रचनाकर्म

” जरूरी है प्रेम करते रहना ” सकारात्मकता का अनमोल दस्तावेज़ः प्रो.मंगला रानी

प्रो.मंगला रानी,  पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना । ************************************************ *********************** पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के मेरे कक्ष में एक खिलखिलाती लंबे बालों व बड़ी आँखों वाली आकर्षक युवती ने प्रवेश किया था। चार वर्ष पहले की बात है, उसने अपने चैनेल ' फुल वॉल्यूम ' के लिये मेरे एक साक्षात्कार की गुज़ारिश की थी। तभी पता लगा कि मेरे ही कैंपस के मासकॉम विभाग की गेस्टफैकल्टी हैं महिमाश्री । उम्र में मुझसे बहुत छोटी होने के बावज़ूद एक प्रगाढ़ मैत्री में जुड़ गये थे हम। सकारात्मक दृष्टिकोण,निश्छल हृदय और अनवरत कर्म इनकी खास पहचान है। कला एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से सीनियर फेलोशिप प्राप्त महिमाश्री ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता... Read more
ट्राली टाइम्स

अखबारों पर गहराता कागज का संकट

यह साबित हो चुका है कि अखबार से बढ़ कर भरोसेमंद माध्यम कोई नहीं है. इसके लिए अधिक कीमत देने में संकोच नहीं करना चाहिए आशुतोष चतुर्वेदी, प्रभातखबर शायद आपको इसकी जानकारी न हो कि देश के सभी अखबार पिछले कुछ समय में कागज के दामों में अभूतपूर्व वृद्धि के कारण संकट के दौर से गुजर रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध ने इस संकट में आग में घी का काम किया है. हम जानते हैं कि एक अखबार के लिए पाठकों का प्रेम ही उसकी बड़ी पूंजी होती है. मेरा मानना है कि अखबार किसी मालिक या संपादक का नहीं होता है, उसका मालिक तो उसका पाठक होता है. पाठक की... Read more

हिजाब मसले को राष्ट्रीय विवाद बनाने की साजिश

विराग गुप्ताः अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट  हिजाब मामले में फैसला देने वाले हाईकोर्ट जजों को धमकी मिलने के बाद सरकार ने उन्हें वाय कैटेगरी की विशेष सुरक्षा दी थी। धमकी देने वाले दो लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। लेकिन हिजाब की आड़ में सोशल मीडिया में अफवाह फैला रही बहुत सारी फेक न्यूज़-वीडियोज के प्रसार को रोकना अदालत और सरकार दोनों के लिए टेढ़ी खीर है। एक पुराने फैसले के आधार पर फेक न्यूज़ वायरल हो रही है, जिसमें बम्बई हाईकोर्ट के जज द्वारा हिजाब के हक में फैसले को सराहा जा रहा है। दूसरे फेक वीडियो में हिजाब की कथित पीआईएल पर डांट लगाते चीफ जस्टिस वकील पर प्रतिबंध... Read more
पत्रकारिता व मीडिया

देश का पारंपरिक न्यूज़ मीडिया अपने सबसे बुरे दौर में

महामारी के बाद से मीडिया उपभोक्ताओं का एक बड़ा वर्ग अख़बार नहीं खरीद रहा है. डिजिटल मीडिया से प्रतिस्पर्धा के चलते विज्ञापन दरों में क़रीब 40 फीसदी की कमी हुई है. कुछ अपवादों को छोड़ दें, तो न्यूज़ मीडिया क्षेत्र के लगभग सभी बड़े नाम ख़तरे की स्थिति से बाहर आने के लिए संघर्ष कर रहे हैं द वायर से साभार एम के वेणु का आलेख- महामारी के बाद भारतीय न्यूज़ मीडिया अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है. विज्ञापन खर्च के पैटर्न में आमूलचूल बदलाव हुए हैं क्योंकि प्रिंट और टीवी समाचारों के अग्रणी नामों के राजस्व में 35-40% की गिरावट आई है. ऐसा होना समाचार मीडिया को किसी... Read more

