बात-मुलाकात

गौरव बल्लभ

टीवी डिबेट्स का बहिष्कार कोई समाधान नहींः गौरव वल्लभ

12 अगस्त को आजतक चैनल में हो रही लाइव डिबेट के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी की ह्दयगति रुकी और अस्पताल पहुंचते ही उनका निधन हो गया। इस घटना के बाद से भारत में ही नहीं अपति विश्व मीडिया में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया कि टीवी डिबेट्स का स्वरूप कैसा हो, साथ ही टीवी बहसों के वर्तमान चलन पर लोग विरोध जताने लगे, सोशल मीडिया में जमकर ये आपत्ति दर्ज की गई। ये मामला अब भी सुर्खियों में है। लोगों को लग रहा है कि कहीं न कहीं बहसों के हिंसात्मक स्वरूप के कारण ही राजीव त्यागी की मौत हुई। राजीव त्यागी की पत्नी ने भी बयान दर्ज... Read more
पत्रकार

” मीडिया मालिक इतने अक्षम नहीं कि लॉकडाउन में पत्रकारों को सैलरी न दे सकें”

आकाशवाणी में सलाहकार एवं दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी जी इस बार मीडिया मिरर की साक्षात्कार श्रृंखला बात-मुलाकात में हमारे अतिथि हैं। उमेश जी मूलरूप से बलिया उत्तरप्रदेश से आते हैं। लेकिन लम्बे समय से दिल्ली ही उनका कर्मक्षेत्र है। देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों (प्रिंट व इलैक्ट्रॉनिक) में लम्बा कार्यअनुभव है। प्रसिद्ध स्तम्भकार हैं। फिलहाल दिल्ली पत्रकार संघ के उपाध्यक्ष भी हैं। मीडिया मिरर सम्पादक डॉ प्रशांत राजावत ने उमेश चतुर्वेदी जी से पत्रकार संगठनों की दशा, दिशा औऱ भूमिका पर केन्द्रित लम्बी बातचीत की है। प्रस्तुत है।     प्र. कोरोना महामारी का प्रकोप चल रहा है। लोग घरों में कैद हैं। कैसे समय व्यतीत कर रहे... Read more
समीना

मेरे पापा चाहते थे मैं टीचर बनूंः समीना अली सिद्दीकी

29 वर्षों से रेडियो एवं टेलीविजन की दुनिया में अपना योगदान दे रहीं बेहद लोकप्रिय और काबिल पत्रकार, एंकर समीना अली सिद्दीकी से मीडिया मिरर सम्पादक डॉ प्रशांत राजावत ने लम्बी बातचीत की। समीना जी मूलतः भोपाल की हैं। उनकी आवाज में जो जादू है वो उन्हें विरासत में मिला। उनके वालिद भोपाल आकाशवाणी के लोकप्रिय उद्घोषक थे। जिन्हें गोल्डन वाइस के नाम से ख्याति मिली थी। हालांकि मजेदार बात ये है कि रेडियो की दुनिया में होने के बाद भी वालिद साब चाहते थे कि समीना शिक्षा के क्षेत्र में जाएं। यहां तक कि जब रेडियो में ऑडीशन दिया समीना जी ने, तो वो पिता को बिना बताए। लेकिन... Read more
नीलाभ अश्क

नीलाभ फ्लर्ट थे या विनम्र, पता नहीः भूमिका व्दिवेदी

मीडिया मिरर की साक्षात्कार श्रृंखला में हमारी अतिथि हैं भूमिका व्दिवेदी। भूमिका कथाकार हैं, दिल्ली रहती हैं। मूलरूप से इलाहाबाद की रहने वाली हैं। भूमिका को भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्कार (उपन्यास बोहनी के लिए) , मीरा पुरस्कार (उपन्यास आसमानी चादर के लिए) मिल चुका है। हिंदी साहित्य जगत में युवा लेखकों की कतार में उनका नाम बड़े आदर से लिया जाता है। ये तो भूमिका की निजी पहचान औऱ कमाई है। इसके अलावा वो प्रसिद्ध साहित्यकार उपेंद्रनाथ अश्क की बहू और लेखक, अनुवादक नीलाभ अश्क की पत्नी हैं। दरअसल इस श्रृंखला के लिए मिरर ने कई विशिष्ठ लोगों से साक्षात्कार किए हैं। पर ये साक्षात्कार थोड़ा अलग है। ये... Read more
जयप्रकाश चौकसे

विराट एवं पुरातन किस्सागोई का हिस्सा है मेरी पत्रकारिताः जयप्रकाश चौकसे

मीडिया मिरर की साक्षात्कार श्रृंखला बात-मुलाकात में इस बार हमारे विशेष अतिथि हैं प्रख्यात फिल्म पत्रकार जयप्रकाश चौकसे। हालांकि श्री चौकसे ने फिल्म निर्माण से लेकर फिल्म, रियलिटी शो आदि के लिए पटकथा लेखन भी किया। फिल्म वितरण व्यवसाय से भी जुड़े रहे। लेकिन उनकी मूल पहचान फिल्म पत्रकार के रूप में ही है। इसलिए हम उन्हें इसी रूप में जानते-समझते हैं। जयप्रकाश चौकसे जी का जन्म 1939 में मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में हुआ। अंग्रेजी औऱ हिंदी साहित्य से स्नातकोत्तर करने वाले चौकसे जी ने कुछ वर्ष अध्यापन कार्य भी किया। 5 दशक से ज्यादा समय से फिल्म पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कह सकते हैं भारतीय फिल्म पत्रकारिता में सबसे... Read more
R Rajagopal, editor of The Telegraph

