यादें

प्रिया कुसुम

पत्रकार बनने के लिए ‘वन मस्ट बी वैरी थिक स्किन्ड’

प्रिया कुसुम महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक में पत्रकारिता की छात्रा हैं। 4 दिसम्बर 2019 को दिल्ली आई थीं दूरदर्शन में पत्रकार बनने, जबकि वो पत्रकार बनना नहीं चाहतीं। उन्होंने यात्रा के बारे में कुछ लिखा है। पढ़िए। इससे दूरदर्शन की कार्यशैली भी समझ में आएगी।    धुंध भरी सुबह और बस का इंतज़ार करती मैं. करीब 7 बजे से मैं बस स्टैण्ड पर खड़ी थी. इतनी ठंड में शायद बस भी बाहर आने से कतरा रही थी. पर आखिरकार वो आ ही गई और मैं रोहतक की ओर चल दी. फिर रोहतक से मेरी फ्रेंड सोनिया भी मेरे साथ बैठ गई और हम दोनों चल दिए दिल्ली की ओर. दरअसल,... Read more
बाबा रामदेव

पतंजलि नर्सरी में वह बुजुर्ग बाबा रामदेव के पिता थे

नवभारत टाइम्स दिल्ली के पत्रकार राजेश मित्तल की कलम से-  हरिद्वार: हरिद्वार के पास पतंजलि हर्बल गार्डन। शाम के 6 बजे हैं। अंधेरा होने को है। गार्डन के औषधीय पौधों, झरने, गुफा, तालाब, बर्ड हाउस और ट्री हाउस का आनंद लेने के बाद हम वहाँ की नर्सरी में थे। यहां पौधे बेहद सस्ते हैं। ज़्यादातर पौधे 10-20 रुपये में मिल जाते हैं और जैविक खाद 10 रुपये में किलो। इसलिए हमने काफी पौधे और खाद के पैकिट खरीद लिए। नर्सरी में कुल दो आदमी थे। एक अधेड़ उम्र का दिव्यांग था और एक बुजुर्ग सज्जन। पौधे और खाद खरीदने के बाद समस्या खड़ी हुई कि इन्हें ले कैसे जाएं। बुज़ुर्ग... Read more

सम्पादक की पातीः मिरर की यात्रा 2018 में

वर्ष 2018 का आज अंतिम दिन है। ये विदाई की बेला है। परम्परा है हमारी की विदाई की बेला में हम सब भावुक हो जाते हैं। मैं भी हूं। आजकल थोड़ा फुरसत में जीवन जी रहा हूं, तो शाम को हरदिल जो प्यार करेगा फिल्म देखी और अब हर्बल चाय पीते हुए आपको पत्र लिख रहा हूं। सोच रहा था लिखूं या न लिखूं। पर फिर निर्णय लिया कि आपसे कुछ तो कहना बनता है। क्योंकि आप मिरर के पाठक हैं औऱ आपसे ही मिरर है। दोस्तों मिरर को मैंने एक फेसबुक समूह से शुरू किया था। जानने वाले जानते हैं जो मीडिया मिरर नाम के फेसबुक समूह से शुरू... Read more
ग्रामीण भारत

तुलनाः हमारे पुरखे और हम

प्रशांत राजावत- सम्पादक मीडिया मिरर  मेरे दादा जी बहुत बढ़िया घुड़सवार थे। सिंधिया की फ़ौज में स्वतंत्रता से पूर्व थे वो, उनको एक ऐसे ख़तरनाक घोड़े की सवारी करने को दी गयी जिसमे न बैठने की सीट थी और न लगाम। कुछ सजा के बदले था ये। पर वो उस घोड़े को काबू करके सात लम्बे लम्बे गढ्ढे फांद गए। दादा जी ढोलक और हारमोनियम बहुत अच्छी बजाते थे। जब मैं समझने लायक हुआ तब ढोलक में तो उनको नहीं सुना पर हारमोनियम हर सुबह वो बजाते और भजन गाते। गला बढ़िया था। दादी बताती थीं फरसा बहुत अच्छा चलाते थे। बन्दूक के चोटी के निशांची थे। एकबार शहडोल जिले... Read more
हेमंत शर्मा

आपकी खबरों में मेरी बहुत तरफदारी नहीं होनी चाहिए”, बोले थे अटल जी

हेमंत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार  अटल जी भारतीय राजनीति के ऋषि थे। उनकी लोकप्रियता कभी किसी सीमा की मोहताज नही रही। देश और विदेश की बात तो दूर रही, दुश्मन देश में भी उस लोकप्रियता का कोई मुकाबला नही था। मैने अटल जी को काफी करीब से जाना। उनका स्नेह भाजन रहा। उनसे हमेशा एक अनौपचारिक सा रिश्ता रहा जिसमें कुछ भी कहने या पूछने में कभी हिचक नही महसूस हुई। अटल जी ने भी इस रिश्ते को हमेशा निभाया। कभी कोई औपचारिकता नही आने दी। जो सवाल असहज करने वाले लगे, उनका जवाब चुटकियां लेकर या फिर मुस्कुराहट भरे मौन से दिया और जिन पर बोलना चाहा, कुछ भी शेष... Read more
अनुपम मिश्र

