यादें

गौतम सिद्धार्थ

मैंने देखा गौतम सिद्धार्थ की आंखें भी गीली हो गई थीं

टॉइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार गौतम सिद्धार्थ का हाल ही में ह्दयघात से निधन हो गया। वो दिल्ली रहते थे। गौतम सिद्धार्थ बहुत काबिल, खुशदिल होने के साथ साथ भावुक इंसान थे। दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी याद कर रहे गौतम सिद्धार्थ के साथ बिताए दिनों को।   साल 2000 की गर्मियां..दैनिक भास्कर के दिल्ली ब्यूरो का दफ्तर गोल मार्केट के क्लासिक हाउस में था..एक सुबह दफ्तर पहुंचा, शायद गुरूवार का दिन था..गुरूवार इसलिए कि उसी दिन रविवार को छपने वाले साप्ताहिक स्तंभ 'सप्ताह का साक्षात्कार' लिखकर भोपाल दफ्तर भेजना होता था। और उस बार मुझे साक्षात्कार लिख कर देना था। मैं दफ्तर पहुंचा तो तत्कालीन ब्यूरो संपादक स्वर्गीय... Read more
संत संपादक- मामा माणिक चंद वाजपेयी

संत संपादक- मामा माणिक चंद वाजपेयी

! स्मरण ! * राजमाता से चुनाव में हारने के बाद बने पत्रकार * अटलजी ने प्रधानमंत्री आवास में लिया था आशीष [caption id="attachment_2595" align="alignleft" width="108"] डॉ राकेश पाठक[/caption] ०   मध्यप्रदेश ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकार  डॉ राकेश पाठक, पत्रकार व सम्पादक मामा माणिक चंद वाजपेयी को उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहे हैं।        -----  27 दिसंबर को मूर्धन्य पत्रकार,संपादक मामा माणिक चंद वाजपेयी की पुण्यतिथि थी । वे विशुद्घ संत संपादक थे।एकदम खांटी देहाती पहनावा और वैसे ही सहज सरल।नई पीढ़ी के पत्रकार शायद उन्हें ठीक से जानते भी न हों इसलिए आइये आज उनके बारे में बात करते हैं। मामाजी बटेश्वर (आगरा) के रहने वाले थे।... Read more
चर्च।

अपने भीतर के बच्चे को बचाए रखने के लिए चर्च के सामने से गुजरता हूं

[caption id="attachment_2494" align="alignleft" width="195"] पत्रिका छत्तीसगढ़ के ब्यूरो प्रमुख राजकुमार सोनी[/caption] राजस्थान पत्रिका छत्तीसगढ़ के स्टेट ब्यूरो हेड राजकुमार सोनी क्रिसमस के अवसर पर साझा कर रहे हैं एक खूबसूरत संस्मरण। जो चर्च से उनकी दिलचस्पी को लेकर है।         चर्च मुझे पसंद हैंः- यह तब लिखा था जब बंसत तिमोथी जिंदा थे। बंसत तिमोथी कौन है क्या है इसका जिक्र आगे करूंगा। फिलहाल यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि मुझे चर्च पंसद है। बहुत ज्यादा पंसद है। देवदार और पलाश के बड़े-बड़े पेड़ों की वजह से चर्च मुझे हमेशा से आकर्षित करते रहे हैं। चर्चों के प्रति मेरे आकर्षण की एक वजह यह भी रही... Read more
उपराष्ट्रपति से राम

हमने पत्रकारिता को टीआरपी मीटर का गुलाम बना दिया हैः रवीश कुमार

एनडीटीवी के कार्यकारी सम्पादक रवीश कुमार को हाल ही में देश का प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार दिया गया है। उसी पुरस्कार के संदर्भ में रवीश कुमार का ये संस्मरण।    बाग़ों में बहार तो नहीं है मगर फिर भी.... तस्वीरें अपनी नियति देखने वालों की निगाह में तय करती हैं। इंडियन एक्सप्रेस के प्रवीण जैन के कैमरे से उतारी गई इस तस्वीर को देखने वालों ने तस्वीर से ज़्यादा देखा। एक फ्रेम में कैद इस लम्हे को कोई एक साल पहले के वाक़ये से जोड़ कर देख रहा है तो कोई उन किस्सों से जिसे आज के माहौल ने गढ़ा है। दिसंबर की शाम बाग़ों में बहार का स्वागत... Read more
जैनेंद्र सुराना

आईपीएस की हिम्मत नही थी कि पत्रकार पर हाथ डाल दे!

इंदौर के पत्रकार जैनेंद्र सुराना बता रहे पत्रकारिता का स्वर्णिम दौरः-   मैंने आपातकाल में भी पत्रकारिता की थी। जी हाँ 1975 से लेकर 1978 तक मैं मंदसौर से प्रकाशित दैनिक दशपुर दर्शन का नीमच संवाददाता था और अखबार के संपादक थे सुप्रसिद्ध कवि व साहित्यकार बालकवि बैरागी के अनुज श्री विष्णु बैरागी। आपातकाल के उस दौर में एक दिन मैं अपनी साइकिल से नीमच के थाने के सामने से गुजर रहा था।मैंने वहाँ देखा कि थाने के खुले मैदान में एक लड़का और लड़की बैडमिंटन खेल रहे हैं और बैडमिंटन की नेट पकड़ कर खड़े हैं पुलिस के दो जवान! उस समय मेरी उम्र जरूर 20 वर्ष के आसपास... Read more
दैनिक भास्कर के चेयरमैन रमेश अग्रवाल

खबरिया जगत का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे रमेशचंद्र अग्रवाल

