किताब चर्चा

प्रकाशन वर्ष १९०४ ई.

विचारोत्तेजक, दिमाग़ की धुंध पोंछने वाली, सोच के जाले झाड़ने वाली गज़ब किताब

किताब चर्चा अजय सोडाणी की कलम से ***** सखाराम गणेश देउस्कर की "देश की बात" ("দেশের কথা") प्रकाशन वर्ष १९०४ ई. ***** गज़ब किताब है यह | विचारोत्तेजक, दिमाग़ की धुंध पोंछने वाली, सोच के जाले झाड़ने वाली | सौ बरस से ऊपर हो गए जब एक मराठी माणूस ने बंगला में किताब लिखी, और इसकी २५००० से अधिक प्रतियाँ बिक गयीं मात्र पांच वर्षों में | हिंदी में अनुवाद हुआ चार वर्ष बाद | जो लिखा तथ्यपरक, जो कहा दस्तावेज़ी प्रमाण सहित, और उस काल के भारत का इतिहास हमारे लिए छोड़ रुख़सती ले ली ४३ बरस की अल्पायु में | एक बहुत महीन बात इस किताब से गुजरते... Read more
"कैमरा वर्क"

फ़ोटोग्राफ़ी से प्यार करने वाले हर शख़्स के पास यह किताब होनी ही चाहिए

"कैमरा वर्क" _____________________________________________ अल्फ्रेड श्टाइगलिट्ज़ : फ़ोटोग्राफ़ी में दिलचस्पी रखने वाले हर शख़्स को यह नाम हमेशा याद रखना चाहिए। बीसवीं सदी शुरू ही हुई थी। फ़ोटोग्राफ़ी अब भी एक नई शै, नया शगल और नया शिगूफ़ा था। छायांकन एक कलारूप भी हो सकता है, इसका तो किसी को ख़याल भी नहीं था। चित्रकला की तुलना में छायांकन को दोयम दर्जे का समझा जाता था और फ़ोटोग्राफ़्स की सिफ़त का फ़ैसला भी तब चित्रकार लोग ही किया करते थे, फिर चाहे उन्हें उसकी तकनीकी समझ भले ना हो। सिनेमा को भी इसी तरह अपने आरंभिक दौर में थिएटर से सीधे मुक़ाबला करना पड़ा था। सिनेमा और थिएटर की "ग्रामर" अलग-अलग... Read more
"सेपियंस"

“सेपियंस” दुनिया में सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली, सबसे ज़्यादा बिकने वाली किताबों में से एक

किताब चर्चा सुशोभित सक्तावत वेबदुनिया इंदौर ______________________"सेपियंस"______________________ [ मैं यह किताब लेने तो नहीं गया था, लेकिन जब मेरी नज़र इस पर पड़ी तो मैं इसको छोड़कर नहीं आ सका ] ## "चीनो-अरब" का इतिहास लिखा जाता है, "हिंदोस्तां" का इतिहास लिखा जाता है, यह "मनुष्यता" का इतिहास है : एक विकास-यात्रा के रूप में मनुष्यता के विचार का इतिहास। एक बहुत बड़े कैनवास पर इस किताब की परियोजना रची गई है। लेकिन इसका सबसे रोमांचक पहलू वह है, जिसने इसे पिछले दो साल में आई सबसे महत्वपूर्ण किताबों में से एक और "इंटरनेशनल बेस्टसेलर" बना दिया : मनुष्यता के विकासक्रम के आरंभिक दौर की एक चौंका देने वाली पड़ताल।... Read more
आत्मकथा

खुशवन्त सिंह की आत्मकथा ‘सच प्यार और थोड़ी शरारत का’ यह अंश

 आत्मकथा 'सच प्यार और थोड़ी शरारत का' यह अंश -  श्रीमती गांधी 28 मार्च 1982 की सुबह लन्दन से लौटीं। वे इस बार निशाना लगाने का निर्णय करके आई थीं। जब मेनका उन्हें नमस्कार करने आई, तो उन्होंने सख्ती से यह कहकर उसे दफा किया, ‘मैं तुमसे बाद में बात करूँगी।’ उससे कहला दिया गया कि वह परिवार के साथ दोपहर के खाने के लिए न आए और उसका खाना कमरे में भेज दिया जाएगा। लगभग एक बजे उसे एक सन्देश और भेजा गया कि प्रधानमंत्री उससे मिलना चाहती हैं। मेनका इस स्थिति के लिए तैयार थी। वह बैठक में थी जब श्रीमती गांधी नंगे पैर वहाँ आईं। उन्होंने धवन... Read more
मुख़्तार माई

इज्जत के नाम पर

किताब चर्चा: इज्जत के नाम पर लेखक: मुख़्तार माई अनुवादक: नीलाभ अश्क कबीर संजय बता रहे किताब के बारे में:- इज्जत के नाम पर। यह किताब आज ही खतम की है। पूरे समाज ने औरतों के साथ कैसी साजिशें रच रखी हैं। कैसे उन्हें बचपन से ही सवाल नहीं करने और जो कुछ हो रहा है, उसे बस स्वीकार कर लेने की ट्रेनिंग दी जाती है। सब कुछ बस बरदाश्त कर लो। कई बार तो यह भी लगेगा कि जैसे यह कोई दो अलग-अलग नसलों का मामला हो। जहां पर एक नसल, दूसरी को अपनी मनमर्जी से इस्तेमाल करती है। जाहिर है, इस्तेमाल करने वाले के ही अधिकार होते हैं।... Read more
आत्मकथा

हाईकोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश लीला सेठ की आत्मकथा

किताब चर्चा वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी की कलम से -----///---/ देश के किसी हाईकोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश लीला सेठ नहीं रहीं..उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी थी, ऑन बैलेंस...जिसका घर और अदालत नाम से हिंदी अनुवाद प्रकाशित हुआ था। उसकी समीक्षा केे बहाने उनके व्यक्तित्व की पड़ताल करता एक आलेख मैंने लिखा था..श्रद्धांजलि स्वरूप वह आलेख फिर पेश है... http://mohallalive.com/…/umesh-chaturvedi-on-leila-seth-au…/ Read more