The Telegraph editor, R Rajagopal: Cannot afford to stay neutral

by anuradha sharma  “When was the last time you saw such a headline?” R Rajagopal, editor of The Telegraph, asked a hall full of college students last month. “Let us see how the headline works here: first the sledgehammer blow. Then the tug at the heartstrings.” As part of his guest address at St Berchmans College, Changanassery in Kerala, Rajagopal circulated copies of the front page of the last edition The Warroad Pioneer, the 121-year-old community paper of Minnesota that closed down recently, and asked the students to roll the headline off their tongues: Final Edition/How Lucky To Have Known Something So Hard To Say Goodbye To. “No pronoun. No names at... Read more
लता मंगेशकर

टीवी में बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं और अखबार में भी ज्यादा बताते हैंः लता मंगेशकर

लताजी का आज 91वां जन्मदिन है, इस मौके पर दैनिक भास्कर ने उनसे बातचीत की   आजकल लोग कहते हैं कि टीवी में बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। अखबार में भी ज्यादा लिखते हैं, जो हुआ भी नहीं है। लेकिन मैं सोचती हूं कि किसी ने 100 बातें बताई हैं, ताे उसमें से 50 तो ठीक होंगी। मैं सच्ची बात कहती हूं,मीडिया से जरा दूर ही रहती हूं। ज्यादा मिलना या टीवी पर बार-बार जाना और इंटरव्यू देने से दूर रहती हूं। मुंबई (उमेश कुमार उपाध्याय). स्वर कोकिला लता मंगेशकर का आज 28 सितंबर 91वां जन्मदिन है। फिल्म संगीत में 70 साल के अभूतपूर्व योगदान पर प्रधानमंत्री ने 6 सितंबर को ट्वीट कर उन्हें... Read more
एनबीटी

मुंबई के फिल्म जर्नलिस्ट की जिंदगी उतनी ग्लैमरस ‌नहीं जितनी दिखती है

मीडिया मिरर की साक्षात्कार श्रृंखला बात-मुलाकात में इस बार हमारे विशेष अतिथि हैं मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार विमल मिश्र।  विमल जी ने आज अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की और आजीवन नवभारत टाइम्स मुंबई में सेवाएं दीं। हाल ही में वो मुंबई एनबीटी से सेवानिवृत्त हुए हैं। बहुत ही सरल औऱ सहज मिश्र जी पत्रकारिता का ज्ञानकोष हैं। प्रस्तुत है मीडिया मिरर सम्पादक प्रशांत राजावत के साथ उनकी बातचीत।    प्र. नवभारत टाइम्स, मुंबई से आप हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं। सबसे पहले पत्रकारिता जगत में एक खूबसूरत पारी के लिए बधाई। थोड़ा हमारे पाठकों को बताएं अपने बारे में। पत्रकारिता की शुरुआत कहां से की। कुछ घर-परिवार के बारे... Read more
पी साईंनाथ

किसान का सवाल अर्थतंत्र ही नहीं हमारी नैतिकता पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह है

29 और 30 नवंबर को देशभर के किसान दिल्ली में जमा हो कर संसद तक मार्च करेंगे और कृषि संकट के सवाल पर तीन सप्ताह का विशेष संयुक्त संसदीय सत्र बुलाने की मांग करेंगे. किसान मुक्ति मार्च नाम के जुलूस का आयोजन अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति कर रही है. जून 2018 में गठित यह समिति 130 किसान संगठनों का फोरम है. इस दो दिवसीय आयोजन में एक लाख से अधिक किसानों के अलावा मिडिल क्लास की भागीदारी की आशा है. दशकों से भारतीय किसान कर्ज, सूखा और अत्महत्या की मार झेल रहा है. 2004 में सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया... Read more
नामवर सिंह

जैसे हम हैं, वैसे ही रहें: नामवर सिंह

नामवर सिंह उन साहित्यकारों में से हैं, जो लिखित के साथ-साथ वाचिक परंपरा में भी आते हैं। इस दृष्टि से वे देश के साहित्यालोचकों में अकेले हैं, जिन्होंने अपने व्याख्यानों से हिंदी क्षेत्र में आलोचनात्मक विवेक का प्रसार किया है। साथ ही हिंदी आलोचना को नई दृष्टि दी। वे वाद-विवाद और संवाद के लिए जाने जाते हैं। नामवर सिंह ने अपने जीवन के साथ-साथ साहित्य, समाज और राजनीति पर बेबाक तरीके से राय व्यक्त की है। यह बातचीत संजीव कुमार और ज्ञानेन्द्र कुमार संतोष ने की है। पढ़ें पूरी बातचीत-   सवाल- अपने आरंभिक साहित्यिक जीवन के बारे में बताएं? जवाब- बात उन दिनों की है जब मैं उदय प्रताप कॉलेज में इंटरमीडिएट की... Read more