यादें

राजनाथ सिंह सूर्य

अच्छे संवाददाता के लिए राजनाथ सिंह सूर्य का गुरुमंत्र

उमेश चतुर्वेदीः सलाहकार, आल इंडिया रेडियो समाचार दिल्ली  अरसे से मन उचाट रहता है..इसका असर अपने ऊर्जा स्तर पर पड़ा है..लिखने की तमाम चाहतें होने के बावजूद लिखना थमता जा रहा है... दो दिन पहले वरिष्ठ पत्रकार, स्वतंत्र भारत अखबार के स्वर्णिम दिनों में संपादक रहे राजनाथ सिंह सूर्य का निधन हो गया...उनसे अपना भी कुछ नाता रहा..उनसे सीखा भी हूं...अव्वल तो उनके निधन की खबर सुनते-पढ़ते ही अपना भावोद्रेक उद्घाटित कर देना था...लेकिन उचाटपन की वजह से नहीं कर पाया.. राजनाथ सिंह सूर्य को पढ़ता तो अरसे से था..लेकिन प्रत्यक्ष परिचय हुआ साल 1999 में...इसके माध्यम बने अमर उजाला के तत्कालीन दिल्ली ब्यूरो प्रमुख Prabal Maitraजी...संसद का शीत सत्र चल... Read more
टीवी 9 भारत वर्ष

टीवी 9 भारतवर्ष की समीक्षा क्रमशः खण्डों में

लेखक हैं समरेंद्र सिंह-  टीवी 9 भारतवर्ष की समीक्षा - भाग एक बाजार में नया चैनल आया है टीवी 9 भारतवर्ष. उसके दो कर्ताधर्ता हैं. एक हैं अजीत अंजुम और दूसरे विनोद कापड़ी. मुझे इन दोनों "महान" पत्रकारों के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है. विनोद कापड़ी के साथ दो महीने और अजीत अंजुम के साथ दो साल. इन दोनों ने टीवी न्यूज की दुनिया को बहुत कुछ दिया है. अजीत अंजुम ने सनसनी दी है और विनोद कापड़ी ने खबरों को सनसनीखेज बनाने का तरीका दिया है. जहां तक मुझे याद आता है इन दोनों ने टीवी 9 भारतवर्ष से पहले कभी भी एक साथ काम नहीं किया. इस... Read more
स्वामी सम्पादक

एक स्वामी जो मेरा सम्पादक था…!

हिंदुस्तान समाचार पत्र पटना के स्थानीय सम्पादक नागेंन्द्र प्रताप साझा कर रहे अपनी यादें   1984 का वह ऐसा दौर था, जब मेरे सपने में भी लखनऊ छोड़ने जैसी बात नहीं आई थी. ‘नवजीवन’ से होते हुए ‘दैनिक जागरण’ में आ चुका था और हिंदी पत्रकारिता के ऐसे मुकाम पर था कि जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही थी (उस दौर के लखनउवा पत्रकार मित्र ‘एक और अक्टूबर क्रांति’ के उस दौर की तस्दीक करेंगे). ऐसे में एक दिन अचानक माधवकांत मिश्र आए, एक-दो सिटिंग में बतियाए, फिर हम चार लोगों को लेकर पटना चले गए (इस सब में बमुश्किल पन्द्रह-बीस दिन लगे होंगे)। हम चार यानी, मेरे अलावा अशोक... Read more
वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश।

उर्मिलेश की कलम सेः चुनाव रिपोर्टिंग: कुछ यादें!

उर्मिलेश, वरिष्ठ पत्रकार  आजकल का पत्रकारीय माहौल देखकर 'चुनाव में पत्रकार की अपनी हिस्सेदारी' विषय पर लिखने का मन हुआ! मेरा मानना है, किसी लेखक, बुद्धिजीवी, एकेडेमिक, सामाजिक या राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह एक सक्रिय पत्रकार, खासतौर पर रिपोर्टर या एंकर को चुनाव में किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान की सार्वजनिक अपील करने का नैतिक अधिकार नहीं है! मेरे हिसाब से ऐसा करना पत्रकारिता के मानदंडों पर उचित नहीं! मैने अपने निजी जीवन में इसे अक्षरशः लागू किया! पत्रकारिता में आने के बाद मैंने कभी किसी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान के लिए लोगों से सार्वजनिक तौर पर अपील नहीं की! अपनी रिपोर्टिंग या विश्लेषण में भी किसी... Read more
सच्चिदानंद जोशी

एक जीवन ऐसा भी : सच्चिदानंद जोशी

इंद्रा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र दिल्ली के सचिव सच्चिदानंद जोशी की कलम से -   सरस्वती नदी सभ्यता पर चर्चा के लिए आयोजित एक कार्यशाला में जाने का सौभाग्य मिला। इसमे देश की विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञ , ख्यातनाम पुरातत्व वेत्ता, और लोकसंस्थाओ के प्रतिनिधि को सरस्वती नदी की आख्यायिकाओ को जी रहे हैं आमंत्रित थे। आयोजक होने के नाते सभी आगंतुकों से मिलना जरूरी था । उस बहाने सबका परिचय भी हो जाता है। चाय के दौरान अनोपचारिक परिचय का दौर जारी था। मेरी दिलचस्पी इसरो और A S I जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मिलने की ज्यादा थी , साथ ही कुछ अत्यंत वरिष्ठ और प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता भी थे... Read more
प्रिया कुसुम

