साथी की ख़ूबी

विद्यादर्शन

17 वर्षों से हस्तलिखित अख़बार चला रहा ये पत्रकार

[caption id="attachment_3132" align="alignleft" width="169"] क्या जज़्बा हैः  अखबार को तैयार करते दिनेश।[/caption] एक पत्रकार ऐसा भी... मुज़फ्फर नगर में एक पत्रकार ऐसा भी है जिसके पास न अपनी छपाई मशीन है, न कोई स्टाफ और न सूचना क्रांति के प्रमुख साधन-संसाधन। मात्र कोरी आर्ट शीट और काले स्केच ही उसके पत्रकारिता के साधन हैं। तमाम शहर की दूरी अपनी साईकिल से तय करने वाले और एक-एक हफ्ता बगैर धुले कपड़ों में निकालने वाले इस पत्रकार का नाम है दिनेश। जो गाँधी कालोनी का रहने वाला है। हर रोज अपनी रोजी रोटी चलाने के अलावा दिनेश पिछले सत्रह वर्षों से अपने हस्तलिखित अख़बार "विद्या दर्शन" को चला रहा है। प्रतिदिन अपने... Read more
जगदीश उपासने।

सरल नहीं है उपासने हो जाना

[caption id="attachment_3035" align="alignleft" width="103"] समागम पत्रिका के सम्पादक मनोज कुमार[/caption] माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के नव-नियुक्त कुलपति जगदीश उपासने के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित इस आलेख के लेखक हैं शोध पत्रिका समागम के सम्पादक मनोज कुमार। मनोज जी भोपाल रहते हैं और उपासने जी से जुड़े रहे हैं। मनोज जी कहते हैं कि आडम्बरों से परे रहने वाले उपासने जी से मेरा अग्रज और अनुज का रिश्ता है। उपासने जी से जुड़ी कुछ बातों का रहस्योद्घाटन भी इस आलेख में.....  एक पत्रकार से एक सम्पादक हो जाना बहुत कठिन नहीं है लेकिन एक सम्पादक से किसी महनीय विश्वविद्यालय का कुलपति हो जाना मुश्किल सा था. और इस मुश्किल... Read more
रवीश कुमार अपने लाल माईक के साथ

जब दुकानदार रवीश कुमार से बोला हम देशद्रोहियों को सामान नहीं देते

(साथी की खूबी)  लेखक हैदर रिज़वी टीवी पत्रकार रवीश कुमार के बारे में बड़ी बाराकी से बता रहे हैं। बता रहे हैं कि रवीश होना कितना मुश्किल है और रवीश बने रहना मानो असंभव। पता नहीं पर सच है कि रवीश कुमार को जितने लोग गाली देते हैं उससे सौ गुना ज्यादा लोग प्यार करते हैं।  पढ़िए बढ़िया संस्मरण।    कांग्रेस गवर्नमेंट के समय शायद, एक बार रविश जी ने कहा था, कि हैदर साहब मुझे मेरे जैसे चार पत्रकार और मिल जाएँ तो सरकारों को लाइन पर ले आएँगे हम लोग... लेकिन मेरी कहानी उसके काफ़ी बाद से शुरू होती है.. २०१५ के बुक फ़ेयर में जब रविश कुमार... Read more
गूगल खोज की वही पहली तस्वीर जिसमें श्री अकु श्रीवास्तव और प्रशांत राजावत।

बहुत सख़्त पर बहुत से थोड़ा ज्यादा नरम हैं ये सम्पादक

(साथी की खूबी) गूगल पर आप प्रशांत राजावत टाइप करेंगे हिंदी या अंग्रेजी किसी भी भाषा में तो इमेज में पहली जो तस्वीर दिखेगी उसमें प्रशांत राजावत यानी मैं और अकु (अवधेश कुमार) श्रीवास्तव जी आपको नजर आएंगे। अकु जी फिलहाल पंजाब केसरी समूह जालंधर के दिल्ली से प्रकाशित हिंदी दैनिक समाचार पत्र नवोदय टॉइम्स के कार्य़कारी सम्पादक हैं। आज उनका जन्मदिन है और मेरे सम्पादक रहे हैं तो उनके बारे में कुछ लिखने की भूमिका बनी।   अकु जी के साथ मैंने तकरीबन ढाई साल काम किया और जितना मैंने उनको जाना वो बहुत सख्त हैं पर बहुत से थोड़ा ज्यादा नरम हैं। किसी काम को लेकर वो आपको... Read more
वरिष्ठ सम्पादक व पत्रकार श्री हरिमोहन शर्मा।

मिलिये एक सन्त सम्पादक से

(साथी की ख़ूबी) जैसे राजनीति में अटल जी, खेल में सचिन और फ़िल्म जगत में अमिताभ का कोई विरोधी नहीं। वैसे ही पत्रकारिता जगत में हरिमोहन शर्मा का कोई विरोधी नहीं। मप्र के वरिष्ठतम सम्पादकों में से एक हैं हरिमोहन जी। स्वदेश से पत्रकारिता शुरू करने वाले हरिमोहन जी का सपना तो ट्रक ड्राइवर बनने का था। पुरानी हिंदी फ़िल्मो के शौक़ीन, इतने शौक़ीन की उनकी केबिन में कोई न कोई फ़िल्म चलती ही मिलती। उन्हें समाचार चैनल देखने की ही औपचारिकता बतौर सम्पादक दफ़्तर में पेश करने की कोई मंशा नहीं होती। तेज आवाज में फिल्मे देखते, खूब मुस्कुराते। खुश रहते और खुश रहने का औरों को अवसर देते। स्वदेश... Read more
रमेश भट्ट

