जरा हटके

media mirror

THE DEATH OF INVESTIGATIVE JOURNALISM

How Indian newsrooms became morgues for investigative journalism JOSY JOSEPH FOR CARAVAN The word “byline” first appeared about a century ago in Ernest Hemingway’s novel The Sun Also Rises. Over time, for idealists among us, the byline came to represent the power of journalism—the courage it provided an ordinary reporter to challenge the high and mighty. As a young journalist, this was the sort of byline I aspired for, whose sanctity, I believed, was to be doggedly protected by editors. Over my career, I have watched the byline die a slow and violent death. It has been killed not only by power-hungry politicians and corporate barons, but also by media owners and... Read more
द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट

द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट भाग-7

प्रशांत राजावत-सम्पादक मीडिया मिरर दिल्ली में मौसमी सर्दी तो बरकरार है पर सियासी पारा बढ़ गया है। खैर अपन से क्या मतलब। अपन अंतिम हिस्से में ये बता चुके थे कि कैसे मेरी दूसरी नौकरी लगी और छूटी। उसके बाद अपन थोड़ा प्रेम व्रेम की बातें कर गए थे, भाग-6 में। तो अपन इस बार चर्चा करेंगे दूसरी नौकरी छूटने के बाद के समय की और उसके बाद कैसे मिली तीसरी नौकरी... ग्वालियर में सब भुगतकर नौकरी वौकरी छोड़कर घर पहुंच गए। सर्दी के दिन थे। हमारा कस्बा पहाड़ी कस्बा था। चारो ओर से पहाड़ों से घिरा, एक छोटा सा हिल स्टेशन। स्वच्छ औऱ सुंदर वातावरण। पहाड़ी इलाके की वजह... Read more
मीडिया मिरर

द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट भाग-6

प्रशांत राजावत-सम्पादक मीडिया मिरर सर्दी बहुत है दिल्ली में। मैं तो फिलहाल नौकरी से टर्मिनेट चल रहा हूं इसलिए घर पर ही हूं। हां भाई एक अखबार में नौकर हूं। अपन नौकरी ठीक वैसे नहीं करते जैसे सब करते हैं। 3 महीने की छुट्टी पर था वापसी की तो सम्पादक ने फिलहाल वापसी नहीं कराई। इस्तीफा नहीं लिया है और न मैंने दिया है। आशा है जल्द वापसी होगी। खैर ये सब चलता रहता है। इसी बहाने घर पर हूं और फिल्में देख रहा हूं ढेर सारी। और हां 3 महीने की छुट्टी हनीमून के लिए मीडिया रिसर्च के लिए  थी। खैंर अपन चलते हैं 2009 में, क्या रखा 2019... Read more
मीडिया मिरर

द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट भाग-5

प्रशांत राजावत-सम्पादक मीडिया मिरर पिछले तमाम हिस्सों को अगर आपने पढ़ा होगा तो निश्चित ही समझा औऱ जाना होगा कि मेरे पत्रकारिता की कहानी अभी ग्वालियर में ही घूम रही है। एक तरह से कहें तो ग्वालियर से ही मैंने पत्रकारिता की शुरूआत की। बहुत कम हिस्सा एक देहात में शुरू में बिताया। पर वो भी ग्वालियर जिले में ही पड़ता था। पिछले हिस्से में मैंने बताया था कि कैसे एक दैनिक हिंदी अखबार के साथ मेरे नौकरी की शुरुआत हुई औऱ कैसे मेरी मेरे पहले अखबार से विदाई सुनिश्चत हुई। हम कहानीं में आगे बढ़ें उससे पहले बता दें कि जैसा कि मैंने पहले ही अखबार में काम करते... Read more
मीडिया मिरर

द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट भाग-4

प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर   डायरी के पुराने हिस्सों को आपने अगर पढ़ा होगा तो आपको पता ही चला होगा कि ग्वालियर के एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत हो चुकी थी। इसी अखबार में अपने कामकाज की चर्चा आज भी करेंगे। जैसा की मैंने बताया था कि हमने दिल लगाकर काम किया। सिर्फ काम किया। जी तोड़ काम किया और नतीजा ये हुआ कि सम्पादक के करीब तो नहीं जा पाए पर मालिकों के प्रिय हो गए थे। हकीकत तो ये है कि एक दैनिक अखबार में एक सक्रिय रिपोर्टर ( सक्रिय रिपोर्टर से तात्पर्य सिटी का कम से कम आधा पेज मेरी खबरों... Read more
मीडिया मिरर

