साथी की ख़ूबी

गीत चतुर्वेदी।

गीत की कविता असाध्यवीणा की तरह हमारे कौशल का इम्तहान लेती हुई दिखती है

साथी की ख़ूबी प्रसिद्ध लेखक, कवि ओम निश्चल गीतकार गीत चतुर्वेदी कविताओं के अनुवाद और अद्भुत कविताओं के लिए जाने जाते हैं।के बारे बता रहे हैं। गीत मुम्बई रहते हैं और ओम जी दिल्ली। गीत साहित्य जगत का युवा चेहरा हैं, विदेशी  ----//---- मिलने का मुहूर्त और मैत्री । न उनकी कविता अपने समय से ओझल होती है न अपनी परंपरा से प्राप्त सबसे उर्वर कल्पलनाशील कविता को अपना दयनीय चेहरा दिखाती है। गीत की कविता किन्तु केवल कोमल कोमल गुलाबी पंखुड़ियों की तरह नहीं, वह असाध्यवीणा की तरह हमारे कौशल का इम्तहान लेती हुई भी दिखती है। जैसा कि कभी जायसी ने कहा है, तपनि मृगशिरा जे सहहिं आर्द्रा... Read more
राजीव रंजन सिंह

एक पत्रकार के तौर पर ज़मीनी हक़ीक़त के समझदार और ग़ज़ब के विश्लेषक राजीव

साथी की ख़ूबी इंडिया टीवी के प्रबंध सम्पादक अजीत अंजूम की कलम से: जिन चंद लोगों की संगति मुझे बहुत पसंद है , उनमें राजीव रंजन सिंह भी है ..ग़ज़ब की ज़िंदादिली है इनमें...Positive energy से लबरेज़ ...हर हाल में राजीव की मौजूदगी एक ख़ुशनुमा अहसास देती है ...एक पत्रकार के तौर पर ज़मीनी हक़ीक़त के समझदार और ग़ज़ब के विश्लेषक .... बाकपटु तो हैं ही ...न्यूज 24 पर माहौल क्या है के नाम से एक शो करते हैं ..कभी देखिए तो इनके अंदाज के शायद आप भी मुरीद हो जाएँ ... 2014 के चुनाव के दौरान राजीव ने दिल्ली एक्सप्रेस के नाम से एक शो किया था ...हर एपिसोड... Read more
तस्वीर में नीली कमीज में दयानन्द और योगेश जी

लखनऊ के हुस्न का हाल जानना हो तो योगेश प्रवीन से मिलिए

साथी की ख़ूबी दयानंद पाण्डेय गोरखपुर की ज़ुबानी लखनऊ के हुस्न का हाल जानना हो तो योगेश प्रवीन से मिलिए। जैसे रामकथा बहुतों ने लिखी है, वैसे ही लखनऊ और अवध का इतिहास भी बहुतों ने लिखा है। पर अगर रामकथा के लिए लोग तुलसीदास को जानते हैं तो लखनऊ की कथा के लिए हम योगेश प्रवीन को जानते हैं। अब यही योगेश प्रवीन अब की अट्ठाइस अक्टूबर को पचहत्तर वर्ष के हो रहे हैं तो उन की कथा भी बांचने का मन हो रहा है। कभी नवाब वाज़िद अली शाह ने कुल्लियाते अख्तर में लिखा था : लखनऊ हम पर फ़िदा है हम फ़िदा-ए-लखनऊ आसमां की क्या हकीकत जो छुड़ाए... Read more
उमेश चतुर्वेदी

उमेश जी मीडिया इंडस्ट्री के जाने माने लिक्खाड़ हैं

साथी की ख़ूबी आजतक दिल्ली में प्रोड्यूसर विकास मिश्र बता रहे वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी के बारे में। उमेश जी दिल्ली रहते हैं। प्रसिद्ध स्तंभकार हैं। ----//----- उमेश जी मीडिया इंडस्ट्री के जाने माने लिक्खाड़ हैं। हम सब आपके कायल हैं। मुझे याद है कि हिमालय दर्पण में हम लोग साथ काम कर रहे थे। किसी साहित्यकार का निधन हो गया था। तब गूगल देवता भी नहीं थे। उस वक्त आपने बीस मिनट के भीतर चार कॉलम की बेहतरीन रिपोर्ट लिखी थी। कोई भी विषय हो आपकी लेखनी के लिए हमेशा ही वो साध्य होता है। Read more

जितने बढ़िया एंकर, उतने ही बेहतरीन इंसान सईद अंसारी

साथी की ख़ूबी (ये मीडिया मिरर का नया कालम है, जिसमे आप भी अपने साथी की ख़ूबी की चर्चा कर सकते हैं) आजतक के प्रोड्यूसर विकास मिश्रा बता रहे अपने साथी की ख़ूबी। पढ़िये सईद अंसारी...नाम तो सुना होगा..। जितने बढ़िया एंकर, उतने ही बेहतरीन इंसान भी। हमेशा हंसते हुए और गर्मजोशी के साथ मिलते हैं। हर किसी की मदद के लिए तैयार, पक्के यारबाज। मुझे नहीं लगता कि दुनिया में कोई ऐसा भी इंसान होगा, जिसने कभी ये शिकायत की हो कि सईद अंसारी ने मुझसे कोई गलत बात की, तल्ख आवाज में बात की। जमीन से बिल्कुल जुड़े हुए, बिल्कुल इगोलेस, कमाल के इंसान। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अगर... Read more
श्वेता सिंह

