जरा हटके

जाति आधारित पत्रकारिताः कई दिलीप मंडलों की जरूरत

एडिटर अटैक डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर   दिलीप मंडल का आयां बायां क्या है ये और बात है। लेकिन जब जहां दिलीप मंडल का नाम आता है कहने की जरूरत नहीं कि हमारे दिलो दिमाग में क्या चलने लगता है। जाति के लिए काम करने वाला पत्रकार, जाति के लिए लिखने वाला पत्रकार, जाति के लड़ने वाला पत्रकार, जाति के शोषण, पिछड़ेपन व भेदभाव को उजागर करने वाला पत्रकार। हां ये औऱ बात है कि वो जाति विशेष के लिए लिखते हैं। वो निम्न जातियों व दलितों के मसीहा पत्रकार के तौर पर पहचाने जाते हैं। आर्थिक, सामाजिक व मानसिक तौर पर पिछड़ चुकी जातियां निम्न या नीची... Read more
मीडिया मिरर

 मीडिया में सरकार की घुसपैठ का खेल

एडिटर अटैक-डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर आजकल फेसबुक इंडिया की एक बड़ी अधिकारी सुर्खियों में हैं। नाम है अंखी दास। श्रीमती दास पर आरोप हैं कि उन्होंने फेसबुक के नियमों को हाशिए पर रखकर भाजपा नेताओं की हेट स्पीच यानी नफरत भरी पोस्ट या बयान चलने दिए। ये खुलासा चूंकि अमेरिका के प्रसिद्ध अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में हुआ तो देशभर में हो हल्ला मच गया। विपक्षी पार्टियों ने भी इस मुद्दे को काफी उछाला। और अंततः बहस चालू हो गई कि अंखी दास भाजपा की करीबी हैं। दास और भाजपा के संबंधों को जानने के लिए अतीत टटोला जाना लगा। जिसमें पाया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र... Read more

मोदी राज में प्रेस स्वतंत्रता और प्रेस प्रबंधन

एडीटर अटैक- डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर    अभी हाल ही में हम भारत के लोग अपना स्वतंत्रता दिवस मनाकर रीते हैं। तो मैंने सोचा लगी ताक हम नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल में प्रेस की स्वतंत्रता का एक खाका खींचें। वैसे भी सुनने में आ रहा कि नरेंद्र मोदी पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बन चुके हैं जिसने इतना लम्बा कार्य़काल पूरा किया हो। निसंदेह वो बधाई के पात्र हैं। मोदी राज में अगर प्रेस स्वतंत्रता की बात करें तो 2019 में जारी रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर संस्था ने भारत को 140 वें नम्बर पर रखा है। पर इस तकनीकी मुद्दे पर हम बात नहीं करेंगे। हम जमीनी बात करेंगे।... Read more

कांग्रेस प्रवक्ता का निधनः न्यूज चैनलों की डिबेट पर उठे सवाल

त्वरित टिप्पणी- डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर  बुधवार को आजतक चैनल की लाइव डिबेट के दौरान कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव त्यागी को हार्ट अटैक आया औऱ उनका निधन हो गया। जानकारी के अनुसार शाम को वो रोहित सरदाना के शो में घर से ही लाइव थे। ऐसा बताया जा रहा है कि बहस के दौरान ही वो थोड़ा असहज दिख रहे थे औऱ इसी दौरान उनकी ह्दयगति रुक गई। स्थिति देख परिवार वालों ने कुछ प्राथमिक उपचार दिया और गाजियाबाद के यशोदा हस्पिटल ले गए। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे के बाद सोशल मीडिया में पत्रकारिता से जुड़े बुद्धजीवियों के बीच एक विमर्श, टीवी... Read more
रामंदिर

भारत औऱ रामः महाशोक की घड़ी में महाउत्सव कितना जायज ?

एडीटर अटैक डॉ.प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर  कोरोना की जद में आए 39 हजार से ज्यादा लोगों के शवों पर सिसकता भारत, चीन और नेपाल के अबतक के सबसे आक्रामक रुख के बीच खड़ा भारत, भयंकर बेरोजगारी, आर्थिक मंदी, अस्थिरताओं से घिरा भारत, कोरोना महामारी के शीर्ष आंकड़ों से सजा भारत क्या वाकई इस योग्य है कि वो एक महा उत्सव का आयोजन करे ? क्या दुनियी हंसेगी नहीं हमपर ? किसी भी सामान्य व्यक्ति से आप कहें कि आप ऊपर इंगित विकराल समस्याओं औऱ चुनौतियों से घिरे हुए हैं। तब आप एक महा उत्सव का उल्लास मना रहे हैं। जयघोष कर रहे हैं। शहरों को सजा रहे हैं। तोरणद्वार... Read more
राजेश खन्ना

फिल्मी किस्सेः काका का एरोगेंस!

