जगदीश उपासने

पूरे 4 बाद सरकारी विमान में चढ़ने को मिला पत्रकारों को

विश्व हिंदी सम्मेलन में पत्रकारों को अपने विमान में ले गई हैं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली। 2014 में मोदी राज आया तो पत्रकारों की सरकारी विमान में यात्राओं पर सबसे पहले पाबंदी लगी। बकायदा सख्ती से आदेश दिए गए पीएमओ से कि कोई भी मंत्री या अधिकारी पत्रकारों को साथ न ले जाएं। वैसा ही हुआ। मोदी जी विदेश जाने में माहिर तो हैं ही। क्या जुकरबर्ग क्या बराक और ट्रम्प और इंग्लैंड की राजमाता, सबसे मिल लिए। पर पत्रकार पीछ पीछे गए। साथ किसी को नहीं ले गए। उनके विमान में बस एएनआई, दूरदर्शन और रेडियो के ही प्रतिनिधि जाते रहे। राष्ट्रपति कोविंद बने तो... Read more
अटल-राजीव। दो युग

राजीव के बारे में विपक्षी नेता के तौर पर नहीं बोलूंगा, बोले थे अटल जी

 ‘‘मैं राजीव के बारे में बोलते हुए बहुत खुश हूं,’’  ‘‘मगर मैं एक विपक्षी नेता के तौर पर नहीं बोलना चाहता क्योंकि इससे मुझे वह कहने की आजादी नहीं मिलेगी जो मैं वास्तव में आपसे कहना चाहता हूं। -अटल विहारी वाजपेयी      [caption id="attachment_3697" align="alignleft" width="300"] अटल मुस्कान[/caption] राजनीतिज्ञ के तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी की मुस्कान सर्वाधिक आकर्षक थी। ऐसा दिखाई देता था कि जैसे वह उनके पूरे चेहरे पर फैली हो मगर उसके साथ ही उनकी आंखों में भी चमक पैदा करती हो। इससे वह एक आनंदित शरारती दिखाई देते थे। वह लगातार मुस्कुराने से हिचकिचाते नहीं थे। दरअसल मुझे लगता था कि उन्हें मुस्कुराने में मजा... Read more
नायपाल और अटल जी

कोई भी व्यक्ति दोषहीन नहीं होता

2 प्रसिद्ध व्यक्तियों का निधन हो गया है और उनके बारे में बहुत-सी बातें लिखी गई हैं। यह भारत में हमारी परम्परा है और विश्व भर में भी इसके बारे में बात की जाती है कि जो लोग दुनिया छोड़ जाते हैं उनके बारे में केवल अच्छी बातें की जाएं। मगर कोई भी व्यक्ति दोषहीन नहीं होता और ईमानदारी से कहें तो यह बात हम खुद पर भी लागू कर सकते हैं।    इसी भावना से हम इन दो व्यक्तियों के जीवन के कुछ पहलुओं पर नजर डालते हैं जो हमसे बिछुड़ गए हैं। इनमें से अधिक रुचिकर हैं लेखक वी.एस. नायपॉल। उनका पहला नाम विद्याधर था और वह त्रिनिदाद... Read more
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पंजाब केसरी ने दी केरल बाढ़ पीड़ितों को 21 लाख की मदद

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली। पंजाब केसरी समूह जालंधर ने केरल में बाढ़ प्रभावितों के लिए 21 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी है। पंजाब केसरी ने प्रधानमंत्री राहत कोष में 21 लाख रुपए बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जमा कराए हैं। मीडिया संस्थानों के ऐसे प्रयास तारीफ के काबिल हैं औऱ प्रेरक भी। गौरतलब है कि पंजाब केसरी समूह करगिल शहीदों, जम्मू कश्मीर बाढ़ पीड़ितों और समय समय आई अन्य प्राकृतिक आपदाओं में मदद करता रहा है। संस्था के मुखिया पदमश्री विजय चोपड़ा के नेतृत्व में हजारों ट्रक राहत सामग्री जम्मू कश्मीर लगातार भेजी गई थी। मिरर एेसे प्रयासों प्रशंसा करता है। Read more
अनिक्षु

ब्रेन ट्यूमर से भास्कर संवाददाता अनिक्षु का निधन

[caption id="attachment_3688" align="alignleft" width="142"] ऑपरेशन के लिए जातीं अनिक्षु अपने परिजनों से मिलती हुई, पता नहीं पता था कि नहीं उसको कि ये अंतिम मिलन है।[/caption] मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली।  दैनिक भास्कर रोहतक की संवाददाता अनिक्षु भारद्वाज का ब्रेन ट्यूमर से जूझते हुए आज सुबह निधन हो गया। वो बमुश्किल 25 वर्ष की थीं। हरदिल अज़ीज, सदैव मुस्कुराती रहने वाली अनिक्षु को कुछ समय पहले ही ब्रेन ट्यूमर होने का पता लगा था और 5 दिन पहले ही उनका रोहतक पीजीआईएमएस में ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद से ही उन्हें होश नहीं आय़ा और आज तड़के उनके करीबी एसपी सिंह ने मिरर को ये दुखद सूचना दी। एसपी... Read more
अटल बिहारी बाजपेयी