शो को लेकर हद तक जुनूनी हैं एंकर श्वेता सिंह

साथीकी ख़ूबी आजतक की एंकर श्वेता सिंह के बारे में आजतक के प्रोड्यूसर विकास मिश्र बता रहे हैं। श्वेता सिंह को आपने टीवी के परदे पर देखा होगा, लेकिन परदे के पीछे श्वेता कितनी मेहनतकश हैं, अपने शो को लेकर वो किस हद तक जुनूनी हैं, शायद ये बात बहुत लोगों को पता नहीं है। श्वेता उन गिने चुने एंकर्स में से एक हैं, जो अपना प्रोग्राम खुद बनाती हैं, खुद गहन रिसर्च करती हैं, खुद स्क्रिप्ट लिखती हैं, खुद शूट करती हैं। गंगा पर उऩ्होंने गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक शानदार सीरीज तैयार की थी। वंदे मातरम् के दो सीजनकी पूरी सीरीज उन्होंने बनाई थी। अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय... Read more
द वायर के सम्पादक सिद्धार्थ वरदराजन

सिद्धार्थ वरदराजन भाग्यशाली थे कि उनका साबका पहले मिली-जुली हिंदी से पड़ा: ओम थानवी

साथी की ख़ूबी ओम थानवी बता रहे द वायर के सम्पादक सिद्धार्थ वरदराजन की बातें 'वायर' और 'इंडियन एक्सप्रेस' में जितनी साहसपूर्ण सामग्री छपती है, मीडिया में अन्यत्र कम मिलेगी। 'वायर' अब हिंदी में भी शुरू हो गया है और बहुत थोड़े वक्फ़े में उसके लेख-टिप्पणियाँ चर्चा में आने लगे। विनोद दुआ का 'जन की बात' एक पहचान बन गया है। बताऊँ कि 'वायर' एक और ख़ास बात मुझे क्या अनुभव होती है: हिंदी की अहमियत को समझना। इसकी एक वजह शायद यह हो कि उसके संस्थापक-सम्पादक सिद्धार्थ वरदराजन अच्छी हिंदी जानते हैं। यों हिंदी की उनकी बुनियाद पड़ी शायद उर्दू के सहारे। (बोलचाल की उर्दू, हम जानते हैं, कमोबेश... Read more

दुख का उत्सव मनाने वाली कोई स्त्री ही मेरी नायिका हो सकती है….वो हैं विभा रानी: गीता श्री

साथी की ख़ूबी वरिष्ठ कथाकार गीता श्री बता रहीं अपनी साथी विभा रानी के बारे में। विभा लेखिका और कलाकार हैं। मुम्बई रहती हैं। समरथ नाम से एक किताब लिखी है। आज विभा जी का जन्मदिन है। विभा रानी के बारे में गोनू झा के क़िस्से याद आते तो उनकी किताब पलट लेती. वो मेरे लिए मिथिला अस्मिताकी परिचायक थीं. हिंदी में कविताएँ , कहानियाँ यदाकदा पढ लेती थी और उनकी आँचलिक ख़ुशबू पर हैरां होती कि महानगर में रहते हुए इस ख़ुशबू को कैसे बचा पाईं होगी? कितने नादां थे हम कि हम जान न पाए, यह तो पूरी नौरंगी नटनी हैं हमारी छम्मक छल्लो. पूरा लोक ओढ़े जीती हैं.... Read more
सुप्रीत

सुप्रीत फाइटर है, वो लड़ेगी भी और जीतेगी भी: आदित्य

साथीकी ख़ूबी सुप्रीत फाइटर है, वो लड़ेगी भी और जीतेगी भी: आदित्य सुप्रीत कौर, वो पत्रकार जो अपने जज़्बे और अदम्य साहस के बलबूते देश व विदेश में चर्चा में हैं। विश्वभर के पत्रकारों की संवेदना उनके साथ है। महज़ 2 रोज पहले ही सुप्रीत के पति का निधन हो गया और उनको लाइव बुलेटिन में अपने पति के मौत की खबर पढ़नी पड़ी। कितना धैर्य और साहस का परिचय दिया होगा सुप्रीत ने। सुप्रीत रायपुर छत्तीसगढ़ में एक निजी चैनल में एंकर हैं। मीडिया मिरर ने सुप्रीत के खास मित्र और शुभचिंतक डीडी न्यूज़ भोपाल के एंकर आदित्य श्रीवास्तव से बात की और आग्रह किया की वो सुप्रीत के... Read more
यतीन्द्र मिश्र

और इस लड़के ने वे सभी गीत साध लिए थे: मालिनी अवस्थी

साथीकी ख़ूबी लोक गायिका मालिनी अवस्थी बता रहीं यतीन्द्र मिश्र के बारे में, यतीन्द्र की किताब लता सुर गाथा को सिनेमा की बेहतर किताब होने का पुरस्कार देने की घोषणा हाल में हुई हैं। यतीन्द्र अयोध्या में रहते हैं। मालिनी अवस्थी की नज़र में यतीन्द्र मिश्र:- बीस वर्ष पूर्व एक उत्साही तरुण से अयोध्या में भेंट हुई, मोहित, जिसे अब दुनिया यतीन्द्र मिश्र के नाम से जानती है। सामान्य परिचय समान रुचियों के कारण शीघ्र ही घनिष्ठता मे बदल गया। उम्र से कहीं अधिक परिपक्व अध्ययन-रत उस तरुण की साहित्य, संगीत कीगहरी पकड़ उसके उज्ज्वल भविष्य का संकेत देती थी। पारिवारिक संबंध सा बन गया, मुझे बहुत आदर के साथ... Read more