किताब चर्चा

गौतम राजऋषि

आप बेपनाह मोहब्बत में और डूबना चाहें तो “गौतम राजऋषि” को पढ़ें

रंग भर जाते हैं ख़ुशी के जिन्दगी में तमाम,जब भी लहराये वो तिरंगा, नींद तकिये से करती है इश्क-ए- सुकूँ ,जब घेर के हमें "वर्दियाँ हरी" खड़ी हों । कहते हैं कि अगर आपको किसी से बेपनाह मोहब्बत हो तो "अमीर खुसरो"साहब को पढ़ें...मगर मेरा कहना है कि आप बेपनाह मोहब्बत में और डूबना चाहें तो "गौतम राजऋषि जी" को पढ़ें ,यकीनन आप प्रेम में गोते लगायेंगे और प्रेम एक नहीं कई परिपाटी का होगा.... उन्मुक्त प्रेम, कमसिन प्रेम,गलियों,चौराहों,छतों,बालकनी,मोबाइल,छज़्जों ,स्कूटी का,रसोई से बैठक तक,घर से दफ़्तर तक, और यही सितम क्या कम है कि हिज़्र की यादें भी डुबकियाँ मारती हैं ,,, सच्चा एक देशप्रेम जो हम सब के दिल... Read more
नदिया के पार फिल्म की पात्र गुंजा।

इन दस दिनों में गुंजा के दसों कर्म हो गए..

केशव प्रसाद मिश्र के उपन्यास कोहबर की शर्त के हिस्से क्रमशः आपको हम पढ़वा रहे हैं..आज दो खंड.. ये क्रम जारी है। कोहबर की शर्त उपन्यास पर प्रसिद्ध हिंदी फिल्म नदिया के पार का निर्माण हुआ था।    चन्दन का पैर ठीक होने में लगभग दस दिन लग गए। किन्तु इन दस दिनों में गुंजा के दसों कर्म हो गए। वह छटपटाकर रह गई। कब चन्दन घर आये कि वह देखे ! ओंकार के हाथ खाना भेजती तो तड़पकर रह जाती। रामू कुछ-कुछ बोलने लगा था, चन्दन उससे बाते करता - खाने के बारे में, दूध के बारे में, सोने के बारे में। रामू एक-एक बात गुंजा से कहता, जब... Read more
नदिया के पार फिल्म का एक दृश्य

मिश्र जी के उपन्यास में गुंजा की शादी ओंकार से ही होती है…

[caption id="attachment_3354" align="alignleft" width="202"] उपन्यास[/caption] छिबरामऊ के विशाल समर्पित की कलम सेः प्रसिद्ध फिल्म नदिया के पार उपन्यास कोहबर की शर्त पर बनी है। पर जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है उपन्यास उससे थोड़ा अलग है। पढ़िए      भारतीय सिनेमा के हिंदी दीर्घा की सुप्रसिद्ध फिल्म 'नदिया के पार' केशव प्रसाद मिश्र के प्रसिद्ध उपन्यास "कोहबर की शर्त" पर फिल्माई गई है। २ घंटे २४ मिनट की यह अत्यंत प्रसिद्ध फिल्म १ जनवरी १९८२ को रिलीज हुई थी। और तब से लेकर आज तक यह फिल्म और इसके चरित्र {चन्दन,गुंजा,ओंकार,रूपा,वैधजी व् काका} हिंदी की सदाबहार फिल्मों की दीर्घा में अपना स्थान निरंतर अग्रिम पंक्ति में बनाये हुए है।... Read more
परफेक्ट फ्रेम

पत्रकारिता के विद्यार्थी के पास ये किताब ज़रूर होनी चाहिए

[caption id="attachment_3149" align="alignleft" width="300"] होमई व्यारावाला [/caption] टीवी पत्रकार रवीश कुमार समय-समय पर अच्छी किताबों की वकालत करते हैं। इस बार महिला फोटोग्राफरों की दुनिया पर आधारित किताब परफेक्ट फ्रेम के बारे में बता रहे हैं और कह रहे हैं ये किताब पत्रकारिता के छात्र अनिवार्य रूप से पढ़ें।    होमई व्यारावाला की बेटियां बड़ी हो गईं हैं पिछले साल किसी वक्त मुंबई से मेरे दोस्त ने एक किताब भेजी। आज उसका जन्मदिन भी है। मुझे तो यही जानकर हैरानी हुई थी कि वो कैसे आधुनिक कला संग्नरहालय पहुंच गया। उसे लगा कि ये किताब मेरे लिए बहुत ज़रूरी है, मैं तो इसी बात से भाव-विभोर हो गया। सोचता रह गया... Read more
चित्रा शर्मा

चित्रा शर्मा की पुस्तक ‘गुरु मुख से’ का लोकार्पण 

हर असम्भव में संभव तलाशना ही एक शिष्य का कर्तव्यः शेखर सेन नई दिल्लीः "जो असम्भव लगता हो, उसे संभव करने के तरीके तलाशना ही एक अच्छे शिष्य की विशेषता है, जिस तरह तीर को दूर तक फैंकने के लिए धनुष की प्रत्यंचा को उतना ही पीछे खिंचा होता है, उसी तरह नृत्य कला में अपने गुरु, उनके गुरु और उनके गुरु के कार्यों को जानना कलाकार को आगे ले जाता है, जितना अतीत का अन्वेषण कर्नेगे उतना ही आगे जाएंगे .”’ यह उदगार थे कत्थक केंद्र के अध्यक्ष, प्रख्यात रंगकर्मी श्री शेखर सेन के, वे दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित कत्थक केंद्र में सम्पन्न , डॉ चित्रा शर्मा की पुस्तक... Read more
‘एग्जाम वॉरियर्स’

