने के साथ साथ भावुक इंसान थे। दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी याद कर रहे गौतम सिद्धार्थ के साथ बिताए दिनों को।   साल 2000 की गर्मियां..दैनिक भास्कर के दिल्ली ब्यूरो का दफ्तर गोल मार्केट के क्लासिक हाउस में था..एक सुबह दफ्तर पहुंचा, शायद गुरूवार का दिन था..गुरूवार इसलिए कि उसी दिन रविवार को छपने वाले साप्ताहिक स्तंभ 'सप्ताह का साक्षात्कार' लिखकर भोपाल दफ्तर भेजना होता था। और उस बार मुझे साक्षात्कार लिख कर देना था। मैं दफ्तर पहुंचा तो तत्कालीन ब्यूरो संपादक स्वर्गीय... Read more
ट्रिब्यून

ब्रेकिंग न्यूज से पहले देशहितः संदर्भ ट्रिब्यून की खबर

      - एडीटर अटैक- मीडिया मिरर सम्पादक का नियमित स्तम्भ-  आधार को निराधार बताने वाली रिपोर्टर पर सरकार का शिकंजा सही या गलत हाल ही में द ट्रिब्यून की संवाददाता रचना खेरा पर सरकार ने केस दर्ज कराया है। दरअसल रचना ने आधार कार्ड की एक खबर लिखी थी अपने अखबार में जिसमें दावा किया गया था कि कोई भी व्यक्ति 500 रुपए खर्च करके किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी उसके आधार कार्ड के जरिए पा सकता है। रिपोर्टर ने उन तकनीकी मामलों को उजागर किया था, जिसमें आधार कार्ड की गोपनीयता पर प्रश्नचिंन्ह खड़े होते हैं। आनन फानन में सरकार ने रचना खेरा के खिलाफ केस... Read more
डा सुरेश मेहरोत्रा

हर साल के पहले महीने में पांच लाख रूपये की मदद करते हैं सम्पादक जी

पैसा कमाना बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात है पैसे का उपयोग। भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार डॉ सुरेश मेहरोत्रा 72 वर्ष की उम्र में जो नेक कार्य़ कर रहे हैं वो आदर्श है।  पढ़िए पूरी दास्तान एबीपी न्यूज भोपाल की विशेष संवाददाता ब्रजेश राजपूत की कलम सेः-   हमारे डाक साब को सलाम... मानो या मानो की तर्ज पर आपको मैं जो बताने जा रहा हूं उस पर भरोसा करना या ना करना आपके ऊपर है, हमारे भोपाल के पैंतालीस बंगले इलाके में रहते हैं डा सुरेश मेहरोत्रा, उम्र है 72 साल, वरिष्ठ पत्रकार हैं अपने शुरूआती दिनों में हिंदी और अंग्रेजी के कई अखबारों में संपादकी करने के बाद... Read more
आदिवासी नहीं नाचेंगे

हिंदी समाज को अंग्रेजी के सामने खुद को नंगा करने में मजा आता है. 

कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के पूर्व अधिष्ठाता व प्रसिद्ध साहित्कार लक्ष्मन सिंह विष्ट की कलम सेः-   किताब पर प्रतिबन्ध कोई समाधान नहीं है, ऐसे लेखकों का सार्वजनिक बहिष्कार होना चाहिए. राजकपूर की बेहद घटिया फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के एक दृश्य को लेकर जब पत्रकार-विचारक मृणाल पांडे ने उन पर मुकदमा ठोका था तो सिर्फ इसलिए नहीं कि फिल्म में एक युवती के स्तनों को सरे आम प्रदर्शित किया गया था. मृणाल जी की आपत्ति लोगों के मन में बसी उस रूढ़ छवि को लेकर थी जिसमें पहाड़ी लड़की को सिर्फ एक सेक्स प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है, सीधी-सादी, दूसरों पर सहज ही भरोसा करने वाली... Read more
डॉ. वेदप्रताप वैदिक

शैक्षणिक संस्थाओं में अंग्रेजी की अनिवार्यता पर प्रतिबंध लगेः वेदप्रताप वैदिक

जाने माने पत्रकार वेदप्रताप वैदिक भाषा को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। दिलचस्प है। बतातें चलें कि वैदिक ही वो व्यक्ति हैं जो अटल बिहारी वाजपेयी को सदैव हिंदी बोलने के लिए कहते रहते थे। चाहे वो संयुक्त राष्ट्र का मंच हो या कोई और मंच। इतना ही नहीं वैदिक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे थे। उन्होंने शोध प्रबंध हिंदी में लिखा था। जिसे जेएनयू ने स्वीकार नहीं किया था। अंततः वैदिक भी अपनी बात पर अड़ गए। कोर्ट गए औऱ जीत हुई।  कुल मिलाकर हिंदी भाषा के लिए उनकी लड़ाई जारी है।    2018 में ये 11 काम करें डॉ. वेदप्रताप वैदिक पिछला साल बीत... Read more
पुस्तक मेले

