यादें

सिंध में रेत की खदाने

भिंड में देखा सिंध में निकलती रेत का खेल

( सुबह सवेरे में ग्राउंड रिपोर्ट )  वैसे हम गये हुये तो थे भिंड में पत्रकार संदीप शर्मा की मौत की खबर करने। मगर संदीप शर्मा की मौत जुडी हुयी थी स्थानीय रेत खनन माफिया से इसलिये खनन माफिया की खबर लेना जरूरी थी। इस साल मार्च के आखिरी दिनों में भिंड में पत्रकार संदीप शर्मा की डंपर से कुचलकर हुयी मौत की खबर ने पत्रकारिता जगत में सनसनी फैला दी थी। भिंड के इस युवा पत्रकार ने खनन माफिया और पुलिस प्रशासन के बीच चल रहे गठजोड को सामने लाया था। चैनल से इस खबर को करने की मंजूरी मिलते ही हम भिंड में थे।  संदीप ने अपने पत्रकारिता... Read more
दैनिक भास्कर के चेयरमैन रमेश अग्रवाल

दूसरे अखबार मालिकों की तरह रमेश जी ने लिखने में रूचि नहीं दिखायी

शोध पत्रिका समागम के सम्पादक मनोज कुमार की कलम से दैनिक भास्कर के  पूर्व प्रधान सम्पादक स्वर्गीय रमेशचंद्र अग्रवाल के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा। मैं ककहरा सीख रहा था, वो प्रिंसीपल थे.. मनोज कुमार        मैं उन दिनों पत्रकारिता का ककहरा सीख रहा था. और कहना ना होगा कि रमेशजी इस स्कूल के प्रिंसीपल हो चले थे. यह बात आजकल की नहीं बल्कि 30 बरस पुरानी है. बात है साल 87 की. मई के आखिरी हफ्ते के दिन थे. मैं रायपुर से भोपाल पीटीआई एवं देशबन्धु के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे हिन्दी पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यशाला में हिस्सेदारी करने के लिए भोपाल आया था. यह वह समय... Read more
पूर्व सांसद शिवानन्द तिवारी

बिहार के अख़बारों को नीतीश ने अपना चाकर बनाकर रखा है

पूर्व राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी बिहार की मीडिया पर प्रकाश डाल रहे हैं। शिवानंद जी वयोवृद्ध राजनेता हैं, प्रबुद्ध व्यक्ति हैं। पटना रहते हैं।    भगवान बन गए हैं नीतीश कुमार. उनका दावा है कि किसी को कुछ भी बना दे सकते हैं. किसी को भी कहीं से कहीं पहुँचा सकते हैं. शराब बंदी के दो साला जलसे के मौक़े पर नीतीश कुमार का भाषण दंभ और अंहकार से भरा हुआ था. बिहार के अख़बारों को तो नीतीश ने अपना चाकर बनाकर रखा है. सभी ने इनके भाषण पर एक से अधिक ख़बर बनाई है. प्राय: सभी हिंदी अखबारों ने एक पुरा पृष्ठ इनके भाषण के लिए दिया है. सरकारी... Read more
महान कवि केदारनाथ सिंह

हाथ से कुछ कंजूस पर दिल से बेहद उदार ऐसे थे केदार

केदारनाथ सिंह। एक युग। एक इतिहास। एक संसार। एक महाकाव्य। एक विश्वविद्यालय। एक इंसान। एक देहाती इंसान और एक वैश्विक इंसान। एक दोस्त। एक पिता,पति और पुत्र भी। और बहुत कुछ भी वो होंगे पर मैं नहीं जानता। दुनिया वैसे उन्हें भारत के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जेएनयू के प्रोफेसर के रूप में जानती है। एक महाकवि के रूप में जानती है। केदारनाथ जी हमारे बीच नहीं रहे। हालांकि मुझे याद नहीं आता हाल फिलहाल एक कवि के जाने पर दिल्ली इतनी रोयी हो। देश इतना रोया हो। मैं कल से लेकर आजतक सोशल मीडिया में देख रहा हूं दावे से कह सकता हूं कि साहित्य में जिसकी जरा भी दिलचस्पी है... Read more
वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र दीक्षित जी

जितेंद्र दीक्षित पत्रकारों के घोषित गार्जियन हो गए

मुजफ्फरनगर उत्तरप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र दीक्षित जी का हाल ही में निधन हो गया। श्री दीक्षित पत्रकारिता जगत में अपनी विशेष पहचान रखते थे। उनको याद कर रहे आजतक के प्रोड्यूसर विकास मिश्र।  दीक्षित जी चले गए। उनके साथ हम लोगों का एक अभिभावक चला गया। जरूरी नहीं कि जितेंद्र दीक्षित को आप जानते हों। जितेंद्र दीक्षित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित पत्रकार थे, जुझारू शख्सियत थे, अमर उजाला, मेरठ से रिटायर होकर फिलहाल मुजफ्फरनगर में रह रहे थे। दीक्षित जी से मेरा परिचय जनवरी 2000 में हुआ था, जब मैंने अमर उजाला में काम करना शुरू किया था। दीक्षित जी अमर उजाला मुजफ्फरनगर के ब्यूरो चीफ थे, मैं... Read more
मनुष्यता के लेखक प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग

