दामिनी यादव

दामिनी यादव की 2 कविताएं

बिकी हुई एक कलम... बिकी हुई कलम के दाम बहुत होते हैं पर बिकी हुई कलम के काम भी बहुत होते हैं बिकी हुई कलम को कीचड़ को कमल कहना पड़ता है बिकी हुई कलम को क़ातिल को सनम कहना पड़ता है बिकी हुई कलम को मौक़े पर ख़ामोश रहना होता है और बेमौक़े ‘सरकार की जय’ कहना होता है बिकी हुई कलम एक खूंटे से बंधी होती है बिकी हुई कलम की सियाही जमी होती है बिकी हुई कलम रोती नहीं, सिर्फ़ गाती है बिकी हुई कलम से सच की आवाज़ नहीं आती है बिकी हुई कलम शाहों के तख़्त नहीं हिला पाती है बिकी हुई कलम सिर्फ़ चरण-पादुका... Read more
R Rajagopal, editor of The Telegraph

The Telegraph editor, R Rajagopal: Cannot afford to stay neutral

by anuradha sharma  “When was the last time you saw such a headline?” R Rajagopal, editor of The Telegraph, asked a hall full of college students last month. “Let us see how the headline works here: first the sledgehammer blow. Then the tug at the heartstrings.” As part of his guest address at St Berchmans College, Changanassery in Kerala, Rajagopal circulated copies of the front page of the last edition The Warroad Pioneer, the 121-year-old community paper of Minnesota that closed down recently, and asked the students to roll the headline off their tongues: Final Edition/How Lucky To Have Known Something So Hard To Say Goodbye To. “No pronoun. No names at... Read more

हिन्दुस्तान अख़बार में छपी यह रिपोर्ट पुलित्ज़र कमेटी को भेजी जानी चाहिए

रवीश कुमार, प्रबंध सम्पादक एनडीटीवी अयोध्या में दीपोत्सव की रिपोर्टिंग ने पत्रकारिता में नए मानक स्थापित किए हैं। यह रिपोर्ट हमें सीख देती है कि अगर सामने भगवान आ जाएं तो उनकी रिपोर्टिंग की शब्दावलियां क्या होंगी। हिन्दुस्तान अख़बार में छपे आदर्श शुक्ल की यह रिपोर्ट पुलित्ज़र कमेटी को भेजी जानी चाहिए। कोलंबिया स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म में इसका अध्ययन होना चाहिए। आदर्श ने उस बात की रिपोर्टिंग की है जो उन्हीं के शब्दों में “सिर्फ महससू किया जा सकता था, बयां करना मुश्किल था।“ भारत में जहां भी पत्रकारिता की पढ़ाई होती है वहां क्लास रूम में इस रिपोर्ट को फ्रेम कर टांग देना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी इससे सीखे।... Read more
समीरा

BBC journalist Samira Ahmed supported by colleagues

SOLIDARITY FOR SAMIRA  BBC journalist Samira Ahmed supported by colleagues including Naga Munchetty as equal pay case begins TV and radio presenter Samira Ahmed was cheered by colleagues as she took the BBC to court over unequal pay yesterday. Samira, 51, is claiming she was paid less than male colleagues doing “very similar jobs”.   She says she got £465 per episode of Newswatch while Jeremy Vine received £3,000 for doing Points of View. Arriving at the Central London Employment Tribunal yesterday, Samira was backed by colleagues including BBC Breakfast host Naga Munchetty and journalist Carrie Gracie, who resigned as BBC China Editor last year over the gender pay gap. Ms... Read more
इमरान खान

पाक सरकार ने एंकरों पर लगाई पाबंदी, कहा विशेषज्ञ न बनें

इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक (PEMRA)) ने 'टॉक शो' के दौरान टीवी एंकरों (Tv Anchors) के राय देने पर रोक लगा दी है. साथ ही उनकी भूमिका महज 'संचालन' करने तक सीमित कर दी है. सोमवार को एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई. डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, रविवार को जारी किए गए आदेश में पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (पीईएमआरए) ने नियमित शो करने वाले एंकरों को निर्देश दिया कि वे अपने या दूसरे चैनलों के टॉक शो में 'विशेषज्ञ की तरह पेश न आएं'. एंकर्स को दी गई ये हिदायत पीईएमआरए की आचार संहिता के मुताबिक एंकर की भूमिका कार्यक्रम का संचालन निष्पक्ष, तटस्थ और बिना... Read more
मटियानी