द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट-भाग-3

प्रशांत राजावत-सम्पादक मीडिया मिरर   आज मैं चित्रा मुद्गल जी का साक्षात्कार पढ़ रहा था। उनसे पत्रकार प्रश्न करता है कि आप अपने बारे में कुछ कब लिखेंगी। चित्रा जी कहती हैं। लिखूंगी। थोड़ा ठहरकर। खुलासे करूंगी। निश्चित ही चित्रा जी अपनी आत्मकथा लिखने के बारे में बात कर रही थीं। अमूमन होता भी यही है कि लोग अपने जीवन के अंतिम चरण में आत्मकथा लिखते हैं। जिसमें जीवन की पूरी यात्रा आ जाती है। आत्मकथा किसी की भी देखिए उम्रदराज होकर ही लोगों ने लिखी हैं। दरअसल कम उम्र में कहने को ज्यादा कुछ होता कहां हैं। लेकिन मैंने चित्रा जी का फार्मूला नहीं अपनाया। मुझे लगता है मेरी... Read more
मीडिया मिरर

द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट-भाग-2

प्रशांत राजावत- सम्पादक मीडिया मिरर डायरी के पहले भाग में हमने आपको बताया था कि कैसे हम गांव से दिलवालों के शहर दिल्ली आए और वहां मीडिया की पढ़ाई के नाम फर्जी कालेज के जाल में फंसे। डायरी की दूसरी कड़ी में हम आपको बताएंगे कि कैसे प्रशिक्षु पत्रकार यानि ट्रेनी जर्नलिस्ट बनने के लिए हमने एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन-तीन राज्यों की खाक छानी और मिला क्या शून्य बटे शून्य। ----         दिल्ली, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ से लाइव..                                                      ... Read more
मास्टरनी

मास्टरनी की आपबीतीः सुडौल छात्र हमारी छाती नापते हैं

  देखा कि 10,11, 12 वीं के लड़के बहुत भद्दे प्रकार की अंडरवियर में मेरे सामने खड़े थे। हुआ ये कि झिझककर मुझे वापस आना पड़ा। वो क्षण ऐसा था जैसे मैं किसी कोठे में पहुंच गईं हूं और ये सब मेरे खरीददार।   मास्टरनी। हां मैं मास्टरनी हूं। वही मास्टरनी जिसे देश का सबसे आरामदायक और सुरक्षित पेशा समझा जाता है। मैं इसी पेशे में हूं। आमतौर पर यही समझा जाता है कि मास्टरनी की नौकरी बड़े आराम की नौकरी है। 4 से 5 घंटे स्कूल और बच्चों को पढ़ाकर घर वापसी। सुना था मैंने एक दौर था। जब महिला शिक्षक सम्मान पाती थीं और कक्षा में आत्मगौरव से... Read more
मीडिया मिरर

द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट

   मीडिया पढ़ाई के नाम पर गोरखधंधा प्रशांत राजावत. सम्पादक मीडिया मिरर दरअसल हमलोग निरे देहाती किस्म के लोग थे। शहर आया जाया करते थे पर शहर को समझा-जाना कभी नहीं और यहां के फ़रेबी लोगों से वास्ता नहीं पड़ा। इसलिए जब शहर पढ़ने के लिए आए तो हमें फ़रेबी इंसान भी पहले भलामानुष ही लगा। हम बीए की पढ़ाई खत्म करके अपने मित्र के साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आ पहुंचे। पापा ने कहा था पत्रकार बन जाओ, हमारे यहां एक पत्रकार थे उनका बड़ा जलवा था। मंत्री मिनिस्टर सब जानते थे। बस पापा ने ठान लिया पत्रकार बनाएंगे। हम भी अपना बैग उठाए और आ गए। फिर क्या पश्चिमी... Read more
शैतान सिंह

हमारा शैतान पाकिस्तानी अरशद से कम है क्या, होगा फोटोशूट

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली।  [caption id="attachment_3870" align="alignleft" width="300"] पाकिस्तान के अरशद[/caption] [caption id="attachment_3871" align="alignleft" width="225"] शैतान सिंह की आंखें देखिए, हैं न दुर्लभ[/caption] पाकिस्तान में एक चायवाला रातो रात विश्वभर में प्रसिद्ध हो गया, कारण वो नीली आंखों वाला था। मीडिया ने उसे हीरो बना दिया। अब वो चाय नहीं बेचता बल्कि मॉडल है। अब भारत में भी नीली आंखों वाला एक बच्चा मिला है। और हां ये किसी भी तरह पाकिस्तानी अरशद से कम नहीं है। अरशद से कहीं ज्यादा राजस्थान के करौली जिले के लैंदोरकला गांव में रहने वाले 13 वर्षीय बच्चे शैतान सिंह की आंखें नीली हैं औऱ ये खूबसूरत भी है। भारतीय मीडिया को चाहिए कि... Read more