पत्रकार बनने के लिए ‘वन मस्ट बी वैरी थिक स्किन्ड’

प्रिया कुसुम महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक में पत्रकारिता की छात्रा हैं। 4 दिसम्बर 2019 को दिल्ली आई थीं दूरदर्शन में पत्रकार बनने, जबकि वो पत्रकार बनना नहीं चाहतीं। उन्होंने यात्रा के बारे में कुछ लिखा है। पढ़िए। इससे दूरदर्शन की कार्यशैली भी समझ में आएगी।    धुंध भरी सुबह और बस का इंतज़ार करती मैं. करीब 7 बजे से मैं बस स्टैण्ड पर खड़ी थी. इतनी ठंड में शायद बस भी बाहर आने से कतरा रही थी. पर आखिरकार वो आ ही गई और मैं रोहतक की ओर चल दी. फिर रोहतक से मेरी फ्रेंड सोनिया भी मेरे साथ बैठ गई और हम दोनों चल दिए दिल्ली की ओर. दरअसल,... Read more
बाबा रामदेव

पतंजलि नर्सरी में वह बुजुर्ग बाबा रामदेव के पिता थे

नवभारत टाइम्स दिल्ली के पत्रकार राजेश मित्तल की कलम से-  हरिद्वार: हरिद्वार के पास पतंजलि हर्बल गार्डन। शाम के 6 बजे हैं। अंधेरा होने को है। गार्डन के औषधीय पौधों, झरने, गुफा, तालाब, बर्ड हाउस और ट्री हाउस का आनंद लेने के बाद हम वहाँ की नर्सरी में थे। यहां पौधे बेहद सस्ते हैं। ज़्यादातर पौधे 10-20 रुपये में मिल जाते हैं और जैविक खाद 10 रुपये में किलो। इसलिए हमने काफी पौधे और खाद के पैकिट खरीद लिए। नर्सरी में कुल दो आदमी थे। एक अधेड़ उम्र का दिव्यांग था और एक बुजुर्ग सज्जन। पौधे और खाद खरीदने के बाद समस्या खड़ी हुई कि इन्हें ले कैसे जाएं। बुज़ुर्ग... Read more
प्रिंट मीडिया

सम्पादक की पातीः मिरर की यात्रा 2018 में

वर्ष 2018 का आज अंतिम दिन है। ये विदाई की बेला है। परम्परा है हमारी की विदाई की बेला में हम सब भावुक हो जाते हैं। मैं भी हूं। आजकल थोड़ा फुरसत में जीवन जी रहा हूं, तो शाम को हरदिल जो प्यार करेगा फिल्म देखी और अब हर्बल चाय पीते हुए आपको पत्र लिख रहा हूं। सोच रहा था लिखूं या न लिखूं। पर फिर निर्णय लिया कि आपसे कुछ तो कहना बनता है। क्योंकि आप मिरर के पाठक हैं औऱ आपसे ही मिरर है। दोस्तों मिरर को मैंने एक फेसबुक समूह से शुरू किया था। जानने वाले जानते हैं जो मीडिया मिरर नाम के फेसबुक समूह से शुरू... Read more
ग्रामीण भारत

तुलनाः हमारे पुरखे और हम

प्रशांत राजावत- सम्पादक मीडिया मिरर  मेरे दादा जी बहुत बढ़िया घुड़सवार थे। सिंधिया की फ़ौज में स्वतंत्रता से पूर्व थे वो, उनको एक ऐसे ख़तरनाक घोड़े की सवारी करने को दी गयी जिसमे न बैठने की सीट थी और न लगाम। कुछ सजा के बदले था ये। पर वो उस घोड़े को काबू करके सात लम्बे लम्बे गढ्ढे फांद गए। दादा जी ढोलक और हारमोनियम बहुत अच्छी बजाते थे। जब मैं समझने लायक हुआ तब ढोलक में तो उनको नहीं सुना पर हारमोनियम हर सुबह वो बजाते और भजन गाते। गला बढ़िया था। दादी बताती थीं फरसा बहुत अच्छा चलाते थे। बन्दूक के चोटी के निशांची थे। एकबार शहडोल जिले... Read more
हेमंत शर्मा

आपकी खबरों में मेरी बहुत तरफदारी नहीं होनी चाहिए”, बोले थे अटल जी

हेमंत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार  अटल जी भारतीय राजनीति के ऋषि थे। उनकी लोकप्रियता कभी किसी सीमा की मोहताज नही रही। देश और विदेश की बात तो दूर रही, दुश्मन देश में भी उस लोकप्रियता का कोई मुकाबला नही था। मैने अटल जी को काफी करीब से जाना। उनका स्नेह भाजन रहा। उनसे हमेशा एक अनौपचारिक सा रिश्ता रहा जिसमें कुछ भी कहने या पूछने में कभी हिचक नही महसूस हुई। अटल जी ने भी इस रिश्ते को हमेशा निभाया। कभी कोई औपचारिकता नही आने दी। जो सवाल असहज करने वाले लगे, उनका जवाब चुटकियां लेकर या फिर मुस्कुराहट भरे मौन से दिया और जिन पर बोलना चाहा, कुछ भी शेष... Read more