किताब चर्चा

ओबामा की अधिकृत जीवन कथा: गर्लफ्रेंड के लिए खुद डिनर तैयार करते थे ओबामा

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की अधिकृत जीवन कथा राइजिंग स्टारः मेकिंग ऑफ बराक ओबामा में खुलासा, किताब हाल ही में आई है। लेखक हैं डेविड गेर्रो, पुलित्जर पुरस्कार विजेता। यह जीवन कथा ओबामा के बारे में लिखी गई सबसे प्रमाणिक और सबसे बड़ी (1078 पेज) किताब है। बराक ओबामा के फैन हैं तो ये किताब जरूर पढ़िए। उनकी निजी जिंदगी को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।   किताब के अनुसार ओबामा की सबसे पहली गर्लफ्रेंड एलेक्स मैक्कनियर जो लॉस एंजल्स के अक्सीडेंटल कॉलेज में पढ़ा करती थी। वह एक बहुत खूबसूरत श्वेत लड़की थी। जिसके पीछे कॉलेज के ढेर सारे लड़के घूमते थे।   किताब के अंशः पूर्व... Read more
उपन्यास ‘फसक’

‘फसक’ उपन्यास का एक अंश: धुंध में घुला सुबह का गीत

[caption id="attachment_1556" align="alignleft" width="148"] राकेश तिवारी वरिष्ठ पत्रकार और कथाकार[/caption] राकेश तिवारी वरिष्ठ पत्रकार और कथाकार हैं। दो कहानी संग्रह ‘उसने भी देखा ’ और ‘मुकुटधारी चूहा ’, एक उपन्यास ‘फसक ’, एक बाल उपन्यास ‘तोता उड़ ’ और पत्रकारिता पर एक पुस्तक ‘पत्रकारिता की खुरदरी ज़मीन ’ प्रकाशित है। तीसरा कहानी संग्रह और साक्षात्कारों का एक संग्रह जल्दी ही प्रकाशित होने जा रहे हैं। उनकी कुछ कहानियों का दूसरी भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ है, एक कहानी पर फिल्म भी बनी है। हाल ही में आये उनके उपन्यास ‘फसक’ की काफ़ी चर्चा है और उसे रोचक व पठनीय माना जा रहा है। वरिष्ठ आलोचक संजीव कुमार का कहना है कि... Read more
नन्दन की सम्पादक जयंती रंगनाथन की किताब बॉम्बे मेरी जान

हीरा अंतत: उससे सहानुभति रखने वाली पत्रकार के प्रेम में पड़ जाता है

हिंदुस्तान समूह की बाल पत्रिका नन्दन की सम्पादक जयंती रंगनाथन की किताब बॉम्बे मेरी जान की चर्चा वरिष्ठ पत्रकार लेखक गीता श्री के शब्दों में ज़िंदगी की सच्ची कथाएं ज़्यादा रोमांचक होती हैं. चौंका देने वाली. कहानी की कल्पनाओं से ज़्यादा काल्पनिक और ज़िंदगी के यथार्थ से ज़्यादा यथार्थ...अवास्तविक से लगने वाले किरदार अक्सर ज़िंदगी में मिल जाते हैं जो उम्र भर स्मृतियों में साथ चलते हैं. कोई शहर अपनी सांस्कृतिक रंगों और ख़ास तरह के गंधों के साथ हमारी चेतना में दर्ज हो जाता है और हम उम्र भर उससे पीछा नहीं छुड़ा पाते. उस विलुप्त गंध की खोज निरंतर भीतर चलती रहती है...उस सांस्कृतिक चेतना को ख़ुद से... Read more
गगास के तट

उत्तराखंड की समाजार्थिकी पर केन्द्रित हिंदी का पहला उपन्यास

कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डीन रहे और लेखक साहित्यकार लक्ष्मण सिंह बिष्ट चर्चा कर रहे एक पुराने उपन्यास की। उत्तराखंड की समाजार्थिकी पर केन्द्रित हिंदी का पहला उपन्यास : गगास के तट पर : जगदीश चन्द्र पांडे (1968) "होरी गोदान की इच्छा लिए ही प्राण छोड़ देता है, धनुवा हताशा की अंधी रात में अपने आम के पेड़ पर कुल्हाड़ी चला बैठता है." - अज्ञेय "इस कृति से स्पष्ट है कि संघर्ष के दौरान बेजान इन्सान में भी जान आ जाती है और धनुवा जैसा मरियल किसान भी एक जिन्दा इन्सान की तरह तनकर खड़ा हो जाता है." -नामवर सिंह "गगास के तट पर' पर्वतीय अंचल के अमुक गाँव की ही... Read more
उपन्यास

उषाकिरण खान ने इस उपन्यास का कलेवर बड़ा रखा है

किताब चर्चा: भामती लेखक: उषा किरण खान -----//--- ”भामती” की कथा को पहले-पहल मैंने स्वयं लेखिका Ushakiran Khan के मुख से इसी साल फरवरी में ‘परिवर्तन शिविर’ से लौटते हुए सुना था। गाड़ी में हमारे साथ Mamta Kalia दीदी भी थीं। इतिहास और आर्कियोलॉजी की विदुषी Ushakiran Khan के साथ करीब 4-5 घंटे बिताना मेरे लिए सौभाग्य का विषय रहा। उस छोटी सी यात्रा ने मुझे मिथिला, मिथिला की संस्कृति आदि के बारे में बहुत कुछ बता दिया। ‘भामती’ इतिहास की ऐसी पात्र है, जो जाने आज की नारीवादी विचारकों को भाएगी भी या नहीं, पर उसकी जीवनगाथा प्रेम करती एक स्त्री के सच्चे कर्तव्यबोध और पुरुष की सच्ची कृतज्ञता... Read more
किताब का नाम: ज़िन्दगी की गुल्लक