स्मृति में शैलेश मटियानी

विज्ञान लेखक देवेन मेवाड़ी की कलम से  सन् साठ के दशक के अंतिम वर्ष थे। एम.एससी. करते ही दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में नौकरी लग गई। आम बोलचाल में यह पूसा इंस्टिट्यूट कहलाता है। इंस्टिट्यूट में आकर मक्का की फसल पर शोध कार्य में जुट गया। मन में कहानीकार बनने का सपना था। ‘कहानी’, ‘माध्यम’ और ‘उत्कर्ष’ जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं में मेरी कहानियां छपने लगी थीं। समय मिलते ही कनाट प्लेस जाकर टी-हाउस और काफी-हाउस में जाकर चुपचाप लेखक बिरादरी में बैठने लगा था। पूसा इंस्टिट्यूट के भीतर ही किराए के एक कमरे में अपने साथी के साथ रहता था। कभी-कभी इलाहाबाद से प्रसिद्ध लेखक शैलेश मटियानी जी... Read more
प्रिंस

इंग्लैंड के राजकुमार हैरी का आरोप, मां की तरह पत्नी की पीछे पड़ा मीडिया

लंदन। ब्रिटेन के प्रिंस हैरी ने बुधवार को अपनी पत्नी मेगन मार्कल के बचाव में आते हुए कहा कि मीडिया का एक तबका उनकी पत्नी के खिलाफ निर्मम अभियान चला रहा है। ड्यूक ऑफ ससेक्स हैरी ने तथाकथित ‘प्रेस पैक’ (पत्रकारों का झुंड) पर आरोप लगाया कि पिछले नौ महीने से उनकी पत्नी को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मीडिया उनकी पत्नी के साथ वैसा ही व्यवहार कर रही है जैसा उनकी मां और प्रिंसेस ऑफ वेल्स डायना के साथ किया गया था। प्रिंसेस डायना की मौत 36 साल की उम्र में 1997 में पेरिस में एक कार दुर्घटना में हो गया था। ऐसा कहा जाता है... Read more
लता मंगेशकर

टीवी में बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं और अखबार में भी ज्यादा बताते हैंः लता मंगेशकर

लताजी का आज 91वां जन्मदिन है, इस मौके पर दैनिक भास्कर ने उनसे बातचीत की   आजकल लोग कहते हैं कि टीवी में बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। अखबार में भी ज्यादा लिखते हैं, जो हुआ भी नहीं है। लेकिन मैं सोचती हूं कि किसी ने 100 बातें बताई हैं, ताे उसमें से 50 तो ठीक होंगी। मैं सच्ची बात कहती हूं,मीडिया से जरा दूर ही रहती हूं। ज्यादा मिलना या टीवी पर बार-बार जाना और इंटरव्यू देने से दूर रहती हूं। मुंबई (उमेश कुमार उपाध्याय). स्वर कोकिला लता मंगेशकर का आज 28 सितंबर 91वां जन्मदिन है। फिल्म संगीत में 70 साल के अभूतपूर्व योगदान पर प्रधानमंत्री ने 6 सितंबर को ट्वीट कर उन्हें... Read more
सुप्रिया

दूरदर्शन के महानिदेशक पद से मुक्त हुईं सुप्रिया साहू

नई दिल्लीः दूरदर्शन की महानिदेशक आईएएस ऑफिसर सुप्रिया साहू अपना तीन वर्ष का कार्य़काल पूरा कर चुकी हैं। आज वो दूरदर्शन की सेवाओं से मुक्त हो जाएंगी। सुप्रिया साहू ने बताया कि वो वापस अपने तमिलनाडु कैडर में लौट जाएंगी। सुप्रिया साहू ने अपने तीन वर्ष के कार्य़काल को शानदार बताते हुए अपने वरिष्ठ औऱ कनिष्ठ सहयोगियों के प्रति आभार जताया है। दूरदर्शन में रहते हुए सुप्रिया साहू की उपलब्धि के बारे में अगर कहें तो कोई खास बात तो नजर नहीं आती। चूंकि सरकारी संस्थानों में कामकाज की अपनी सीमाएं हैं। वो आईएएस अफसर हैं, सरकार के अधीन रहकर ही उन्हें काम करना है। बावजूद उनकी सक्रियता काबिले तारीफ... Read more
बाबुल

केंद्रीय मंत्री ने अख़बार सम्पादक से माफ़ी मांगने को कहा

नई दिल्ली: अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि केंद्रीय मंत्री बाहुल सुप्रियो ने अखबार के संपादक को फोन करके एक हेडलाइन के लिए माफी की मांग की और अपशब्दों का इस्तेमाल किया. बता दें कि, केंद्रीय मंत्री सुप्रियो कोलकाता के जाधवपुर यूनिवर्सिटी में उपजी हालिया अशांति के लिए अपनी भूमिका को लेकर विवाद के केंद्र में हैं. रिपोर्ट के अनुसार, शाम को करीब 7:50 बजे मंत्री ने टेलीग्राफ के संपादक आर. राजगोपाल को शाम की न्यूज मीटिंग के दौरान उनके मोबाइल पर फोन किया. सुप्रियो ने अपनी पहचान बताने के बाद कहा कि वह एक मैत्रीपूर्ण माफी चाहते हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि संपादक के यह... Read more