प्रोफ़ेसर हॉकिंग पूरी मानवता की धरोहर थे

गद्य कोश और कविता कोश के संस्थापक ललित कुमार ने सर स्टीफन हॉकिंग पर एक संस्मरण लिखा है। ललित कुमार भारतीय साहित्य जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं। प्रोफेसर हाकिंग ने ललित कुमार के एक मेल का जवाब भी दिया था। आज प्रोफेसर नहीं रहे। मनुष्यता के लेखक नहीं रहे। जो जीवन की गुत्थियां सुलझाते सुलझाते हमे अलविदा कह गए।  इस अवसर इसे पढ़ा जाना चाहिए। ललित कुमार की कलम से। ललित राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से जुड़े हैं और दिल्ली रहते हैं।    आज शोक का दिन है ================ आज वह दिन है जब सभी को शोक मनाना चाहिए... देश जाति धर्म... सब कुछ भूल कर... आज मनुष्यता ने... Read more
गीतकार प्रमोद तिवारी

तरन्नुम में डूबी उनकी कविताएं कानों में गूंजतीं हैं

गीतकार औऱ कवि प्रमोद तिवारी का सड़क हादसे में दो दिन पहले निधन हो गया। उन्हें याद कर रहे भोपाल के वरिष्ठ टीवी पत्रकार ब्रजेश राजपूत।  आज सुबह करेली में मिली इस दुखद खबर ने बैचेन कर दिया कि हमारे प्रमोद तिवारी जी अब दुनिया में नहीं रहे, कल रात उन्नाव के पास हुयी सडक दुर्घटना ने उनके स्नेह का साया हमसे हमेशा के लिये छीन लिया। उफ भरोसा ही नहीं हो रहा। प्रमोद जी का साथ ९४-९५ में दैनिक जागरण नोएडा से मिला था वो हमारे चीफ सब एडीटर थे और हम सब यानिकी मैं, गोपाल शुक्ला, उपेन्द्र स्वामी और अखिलेश कुमार नौसिखिये नये नवेले उप संपादक, वो वहां... Read more
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर।

जनसत्ता जैसा अखबार आप फिर कहां से लाएंगे ?

अब तो उम्र के उस पड़ाव पर हूं जहां जनसत्ता जैसे लेखन का खतरा, चाहते हुए भी मैं उठा ही नहीं सकता।वैसे भी जनसत्ता जैसा लेखन तो जनसत्ता में ही तो छप सकता है ! वह जनसत्ता अब है कहां ? वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर जी अपने पत्रकारिता जीवन को याद कर रहे हैं। ये संस्मरण जनसत्ता के इर्द-गिर्द घूमता है। बताता है कि जनसत्ता की क्या साख थी। सुरेंद्र जी अब पटना रहते हैं। जनसत्ता से जुड़े रहे हैं।    मेरे कुछ फेस बुक मित्र मुझसे यह अपेक्षा करते हैं कि मैं अब भी उसी तरह लिखूं जिस तरह ‘जनसत्ता’ में 1983 से 2001 तक लिखा करता था।अब जब... Read more
नीलाभ मिश्र आम आदमी के संपादक रहे

नीलाभ मिश्र आम आदमी के संपादक रहे

वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह दिवंगत वरिष्ठ संपादक नीलाभ मिश्र के बारे में विस्तार से लिख रही हैं। दोनों ने साथ काम  किया है और कई यादें हैं जो यहां आप पढ़ पाएंगे।   वह एक जनपक्षधर-धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवी थे, जो ताउम्र नफरत और हिंसा की राजनीति के कट्टर विरोधी रहे और इसके लिए बड़ी से बड़ी कीमत भी चुकाने के लिए तैयार रहे। विचारधारा से उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। एक सच्चा दोस्त, एक सच्चा गुरू, एक सच्चा खबरनवीस, एक सच्चा योद्धा, एक सच्चा वाम-प्रगतिशील चिंतक-विचारक, एक सच्चा नारीवादी, एक सच्चा प्रेमी, एक सच्चा भोजनभट्ट, एक सच्चा भारतीय, एक सच्चा-खरा इंसान, एक सच्ची-विनम्र आत्मा... अनगिनत छवियां एक दूसरे को पार करती... Read more
अजीत अंजुम

बेचैनियों का बवंडर और पत्रकारिता में मेरे तीस सालः अजीत अंजुम

टीवी पत्रकारिता का बड़ा नाम हैं अजीत अंजुम। सोशल मीडिया पर भी छाए रहते हैं। ज़मीनी बातें करते हैं, 30 बसंत देख चुके अपने पत्रकारिता जीवन को याद कर रहे हैं। उन्हीं का आलेख यूसी न्यूज से साभार।    पत्रकारिता में करीब -करीब तीस साल होने जा रहे हैं . शुरुआत अखबारों में लिखने से किया . मुजफ्फरपुर में पढ़ाई करते हुए पटना के अखबारों के लिए लेटर टू एडिटर से मुफस्सिल संवाददाता बना . फिर कई अखबारों -पत्रिकाओं के लिए लिखते -भटकते हुए दिल्ली आ गया . कुछ महीनों की कदम ताल के बाद यहां ‘चौथी दुनिया ‘ में ठिकाना मिला . फिर करीब चार साल 'अमर उजाला' के... Read more