रमेशचंद्र अग्रवालजी का आज 73 वां जन्मदिवस दैनिक भास्कर भोपाल के समाचार सम्पादक अलीम बजमी याद कर रहे दैनिक भास्कर समूह के मुखिया रमेशचंद्र अग्रवाल को। यह लेख रमेश जी के व्यक्तित्व व कृतित्व से आपको रूबरू करवाएगा।    नायाब शख्सियत को खिराजे अकीदत:  स्वर्गीय रमेशचंद्र अग्रवाल। भास्कर पत्र समूह के चेयरमैन। वे अब हमारे बीच नहीं है। आज गुरुवार 30 नवंबर 2017 को उनका 73वां जन्मदिवस है। भाई साहब से जुड़ी कई यादें मेरे जहनों-दिल पर नक्श है। आंखोंं में कई मंजर, साथ गुजारे लम्हें अब अफसाने हैं। गुजरे जमाने के कई पल आंखों को नम कर रहे हैं। सुबह से ही भाई साहब की याद में आज कैफियत भी... Read more
हरिवंश राय बच्चन का पत्र।

कविता पर हरिवंश राय बच्चन का पत्र मिला तो पैर जमी पर नहीं थे मेरे

वरिष्ठ साहित्यकार व अनुवादक सुभाष नीरव अपनी साहित्यिक यात्रा के प्रारम्भिक दिनों की याद करते हुए बता रहे हैं कि जब उनकी कविता की प्रशंसा में कवि हरिवंश राय बच्चन का पत्र मिला। पढ़िए संस्मरण। सुभाष जी दिल्ली रहते हैं। पंजाबी से हिंदी अनुवाद करते हैं। कई किताबों के लेखक हैं।    [caption id="attachment_2512" align="alignleft" width="215"] कविता संग्रह जिस पर हरिवंश राय बच्चन का पत्र आया[/caption] पुरानी स्मृतियाँ - ‘यत्किंचित’ कविता-संग्रह का प्रकाशन और डॉ. हरिवंश राय बच्चन का पत्र ------------------------------------------------------------------------- मेरा और रूपसिंह चन्देल का संयुक्त कविता-संग्रह ‘यत्किंचित’ 1 जनवरी 1979 को प्रकाशित हुआ था। यह हम दोनों की पहली प्रकाशित पुस्तक है। मेरी साहित्यिक यात्रा की शुरूआत मुरादनगर... Read more
शबाना आजमी, अभिनेत्री

शबाना आजमी भले ही कितनी बड़ी अभिनेत्री हों, उनमें मुझे बौद्धिकता नजर नहीं आई

[caption id="attachment_2489" align="alignleft" width="137"] उमेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार[/caption] वरिष्ठ पत्रकार एवं आकाशवाणी में सलाहकार उमेश चतुर्वेदी जी अपने पुराने दौर को याद करते हुए हिंदी अखबारों की कार्य पद्धति के बारे में कुछ बता रहे हैं। उमेश जी दिल्ली रहते हैं। देश भर की पत्र पत्रिकाओं में उनके नियमित स्तंभ छपते हैं। उनके आलेखों में समाज को दिशा देने की पर्याप्त क्षमता है।    2002 की बात है..उन दिनों हिंदी के अखबारों में एक परिपाटी शुरू हुई। बड़े और नामचीन लोगों के लेख छापना। ये लोग लेखक या पत्रकार नहीं थे..बल्कि दूसरे क्षेत्रों के नामी हस्ती थे। वैसे यह परिपाटी अंग्रेजी अखबारों की नकल थी। उन दिनों मैं दैनिक भास्कर... Read more
कुंवर नारायण

जो भी छात्र कुंवर जी से मिलने जाता वो उसके हाथों को चूमते

महान कवि कुंवर नारायण जी का आज सुबह निधन हो गया। साहित्य अकादमी, ज्ञापनीठ और पद्मभूषण से सम्मानित कुंवर जी का जाना अपूर्णीय क्षति है हिंदी जगत के लिए। मूलरूप से फैजाबाद के रहने वाले थे।  वरिष्ठ लेखक गिरिराज किशोर कहते हैं कि कुंवर नारायण एकला चलो में यकीन करते थे। किसी गुट विशेष में उनका लगाव नहीं था। हालांकि इसका उन्हें नुक्सान भी हुआ। पर वो किसी गुट में न होने से हर गुट में थे। कुंवर नारायण जी के बारे में समय मीमांशा के सम्पादक अभिनव प्रकाश ने कुछ रोज पहले एक संस्मरण लिखा था। जरूरी है वो पढ़ना।   जीवन-मृत्यु मिथक और मनुष्यता के कवि:कुँवर नारायण -----------------------------------------------------------------------... Read more
कवि केदारनाथ सिंह और नाट्य समीक्षक अजीत राय (हरे कुर्ते में)।

कोई स्त्री किसी लेखक से प्रेम करती है तो ऊब जाती हैः केदारनाथ सिंह

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह और मशहूर नाट्य समीक्षक अजीत राय के बीच संवाद का दुर्लभ प्रस्तुतिकरण। ये संस्मरण खुद अजीत राय ने लिखा है। पढ़िए। न सिर्फ ये संस्मरण आपको केदारनाथ सिंह से परिचित करवाएगा अपितु विश्वसाहित्य के दर्शन भी कराएगा।    यह 17 फरवरी 2015 की रात है या इतिहास का कोई जीवंत अध्याय। पटना राजधानी एक्सप्रेस 120किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भाग रही है । नीचे की बर्थ पर मेरे सामने बैठे केदार नाथ सिंह मानो विश्व कविता का पूरा इतिहास खोल रहे है । उस नीम अंधेरी रात में हम कविता के एक दूसरे ही भूगोल में पहुंच गए हैं।... Read more