ज़िन्दगी की गुल्लक

किताब कथा - किताब समीक्षा किताब का नाम: ज़िन्दगी की गुल्लक लेखिका: मनीषा श्री ( मलेशिया में रहती हैं। आईआईटी रूड़की से पढ़ी हैं। भू गर्भ वैज्ञानिक हैं।) प्रकाशक: अयन प्रकाशन दिल्ली मुद्रक: विशाल कौशिक प्रिंटर्स दिल्ली किताब का मूल्य: 240 रुपये कुल पेज 111 किताब को रेटिंग: *****/ *** समीक्षा: 111 पेज की किताब जिंदगी की गुल्लक 21 अध्यायों में लिखी गई है। हर अध्याय लेखिका की शुरुआती घटनाक्रम को आगे बढ़ाता प्रतीत होगा। किताब की टैगलाइन लेखक ने दी है किस्से कविताओं के। पर यहाँ थोड़ा विरोधाभास होगा आप ये भी कह सकते हैं कवितायेँ किस्सों की। क्योंकि लेखिका ने पहले किस्से बताये और फिर उन्ही किस्सों को... Read more
किताब : मुझे कुछ कहना हैं',

सत्तर साल की जि़न्दगी में ख्वाजा अहमद अब्बास ने 70 ही किताबें भी लिखीं

किताब : मुझे कुछ कहना हैं', चुनिंदा कहानियाँ - ख्वाजा अहमद अब्बास चयन: जोया जैदी प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन ----///--- बहुत कम लोग जानते हैं कि फ़िल्मकार-कहानीकार ख्वाजा अहमद अब्बास की कलम की दुनिया कितनी बड़ी थी। सत्तर साल की अपनी जि़न्दगी में उन्होंने 70 ही किताबें भी लिखीं और असंख्य अखबारों और रिसालों में आलेख भी। हर बुधवार को 'ब्लिट्ज' में उनका स्तम्भ, अंग्रेजी में 'द लास्ट पेज' और उर्दू में 'आज़ाद कलम' शीर्षक से छपता था। और आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे उन्होंने चालीस साल लगातार लिखा, जिसमें दोनों ज़बानों के विषय भी अक्सर अलग होते थे। कहते हैं कि ये दुनिया में अपने ढंग का एक रिकॉर्ड... Read more
यतीन्द्र मिश्र

स्तुति में विद्रोह की सूरत ही नहीं कोई: लता सुरगाथा पर हुई बातचीत का विश्लेषण

स्तुति में विद्रोह की सूरत ही नहीं कोई (और यतींद्र ये ईमानदारी से कर पाए) : राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किताब लता सुरगाथा के लेखक यतीन्द्र मिश्र और वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडे की लता सुरगाथा पर हुई बातचीत का विश्लेषण। चर्चा इन्दिरागांधी कला केंद्र दिल्ली में थी। : शुरूआत यानी शुरूआत से। लता यानी सुर सम्राज्ञी। सुर यानी गले या बाजे से निकलने वाला स्वर । गाथा यानि कथा, वृतांत, गीत, श्लोक, हाल आदि। ऋग्वेद की संहिता में ये शब्द गीत या मंत्र के अर्थ के रूप में उपयोग किया गया है। गाथा को स्तुति भी कहा जा सकता है। लता सुरगाथा का सीधा सा मतलब लता मंगेशकर के गले... Read more
किताब: सीमांत कथा

सीमांत कथा

किताब चर्चा किताब: सीमांत कथा लेखक: पद्म श्री उषा किरण खान शब्द: प्रज्ञा रोहिणी -----///--- सीमांत कथा कला और जनांदोलनों की भूमि पर आधारित है कथाकार उषाकिरण खान का उपन्यास 'सीमांत कथा'। यह बिहार के उत्तरी पश्चिमी छोर पर उत्तरप्रदेश के सीमावर्ती जिले सिवान की कहानी है। सिवान से भविष्य बनाने पटना और पटना से दिल्ली आने वाले दो प्रबुद्ध नौजवानों-वाणीधर और विधुमाल की कहानी। एक और हैं बिहार की सामंती जड़ताओं, राजनीतिक कुचक्रों और अपराधीकरण की काली धरती तो दूसरी ओर भूख, अशिक्षा और शोषण से त्रस्त किसान और इनके साथ खड़ी सशस्त्र क्रांति की समर्थक विचारधारा का रक्ताभ आकाश। इन नौजवानों में एक गहरी राजनीतिक-सामाजिक चेतना है, समाज... Read more
किताब: लातिन अमेरिका के रिसते जख्म

लातिन अमेरिका के रिसते जख्म

किताब चर्चा किताब: लातिन अमेरिका के रिसते जख्म लेखक: एदुआर्दो अनुवाद: दिनेश पोसवाल -----//--- एदुआर्दो गालियानों की किताब ओपेन वेन्स ऑफ लैटिन अमेरिका का हिन्दी अनुवाद लातिन अमरीका के रिसते जख्म पढ़ रहा हूं। सच कहता हूं, इस किताब के बाद दुनिया को देखने का नजरिया वैसा नहीं रह जाएगा। ऐसा लगता है कि जैसे हमारे देश से भी ज्यादा अभागी धरती है लातिन अमेरिका की। यूरोपीय लोग जब अमेरिकी महाद्वीप पहुंचे, उस समय वहां पर सभ्यताएं बसी हुई थीं। उस समय लगभग सात करोड़ मूल निवासी वहां रहते थे। लेकिन, यूरोपीयों के अत्याचार के बाद लगभग डेढ़ सौ सालों में उनकी संख्या घटकर 35 लाख रह गई। यूरोपीय वहां... Read more