काका (राजेश खन्ना) मूडी किस्म के आदमी थे। और जब सफ़लता के रथ पर सवार होकर मूडी आदमी रफ्तार पकड़ता है तो फिर उसके कहने ही क्या। वो आदमी को आदमी क्या समझेगा। यही काका को ले डूबा, चाहे फिर उनका प्रेम हो या फिल्मी करियर।   राजेश खन्ना अपनी पहली फ़िल्म की शूटिंग में ही 4 घण्टे लेट पहुंचे। प्रोड्यूसर और कई वरिष्ठ लोग बड़े नाराज औऱ हैरान थे कि एक नए कलाकार का ये रवैय्या है। राजेश पहुंचे तो प्रोड्यूसर ने सख़्त लहजे में कहा इस समय आ रहे हैं आप? तो राजेश बोले थे कि देखो साब फ़िल्म विलम अपनी जगह है, अपनी लाइफ तो ऐसे ही... Read more
किशोरचंद्र वांगखेम

पत्रकार का संस्मरणः मुझे जेल भेजकर मेरी आवाज़ मज़बूत की

मणिपुर में मुख्यमंत्री बीरेन सिंह पर विवादित टिप्पणी करने के बाद जेल भेजे गए पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम 133 दिन जेल में रहने के बाद बुधवार को रिहा हो गए. मणिपुर हाई कोर्ट ने उन पर लगाए गए एनएसए और दर्ज किए गए मुक़दमे को ख़ारिज कर दिया है. किशोरचंद्र पर मणिपुर सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगा दिया था. बुधवार को वो इंफाल की साजीवा जेल से बाहर आए. अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में उन्होंने बीरेन सिंह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों की कठपुतली कहा था. बीबीसी से बात करते हुए किशोरचंद्र ने कहा, "जेल जाकर मैं और मज़बूत हो गया हूं और आगे भी लोगों की आवाज़ उठाता रहूंगा."... Read more
media mirror

THE DEATH OF INVESTIGATIVE JOURNALISM

How Indian newsrooms became morgues for investigative journalism JOSY JOSEPH FOR CARAVAN The word “byline” first appeared about a century ago in Ernest Hemingway’s novel The Sun Also Rises. Over time, for idealists among us, the byline came to represent the power of journalism—the courage it provided an ordinary reporter to challenge the high and mighty. As a young journalist, this was the sort of byline I aspired for, whose sanctity, I believed, was to be doggedly protected by editors. Over my career, I have watched the byline die a slow and violent death. It has been killed not only by power-hungry politicians and corporate barons, but also by media owners and... Read more
द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट

द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट भाग-7

प्रशांत राजावत-सम्पादक मीडिया मिरर दिल्ली में मौसमी सर्दी तो बरकरार है पर सियासी पारा बढ़ गया है। खैर अपन से क्या मतलब। अपन अंतिम हिस्से में ये बता चुके थे कि कैसे मेरी दूसरी नौकरी लगी और छूटी। उसके बाद अपन थोड़ा प्रेम व्रेम की बातें कर गए थे, भाग-6 में। तो अपन इस बार चर्चा करेंगे दूसरी नौकरी छूटने के बाद के समय की और उसके बाद कैसे मिली तीसरी नौकरी... ग्वालियर में सब भुगतकर नौकरी वौकरी छोड़कर घर पहुंच गए। सर्दी के दिन थे। हमारा कस्बा पहाड़ी कस्बा था। चारो ओर से पहाड़ों से घिरा, एक छोटा सा हिल स्टेशन। स्वच्छ औऱ सुंदर वातावरण। पहाड़ी इलाके की वजह... Read more
मीडिया मिरर

द डायरी ऑफ अ यंग जर्नलिस्ट भाग-6

प्रशांत राजावत-सम्पादक मीडिया मिरर सर्दी बहुत है दिल्ली में। मैं तो फिलहाल नौकरी से टर्मिनेट चल रहा हूं इसलिए घर पर ही हूं। हां भाई एक अखबार में नौकर हूं। अपन नौकरी ठीक वैसे नहीं करते जैसे सब करते हैं। 3 महीने की छुट्टी पर था वापसी की तो सम्पादक ने फिलहाल वापसी नहीं कराई। इस्तीफा नहीं लिया है और न मैंने दिया है। आशा है जल्द वापसी होगी। खैर ये सब चलता रहता है। इसी बहाने घर पर हूं और फिल्में देख रहा हूं ढेर सारी। और हां 3 महीने की छुट्टी हनीमून के लिए मीडिया रिसर्च के लिए  थी। खैंर अपन चलते हैं 2009 में, क्या रखा 2019... Read more