प्रधानमंत्री मोदी की किताब ‘एग्जाम वॉरियर्स’ कटघरे में

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री द्वारा लिखित किताब को लिया आड़े हाथों, कहा- सीबीएसई क्वेश्चन पेपर लीक होने से स्टूडेंट अपना जीवन तबाह होने के बाद कैसे तनाव मुक्त रहे, इसपर किताब लिखें पीएम (फरवरी में ही आई थी प्रधानमंत्री की किताब एक्जाम वारियर्स)   एजेंसी, नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा और कहा कि क्या मोदी अब सीबीएसई क्वेश्चन पेपर्स के लीक होने से स्टूडेंट अपना जीवन तबाह होने के बाद कैसे तनाव मुक्त रहे, इसपर किताब लिख रहे हैं? राहुल ने कहा, 'पीएम मोदी ने स्टूडेंट्स को परीक्षा के दौरान तनाव से राहत देने के लिए 'एग्जाम वॉरियर्स'... Read more
किताब विमोचन समारोह के दौरान मंचासीन अतिथि

‘चंबल की बंदूकें गांधी के चरणों में’ किताब पुनः प्रकाशित

  [caption id="attachment_2973" align="alignleft" width="225"] किताब का मुखपृष्ठ, हालांकि ऐसी जानकारी मिली है कि ये किताब निशुल्क मिलने की व्यवस्था है, न तो किताब में कोई कीमत अंकित है औऱ न ही इसे बेचा जाएगा।[/caption] ऐसा समाज बने जिसमें डाकू पैदा ही न हों..   ० दस्यु समर्पण के सहयात्री रहे  व्यक्तित्वों ने अनुभव साझा किए भोपालः समाज में डाकू पैदा नहीं होते, सामाजिक परिस्थतियां डाकू या बागी बनने को विवश करती हैं। शोषण, अत्याचार और प्रतिशोध की भावना इसके मूल में रहती आईं हैं। सातवें दशक में बागियों के शस्त्र समर्पण का दौर चला। लेकिन इससे यह समस्या समाप्त नहीं हुईं। आज भी समाज में यह प्रवृत्ति जिंदा है।... Read more
एक था मोहन किताब का मुखपृष्ठ

बिहार के ढाई करोड़ स्कूली बच्चे पढ़ेंगे बापू की ये नई किताबें

एक था मोहन और कॉमिक्स रूप में बापू की चिट्ठी नाम से दो किताबें बनकर तैयार दोनों पुस्तकों को कॉपीराइट से मुक्त रखा गया है मीडिया मिरर न्यूज, दिल्लीः [caption id="attachment_2969" align="alignleft" width="227"] बापू पर दूसरी किताब का मुखपृष्ठ[/caption] बिहार के स्कूली बच्चों के लिए महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित दो किताबें तैयार करवाई गई हैं। किताबों की परिकल्पना बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की थी। एक था मोहन और कॉमिक्स रूप में एवं बापू की चिट्ठी नाम से दूसरी किताब बनकर तैयार हैं। किताबों में आलेख प्रभाष जोशी के  पुत्र लेखक सोपान जोशी ने लिखे हैं। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन ने भी सहयोग किया है। किताबों का प्रकाशक... Read more
आदिवासी नहीं नाचेंगे

हिंदी समाज को अंग्रेजी के सामने खुद को नंगा करने में मजा आता है. 

कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के पूर्व अधिष्ठाता व प्रसिद्ध साहित्कार लक्ष्मन सिंह विष्ट की कलम सेः-   किताब पर प्रतिबन्ध कोई समाधान नहीं है, ऐसे लेखकों का सार्वजनिक बहिष्कार होना चाहिए. राजकपूर की बेहद घटिया फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के एक दृश्य को लेकर जब पत्रकार-विचारक मृणाल पांडे ने उन पर मुकदमा ठोका था तो सिर्फ इसलिए नहीं कि फिल्म में एक युवती के स्तनों को सरे आम प्रदर्शित किया गया था. मृणाल जी की आपत्ति लोगों के मन में बसी उस रूढ़ छवि को लेकर थी जिसमें पहाड़ी लड़की को सिर्फ एक सेक्स प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है, सीधी-सादी, दूसरों पर सहज ही भरोसा करने वाली... Read more
उस्मान खान के कहानी संग्रह का मुखपृष्ठ

युवा लेखक उस्मान खान के नए कहानी संग्रह से एक कहानी

युवा लेखक उस्मान खान का नया कहानी संग्रह जल्द ही बाजार में आने वाला है। नाम है तुमसे किसने पूछा। उस्मान मलेशिया रहते हैं। मूलरूप से भारतीय हैं। इससे पहले उनका उपन्यास एचटूएसओफोर भी काफी लोकप्रिय रहा था।  पढ़िए उनके नए कहानी संग्रह से एक अंशः   ज़िन्दगी में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं, जब हम इतने हताश और निराश हो जाते हैं कि लगने लगता है मानो सब कुछ टूटकर बिखर गया है। लेकिन जो टूटकर बिखर जाने के बाद फिर से खड़े होते हैं और मंजिल की तऱफ बढ़ते हैं, वही लोग ज़िन्दगी को सही मायनों में जीते हैं। ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर जब आप खुद... Read more