जरा हटके

parched movie

एमसी-बीसी महिलाओं में लोकप्रियः गालियों के अस्तित्व और विकास की गाथा

मैंने लीना यादव निर्देशित पार्च्ड फिल्म देखी जिसमें राजस्थान के एक गांव की महिलाएं की कहानी को दिखाया गया है जिसमें महिलाओं पर उनके पति और पुरुष वर्ग घोर अत्याचार करते हैं। गाली गलौज, मारपीट से लेकर जबरन सेक्स तक। फिल्म में एक दृश्य है जब फिल्म की मुख्य तीन महिला किरदार शोषित औऱ पीड़ित जीवन छोड़कर भाग आती है स्वतंत्र जीवन जीने की चाह में। अपने पतियों को छोड़कर आ जाती हैं। उसके बाद वो खुलकर मां बहन की गालियां देती हैं। जब आप फिल्म में ये दृश्य देखेंगे तो आपको लगेगा कि ये महिलाएं गालियां देकर स्वतंत्रता का जश्न मना रही हैं। गालियां देकर खुशी साझा कर रही... Read more
बीबीसी रिपोर्टर दिव्या आर्य

बीबीसी स्पेशलः क्या रेप की रिपोर्टिंग में ‘रस’ होता है?

बीबीसी हिंदी संवाददाता दिव्या आर्य की रिपोर्ट है ये। हम बीबीसी से साभार इस रिपोर्ट को यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।  "रेप की ख़बर लगातार चलाई जाती है, पीड़िता से बार-बार सवाल पूछे जाते हैं, उस पर बहुत मानसिक दबाव पड़ता है." "परिवार वाले एफ़आईआर करने से ही घबराते हैं, कि पुलिस में शिकायत की तो कहीं बेटी का नाम मीडिया के ज़रिए सामने ना आ जाए, बदनामी होगी." "मीडियावाले अड़ोसी-पड़ोसी से सवाल-जवाब करते हैं, बात खुल जाती है, लड़की के जाननेवालों में उसकी पहचान ज़ाहिर हो जाती है," पटना के मगध महिला कॉलेज की लड़कियों ने जब अपने मन की कहनी शुरू की तो लगा, मानो तय कर के... Read more
गांव कनैक्शन

मैं पत्रकार हूं, एक लड़की हूं, लेकिन कठुआ जैसी ख़बरें मुझे भी डराती हैं

गांव कनैक्शन मीडिया समूह लखनऊ की पत्रकार नीतू सिंह महिला अपराधों की रिपोर्टिंग पर अपने अनुभव साझा कर रही हैं। उनका ये आलेख गांव कनैक्शन से साभार हम प्रस्तुत कर रहे हैं।   खबरें जो समसामायिक घटनाओं पर आधारित हो...कुछ नई जानकारी देती हों...हर किसी से सरोकार रखती हों...पत्रकारिता में कुछ ऐसी ही परिभाषा खबर की बताई गयी थी...लेकिन अब मैं जो खबरें पढ़ती हूँ, लिखती हूँ, जिनकी रिपोर्टिंग करती हूँ। ये खबरें अब उस परिभाषा से बिलकुल विपरीत हैं...ये खबरें अब हमें डराती हैं, असहनीय पीड़ा देती हैं, ऐसी घटनाओं से हमारा अपनों से और समाज से भरोसा उठता है। ये खबरें हमें घर के अन्दर कैद होने को... Read more
राखी बिरला

मीडिया में इंटर्नशिप नहीं मिल रही थी, समय बदला तो बन गईं मंत्री

[caption id="attachment_3176" align="alignleft" width="300"] राखी बिरला[/caption] आम आदमी पार्टी से दिल्ली की विधायक व दिल्ली विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिरला की कहानी पूरी फिल्मी है। अभी केवल 30 साल की हैं और विधायक, मंत्री और अब विधानसभा उपाध्यक्ष हैं। ये तमाम पद पाने में अच्छे अच्छे राजनेता उम्र गुजार देते हैं पर राखी को सौगात में मिले। दिल्ली के बेहद गरीब दलित परिवार से वास्ता रखने वाली राखी को तनिक भी अहसास नहीं था कि उनकी जिंदगी में कभी ऐसा होगा, जब आईएएस और आईपीएस उन्हें सैल्यूट करेंगे। आपको आश्चर्य़ होगा कि दिल्ली सरकार में मंत्री बनने से महज कुछ महीनों पहले राखी दिल्ली के एक छोटे से न्यूज चैनल में... Read more
शिवराज सिंह चौहान ने

शिवराज जी शर्म है, मगर आती नहीं आपको

एडीटर अटैकः प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर    आदरणीय शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश। हाल ही में आपके प्रदेश के भिण्ड जिले में एक टीवी चैनल के रिपोर्टर को खनन माफियाओं ने ट्रक से कुचलवा कर मरवा दिया। इस रिपोर्टर ने कुछ ही महीने पहले खनन माफिया से जुड़ा स्टिंग किया था। स्टिंग के बदले उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। स्थानीय पत्रकारों ने घटना के बाद प्रदर्शन करना शुरू किया और आपको भोपाल में घेरकर प्रेस से मिलिये कार्य़क्रम के बहाने मृतक पत्रकार के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। घटना तो आपके संज्ञान में पहले से थी क्योंकि आपने ही सीबीआई जांच की सिफारिश की... Read more
पत्रकार संदीप शर्मा का फाइल फोटो