विश्व पुस्तक मेला कैसा होगा, पढ़ लें, फिर जाएं

नई दिल्ली: 7 से 15 जनवरी के बीच दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होने वाला विश्व पुस्तक मेला इस बार नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के 60 साल के लंबे सफर पर केंद्रित होगा. एक विशेष पवेलियन में एनबीटी की ज्ञान यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा. 40 से अधिक भाषाओं में छपी पुस्तकों के साथ विशेष कैलेंडर भी प्रदर्शित होगा. नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन बलदेव भाई शर्मा ने बताया कि हमारा फोकस रहेगा नेशनल बुक ट्रस्ट की ज्ञान यात्रा पर होगा. पिछले साल से हम उन भाषाओं और बोलियों को भी फोकस रहे हैं, जो फोकस से हमेशा बाहर रही हैं, जैसे बस्तर की कुछ बोलियों भाषाओं, त्रिपुरा की कोकबोरोक,... Read more
शशि थरूर, वाणी प्रकाशन की

शशि थरूर की किताब अन्ध​कार काल : भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का लोकार्पण

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्लीः   इण्डिया इण्टर​नेशनल सेण्टर ​में वाणी प्रकाशन से प्रकाशित​ डॉ शशि थरूर की नयी पुस्तक ​अन्ध​कार काल : भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि ऐसी पुस्तकें दशकों में एक बार आतीं हैं ​और ‘अन्धकार काल-भारत में ब्रिटिश साम्राज्य’ किताब कालजयी है। पत्रकार सौरभ द्विवेदी ​ ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। कार्यक्रम वाणी प्रकाशन की निदेशक ​अदिति माहेश्वरी के नेतृत्व में किया गया। इस धमाकेदार पुस्तक में लोकप्रिय लेखक राजनेता व लेखक​ शशि थरूर ने सटीक, प्रामाणिक शोध एवं अपनी चिर-परिचित वाक्पटुता से यह उजागर किया है कि ब्रिटिश शासन काल ​भारत के लिए कितना विनाशकारी था। कार्यक्रम में वक्ता​ के रूप में मौजूद समाजशास्त्री प्रो. अभय कुमार दुबे इन्होंने पुस्तक के छठे​ अध्याय ​ ‘साम्राज्य... Read more
संत संपादक- मामा माणिक चंद वाजपेयी

संत संपादक- मामा माणिक चंद वाजपेयी

! स्मरण ! * राजमाता से चुनाव में हारने के बाद बने पत्रकार * अटलजी ने प्रधानमंत्री आवास में लिया था आशीष [caption id="attachment_2595" align="alignleft" width="108"] डॉ राकेश पाठक[/caption] ०   मध्यप्रदेश ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकार  डॉ राकेश पाठक, पत्रकार व सम्पादक मामा माणिक चंद वाजपेयी को उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहे हैं।        -----  27 दिसंबर को मूर्धन्य पत्रकार,संपादक मामा माणिक चंद वाजपेयी की पुण्यतिथि थी । वे विशुद्घ संत संपादक थे।एकदम खांटी देहाती पहनावा और वैसे ही सहज सरल।नई पीढ़ी के पत्रकार शायद उन्हें ठीक से जानते भी न हों इसलिए आइये आज उनके बारे में बात करते हैं। मामाजी बटेश्वर (आगरा) के रहने वाले थे।... Read more
एबीपी न्यूज भोपाल के ब्यूरो प्रमुख ब्रजेश राजपूत।

एक जल्दी आया फैसला और उत्साही मीडिया की भूलें

एबीपी न्यूज भोपाल के ब्यूरो प्रमुख ब्रजेश राजपूत मीडिया की वर्तमान स्थिति को एक मामले की कवरेज से जोड़कर प्रस्तुत कर रहे हैं। हमेशा दर्शकों को या फिर मीडिया विशेषज्ञों को ये लगता है कि पत्रकार किसी भी दर्दनाक घटना के दौरान कवरेज, बाइट, अनावश्यक सवालों में क्यों उलझे रहते हैं। जैसे गुड़गांव का प्रद्यमन केस। वहां देखने को मिला कि हर चैनल वाला प्रद्यमन के पिता से बात करना चाहता था। कैसे भी, किसी भी कीमत में बात करना चाहता था। नहीं भी राजी तब भी बाइट लेनी ही है। सवाल पूछने ही हैं। प्रद्यमन केस में तो एक अंग्रेजी चैनल की रिपोर्टर प्रद्यमन के पिता से इस बात... Read more