इस उत्तराखंडी को मैंने एक पूर्ण समर्पित पत्रकार के रूप में पाया

[caption id="attachment_2261" align="alignleft" width="131"] पद्मपति शर्मा, खेल विशेषज्ञ[/caption] वरिष्ठ खेल पत्रकार पद्मपति शर्मा बता रहे हैं अपने साथी रमेश भट्ट की खूबी। आप भी पढ़िए। रमेश टीवी पत्रकारिता छोड़ अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव हैं।    ओज से दीप्त इस उत्तराखंडी को मैंने एक पूर्ण समर्पित पत्रकार के रूप में पाया. पिछले 13 वर्षों के टीवी अनुभव के दौरान मैने जिन एंकरों को देखा उनमें रमेश अपनी ओजस्वी वाणी और समर्पण के लिहाज से मेरी किताब में पहली पायदान पर रहा है. उसकी गूंजती तार्किक आवाज श्रोताओं के सीधे दिल में उतरा करती थी. टीवी पत्रकारों की जिंदगी मैने देखी है. उनके पास आज की आपाधापी में पढ़ने... Read more
दैनिक भास्कर इंदौर कार्यालय में कल्पेश याग्निक से चर्चा करते आनंद कुमार

ज्ञान और सौम्यता का मिश्रण हैं कल्पेश याग्निक: आनंद कुमार, सुपर-30

पटना निवासी सुपर-30 के संचालक आनंद कुमार को कौन नहीं जानता। आनंद की हाल ही में दैनिक भास्कर समूह के सम्पादक कल्पेश याग्निक से इंदौर में मुलाकात हुई। कल्पेश जी के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर आनंद जी ने कुछ लिखा है। उन्ही के शब्दों में:- पिछले दिनों जब मैं इंदौर गया हुआ था तब उनके आमंत्रण पर उनसे मिलने का मौका मिला तो उनकी सादगी ने चौकने पर मजबूर कर दिया | भास्कर जैसे बड़े अख़बार के ग्रुप एडिटर को एक मामूली टेबल-कुर्सी पर बिना किसी केबिन के कुछ सहर्मियों के साथ बैठा देख सुखद आश्चर्य हुआ | ज्ञान और सौम्यता जब एक ही सांचे में ढल जाये और फिर... Read more
उदय शंकर स्टार इंडिया के सीईओ

उदय ने सही मायने में हिन्‍दी चैनलों को न्‍यूज कवर करना सिखाया: अरुण पुरी

उदय शंकर स्टार इंडिया के सीईओ हैं. बिहार से हैं। नब्बे के दशक में टाइम्स इंस्टिट्यूट से पढ़कर निकले उदय पटना के टाइम्स ऑफ़ इंडिया में पहली बार नौकरी में आये थे। उदय जी टीवी टुडे नेटवर्क का हिस्सा थे और जब उन्होंने ये समूह छोड़ दिया तो टीवी टुडे नेटवर्क के मुखिया अरुण पुरी ने एक पत्र उदय शंकर की तारीफ़ में लिखा। अरुण पुरी ने पत्र में क्या लिखा पढ़ लीजिये                                              ------------------------------------------------ मुझे अपनी इस खूबी पर काफी गर्व है कि मैं टैलेंट को बहुत अच्‍छे से... Read more
इरशाद क़ामिल

मैं कुलदीप नैय्यर नहीं बन सकता मैं अरुण शौरी नहीं बन सकता तो गीतकार बनूंगा: इरशाद कामिल

इरशाद क़ामिल जो कभी पत्रकार थे, पर उन्हें लगा की वो पत्रकारिता में बड़ा नाम नहीं बन सकते, तब उन्होंने तय किया मुम्बई जाना है और गीतकार बनना है। आज क़ामिल मुम्बई में स्थापित हैं और बॉलीवुड में लोकप्रिय गीतकार हैं। जब वी मेट, चमेली,लव आजकल, रॉकस्टार, आशिकी 2 और रांझणा के गाने इरशाद ने लिखे।।  कैसे वो पत्रकार से गीतकार बने बता रहे वरिष्ठ पत्रकार ईश मधु।  ऐसे एक पत्रकार बना गीतकार इरशाद कामिल के साथ यह तस्वीर जयपुर में शाम से बदलती रात के झुरमुट की है। इस समय बॉलीवुड के नंबर एक गीतकार इरशाद कामिल जब जयपुर आये तो मैं चंडीगढ़ की पुरानी यादों में चला गया जहाँ... Read more
मुम्बई नवभारत टाइम्स दफ़्त

कुछ नया जानने की ललक ऐसी की युवाओं को भी शर्मिंदा होना पड़े

नवभारत टाइम्स मुम्बई के रिपोर्टर विजय पाण्डेय बता रहे हाल ही में मुम्बई दफ़्तर से रिटायर हुए सतीश मिश्रा के बारे में नवभारत टाइम्स में आए करीब 5 साल हो गए लेकिन किसी की विदाई का उत्सव पहली बार देखा। सतीश सर की कल विदाई का जश्न भी मनाया जा रहा था और दुख भी। पिछले दो दिनों से एनबीटी मुंबई में मानो कोई उत्सव चल रहा हो, कुछ इस तरह का माहौल था। हर कोई अपनी ओर से कुछ अलग करने की सोच में लगा हुआ था। दामू भाई ने इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तय कर इसे बेहतरीन बना दिया। फिर कल जब सतीश सर को कुछ क्रिकेटिया... Read more