‘अनुपम जैसे व्यक्ति की पुण्याई पर हमारे जैसे लोग जी रहे हैं’

प्रसिद्ध पर्यावरणविद अनुपम मिश्र पर यह लेख वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी ने ‘अपने पर्यावरण का यह अनुपम आदमी’ शीर्षक से 1993 में लिखा था ये कागज मैं उन्हीं अनुपम मिश्र और उनके काम पर काले कर रहा हूं जिनका जिक्र आपने इस जगह पर कई बार देखा और पढ़ा होगा. खतरा है कि आप में से कई लोग मुझ पर पक्षपात करने यानी अपने ही लोगों में रेवड़ी बांटने जैसा अंधत्व होने का आरोप लगा सकते हैं. लेकिन इसलिए कि आप पर कोई आरोप लगा सकता है, आप वह करना और कहना छोड़ दें जो आप को करने और कहने को प्रेरित कर रहा है तो आपके होने-करने का मतलब... Read more
अतुल चौरसिया

उन उग्र हिंसक क्षणों में कुछ भी हो सकता थाः अतुल चौरसिया

अतुल चौरसिया   भीड़ में घिरने का भय क्या होता है? जब आपसे देशभक्ति काप्रमाण मांगा जाए तो कैसा लगता है? जब आपको देश छोड़करजाने के लिए कहा जाए तो कैसा महसूस होता है? जब आपके ऊपर राष्ट्रगानका अपमान करने का अनरगल आरोप थोपा जाए तो कैसा लगता है? पहले तो हंसी आती है, फिरझुंझलाहट होती है। यह झुंझलाहट धीरे-धीरे गुस्से में तब्‍दील हो जाती है। भीड़ केबीच अपने गुस्‍से की नपुंसकता का अचानक हुआ अहसास आपको भयाक्रान्‍त कर देता है।खुद को हिंसक भीड़ के बीच निस्‍सहाय पाकर आप डर जाते हैं। अपने तमाम समकालीन पत्रकारों, कलाकारों, फिल्मकारों के साथ इस तरह के हिंसक वाकये बीते 4-5 वर्षों के दौरान... Read more
सचिन पायलट

सचिन पायलट: बीबीसी इंटर्न जो राजनीति में नहीं आना चाहता था

सचिन पायलट बीबीसी में इंटर्नशिप के दौरान अपनी पहली कमाई का चेक देखकर बहुत खुश हुए और बोले कि ये चेक वे कभी भुनाएंगे नहीं. renu agal. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट, जो कि राजस्थान के अगले मुख्यमंत्री की रेस में हैं, को शायद  वो दिन याद न हो जब उन्होंने पत्रकार के रूप में पहली कमाई की थी. बात 1996 की है, जब बीबीसी के आइफैक्स स्थित दिल्ली ब्यूरो में  कांग्रेस के कद्दावर नेता राजेश पायलट ने अपने बेटे को इंटर्नशिप के लिए भेजा. राजेश पायलट तब केंद्रीय मंत्री थे. उस समय मैं बीबीसी की हिंदी सेवा में काम करती थी. राजेश पायलट का बेटा सचिन... Read more
सिंधिया

माधवराव सिंधिया के साथ पत्रकार एनके सिंह के जीवंत किस्से, भाग-1

[caption id="attachment_3900" align="alignleft" width="135"] वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह[/caption] मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारों में से एक एनके सिंह आजकल ग्वालियर स्टेट के महाराजा व कांग्रेस के दिग्गज नेता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के साथ अपने जीवंत किस्सों को कई किस्तों में एक निजी समाचार पत्र के लिए लिख रहे हैं। पत्रकारों के किस्से बड़े लाजवाब होते हैं। जिनसे नए नवेले पत्रकारों को काफी कुछ सीखने को मिलता है। एनके सिंह के किस्से न सिर्फ आपको करिश्माई व्यक्तित्व के धनी माधवराव सिंधिया के बारे में रोचक जानकारी देंगे बल्कि पत्रकारिता को भी समझने में मददगार साबित होंगे। एनके सिंह हिंदुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, दैनिक भास्कर आदि में सम्पादक रह चुके हैं।  उन्होंने कई... Read more
अनिक्शु

मुस्कुराओगे तुम , जिएगी जिंदगीः अनिक्शु भारद्वाज

दैनिक भास्कर रोहतक की संवाददाता अनिक्शु भारद्वाज का 20 अगस्त को ब्रेन ट्यूमर के चलते निधन हो गया था। मिरर ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सम्मान में 7 दिनों तक अपनी सेवाओं को रोक दिया था। आज सातवें दिन मिरर याद कर रहा है अनिक्शु को। अनिक्शु जीवन के अंतिम चरण में जिंदगी को अपने शब्दों में परिभाषित करती थीं। वही कुछ नोट्स उनके साथ ही उनकी कुछ कविताएं।    [caption id="attachment_3707" align="alignleft" width="300"] अनिक्शु[/caption] Writing Note to Lyf - Night outs रातों वाली सड़क शांत बेशक हो। लेकिन अपने साथ जिंदगी लिए घूमती है। जिंदगी तो हम सबकी ही अलग है लेकिन इसे जीने के जज्बे वाली... Read more