अटल यात्राः मृत्यु नहीं मुक्ति का उत्सव

अटल जी के निधन की खबर से मुझे दुख नहीं हुआ। मुझे लगा कि ये मुक्ति थी। मुक्ति थी संसार से, मुक्ति थी असहनीय पीड़ा से औऱ मुक्ति थी असाध्य बीमारियों से और जीर्ण शीर्ण होती काया से। थोड़ा अचरज होगा आप सबको पर अटल जी अगर बोल पाते होते तो वो भी अपने परम मित्र गोपालदास नीरज की तरह इच्छामृत्यु मांग लेते। अटल जी जीवंत व्यक्तित्व थे वो इस तरह से जीना नहीं चाहते कभी। खैर अटल जी की अंतिम यात्रा का प्रसारण मैंने कई चैनलों पर देखा औऱ अंततः आजतक पर आकर रुक गया। आजतक पर आलोक मेहता, नलिनी सिंह, मनीषा प्रियम और साथ में कुमार विश्वास की... Read more
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

ट्रम्प के खिलाफ 350 मीडिया संस्थानों ने लिखी संपादकीय

अमेरिका के बोस्टन ग्लोब अख़बार ने ‘एनमी ऑफ नन’ हैशटैग का इस्तेमाल करके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मीडिया विरोधी रुख़ की राष्ट्रव्यापी निंदा की अपील की थी. जिस पर हर अख़बार ने ट्रंप की मीडिया विरोधी टिप्पणियों के विरुद्ध अपना-अपना संपादकीय लिखा है.   न्यूयॉर्क: करीब साढ़े तीन सौ मीडिया संगठनों ने पत्रकारों पर बार-बार हमला करने और कुछ समाचार संगठनों को अमेरिकी जनता के दुश्मन के रूप में पेश करने को लेकर गुरुवार को अमेरिका के राष्ट्रपति के खिलाफ एकजुट अभियान शुरू किया. ट्रंप ने हाल के हफ्तों में मीडिया पर हमले तेज किए हैं. व्हाइट हाउस ने पिछले ही महीने ट्रंप से अनुपयुक्त सवाल पूछने को लेकर एक सीएनएन... Read more
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अब ट्रिब्यून के नवीन ग्रेवाल पर चला सरकारी चाबुक

ट्रिब्यून अंग्रेजी के हरियाणा ब्यूरो चीफ हैं नवीन खट्टर नहीं चाहते थे कि चुनाव तक रुकें नवीन,  मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली।  ट्रिब्यून चंडीगढ़ से खबर मिल रही है कि एक दशक से भी ज्यादा लम्बे समय से ट्रिब्यून समाचार पत्र के हरियाणा ब्यूरो चीफ रहे नवीन ग्रेवाल का स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से हैदरबाद कर दिया गया है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि उनकी बदली सामान्य नहीं है इसके पीछे सियासत के लोग हैं। उल्लेखनीय है कि ट्रिब्यून को ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। और फिलहाल इस ट्रस्ट के मुखिया संवैधानिक पद पर हैं। औऱ ट्रस्ट के मुखिया का कार्य़काल खत्म होने वाला है और उन्हें सेवा विस्तार चाहिए।... Read more
रवीश कुमार

रवीश कुमार का कल जानते थे जितिन भूटानी

एनडीटीवी के कैमरा मेन जितिन भूटानी का हाल ही में निधन हो गया है। उन्हें याद कर रहे एनडीटीवी के कार्य़कारी सम्पादक रवीश कुमार।    कैमरामैन जितिन भूटानी के साथ रवीश कुमार शुरूआती दिनों की मेरी अनगिनत रिपोर्ट इसी बाइलाइन से ख़त्म होती थी। स्टोरी सामान्य हो या विशिष्ट कैमरामैन सबमें बराबर काम करता है। इसलिए मैं उसके साथ शूट की हुई हर स्टोरी में उसका नाम ज़रूर जोड़ता था। जितिन के साथ जाने कहाँ कहाँ गया। वो मेरे पेशेवर ज़िंदगी का गवाह था। मैं उसकी ज़िंदगी का। रिपोर्टिंग का कोई भी क़िस्सा याद करता हूँ जितिन भूटानी ही दिख जाता है। अपनी स्टोरी में इतनी बार उसका नाम लेता... Read more
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वो अश्लील! कविताएं जिन्होंने आजकल हिंदी पट्टी में मचा रखा है बवाल

वर्ष 2018 को गुदावर्ष घोषित कर दो’ अंबर पांडेय और मोनिका कुमार की कविता-शृंखला :: अंबर पांडेय की कविताएँ मेरी प्रेमिका के गुदास्थान का विवरण रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए मैं इसे नहीं लिखना चाहता। अपनी प्रेमिका को यह लिखकर मैं अचंभित भी नहीं करना चाहता क्योंकि अचंभा कोई ऐसा मनोभाव नहीं जिस पर प्रेमी का एकाधिकार हो—जिस तरह उसके गुदास्थान पर मेरा अधिकार है। साहित्य के आलोचकों को चौंका देने के लिए भी मैं यह नहीं लिखना चाहता। गुदास्थान पर लिखने में समस्याएँ भी बहुत हैं, ख़ासतौर पर तब जब इसे लिखने वाला मुझ जैसा कोई धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति हो। अधिकतर बिंब खाद्य पदार्थ या धर्म संबंधित... Read more