एक पत्रकार की हत्या का मतलब है लोकतंत्र ख़तरे में है

एडीटर अटैकः प्रशांत राजावत    एक पत्रकार की हत्या का मतलब है कि लोकतंत्र ख़तरे में है। जनता की आवाज़ दबाई जा रही है। सत्ताधारी ताकतें उफान पर है। अपराध चरम पर है। जी हां यही मायने हैं एक पत्रकार की हत्या के। जब एक पत्रकार की हत्या होती है तो एक व्यक्ति नहीं मरता बल्कि मरती है जनता की आवाज, पत्रकारिता की साख और वजूद। उस दिन मरता नहीं व्यक्ति बल्कि मर जाती है मीडिया नाम की संस्था जिसे जनता की आवाज़ के रूप में देखा और समझा जाता है।    [caption id="attachment_3078" align="alignleft" width="169"] टीआरटी वर्ल्ड[/caption] [caption id="attachment_3079" align="alignleft" width="169"] विदेश का बड़ा अखबार[/caption] [caption id="attachment_3081" align="alignleft" width="169"] द... Read more
अखबारों

मीडिया की मौसम वैज्ञानिक हैं सुंदर युवतियां

(भेदभाव को लेकर अपील करेंगे युवक) [caption id="attachment_3041" align="alignleft" width="300"] दिल्ली से प्रकाशित आज के  नवोदय टॉइम्स में एक मौसम वैज्ञानिक गर्मी के आने का संकेत देते हुए [/caption] गर्मी आ रही है, अख़बारों में अब आप देखेंगे लड़कियों की तस्वीरें दुप्पट्टे से मुँह ढके हुए या रंग बिरंगे छाते से धूप से बचते हुए और कैप्शन लिखा होगा गर्मी का कहर: धूप से बचती युवतियां। तो हम सबको पता लगेगा की गर्मी आ गयी।। [caption id="attachment_3040" align="alignright" width="300"] बरसात के दिनों में[/caption] जब बरसात आएगी तब भी फुहारों के बीच अठखेलियां करती कोई युवती ही बताएगी की बरसात आ गयी, केप्शन होगा पानी की फुहारों में मस्ती करती युवतियां और... Read more
दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

मीडिया बुरा है पर अच्छा भी करता है, देखो एक जिंदगी बचा ली

  मीडिया और पत्रकारों को बहुत गाली मिलती है। बहुत आलोचनाएं झेलनी पड़ती हैं। पर कभी सोचा है मीडिया न हो, पत्रकार न हों तो क्या हो। जैसे सेना, पुलिस, न्यायपालिका और चिकित्सक न होने पर अस्थिरता आ सकती है ठीक वैसे ही मीडिया न होने पर भी देश में अस्थिरता आ जाएगी। खबरों का कोई स्रोत नहीं होगा आपके पास। आपकी सुबह की चाय के साथ अखबार नहीं होंगे तो सोचो कैसा लगेगा।   बहरहाल हम ये सब इसलिए कह रहे हैं कि मीडिया को लाख गाली दो, पत्रकारों को कोसो पर उनके योगदान को सराहो, उनकी हत्या पर शोक व्यक्त करो। क्योंकि मीडिया काम तो समाज के लिए ही... Read more
बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ

बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ वाले देश में बेटियों का नाम अनचाही

बेटे की चाह पूरी न होने पर बेटियों का नाम ही रख दिया ‘अनचाही’ इन दो ‘अनचाही’ नाम की लड़कियों में से एक बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा है, जबकि दूसरी छठी कक्षा में पढ़ती है.   मध्य प्रदेश में मंदसौर जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर बिल्लौद गांव में मन्नत मांगने पर भी जब दो परिवारों की बेटे की चाह पूरी नहीं हुई तो उन्होंने अपनी सबसे छोटी बेटियों का नाम ही ‘अनचाही’ रख दिया है. इन दोनों लड़कियों का नाम जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल एवं आधार कार्ड में भी ‘अनचाही’ लिखा गया है. जो भी इस नाम को देखता है, चौंक जाता है. गौरतलब है कि मध्यप्रदेश... Read more
आग के हवाले

तो क्या विज्ञापन के चलते जान से हाथ धो रहे कस्बाई पत्रकार

प्रभात खबर बिहार के वरिष्ठ पत्रकार पुष्य मित्र की कलम से, पुष्यमित्र बहुत बारीकी और गंभीरता से तथ्यों के साथ अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कस्बाई पत्रकारों की मौत के कारण को विज्ञापन की प्रक्रिया से जोड़ा है। पढ़िए।    बिहार में कल रात फिर दो पत्रकारों की हत्या हो गयी। सुबह फेसबुक खोलते ही यह खबर सामने आई। इस बार दो पत्रकारों को एक मुखिया द्वारा स्कार्पियो से कुचल कर मारने की बात सामने आ रही है। पत्रकार बाइक पर थे। कल की घटना को मिला दें तो पिछले डेढ़-दो साल में इस तरह पत्रकारों की हत्या के मामले दहाई में पहुंच गए होंगे। इस... Read more