पिंजरा, प्रेम और प्रतिरोध संग्रह से निवेदिता की कविताएं

लखनऊ की रहने वाली निवेदिता सिंह गत 21 वर्षों से स्वतंत्र लेखन कार्य़ कर रही हैं। स्त्री विमर्श पर अक्सर सोशल मीडिया पर मुखर रहती हैं। हाल ही में उनका कविता संग्रह पिंजरा, प्रेम औऱ प्रतिरोध प्रकाशित हुआ है। उसी संग्रह से कुछ कविताएं यहां प्रस्तुत हैं।   आवारा लड़कियों तुम बहुत प्यारी लगती हो ********************************   सुनो थोड़ी बुरी लड़कियों तुम बहुत प्यारी लगती हो जब ज़माने की फ़िक्र किये बिना खिलखिलाकर हँसती हो और रख देती हो लाज और शर्म रसोई से लगे नून तेल के लिए बने ताक़ पर...   सुनो थोड़ी ज़िद्दी लड़कियों तुम बहुत प्यारी लगती हो जब चुनती हो काँटों भरी अपनी राह सोने... Read more
रवीश कुमार

रक्षित ने इस्तीफ़ा एक चैनल से नहीं गोदी मीडिया के वातावरण से दिया है

रवीश कुमारः एनडीटीवी पत्रकार ABP न्यूज़ चैनल के रक्षित सिंह के इस्तीफ़े को लेकर कल से लगातार सोच रहा हूं। रक्षित मेरठ में हो रही किसान पंचायत को कवर करने गए थे। उसी के मंच पर जाकर उन्होंने अपना इस्तीफ़ा दे दिया। इस्तीफ़े के साथ-साथ कुछ बातें भी कहीं। इस्तीफ़ा देना साधारण बात तो नहीं है। कई बार दफ़्तर में वरिष्ठ किसी के लिए घुटन की परिस्थिति बना देते हैं और कई बार कोई इस्तीफ़े को अलग रंग भी दे देता है किसी ख़ास मौक़े का लाभ उठाने के लिए। किसान आंदोलन में इस्तीफ़ा देकर रक्षित को क्या लाभ होगा? यह आंदोलन सत्ता का तो नहीं है। न ही आंदोलन... Read more

अल्का सोनी की 5 कविताएं

1) ■■ मरघटों की शांति ■■ मौन रहकर अंतर में लहू को एक उबाल दे भय दिखाती हो अगर मृत्यु तो भुजबल से उसको टाल दे सुनाई देती हो हाहाकार तो जूझकर तू कदमों को मिलाकर ताल दे बधिरों से भरी सभा में ऊंची कर आवाज़ तू मरघटों की शांति में एक बवाल दे। 2)◆◆ चूड़ियां ◆◆ हाथों में सजने से पहले मोहकता से खनकने के पहले प्रिय को रिझाने से पहले कलाइयों को अपने रंग ओ आब से दमकाने से पहले गुजरती हैं ये चूड़ियां तपते और दहकते अंगारों से, पिघलती हैं मोम सी ये और झुलसा देती हैं कितने ही बचपन. उसी ताप में जलकर चिपके रह जाते... Read more

कहानी संग्रह एक दस्तक से “उदास अगहन” कहानी

[caption id="attachment_5503" align="alignleft" width="300"] एक दस्तक कहानी संग्रह में शामिल महिला कथाकारों की सूची[/caption] सुपरिचित कथाकार जयश्री रॉय के सम्पादन में हालिया प्रकाशित कहानी संग्रह एक दस्तक चर्चा में है। मीडिया मिरर साहित्यिक शनिवार के क्रम में इस कहानी संग्रह से उपासना जी की कहानी उदास अगहन आपके लिए यहां दे रहा हैं।    दीया अनवरत जल रहा था. धीरे-धीरे आँखें कमरे की मटमैली, बेजान रौशनी की अभ्यस्त हो चुकी थीं. देवदत्त सिंह तख़्त पर चित लेटे हुए थे. वृंदा ने एक बार फिर अँधेरे में आँखें धँसा कर देखा. दीये की पीली रौशनी में मच्छरदानी की बारीक बुनाई चमक रही थी. देवदत सिंह नींद में बाएँ हाथ से बार-बार... Read more

महादेवी वर्मा की कहानी “बिंदा”

भीत-सी आँखोंवाली उस दुर्बल, छोटी और अपने-आप ही सिमटी-सी बालिका पर दृष्टि डाल कर मैंने सामने बैठे सज्जन को, उनका भरा हुआ प्रवेशपत्र लौटाते हुए कहा - 'आपने आयु ठीक नहीं भरी है। ठीक कर दीजिए, नहीं तो पीछे कठिनाई पड़ेगी।' 'नहीं, यह तो गत आषाढ़ में चौदह की हो चुकी', सुनकर मैने कुछ विस्मित भाव से अपनी उस भावी विद्यार्थिनी को अच्छी तरह देखा, जो नौ वर्षीय बालिका की सरल चंचलता से शून्य थी और चौदह वर्षीय किशोरी के सलज्ज उत्साह से अपरिचित। उसकी माता के संबंध में मेरी जिज्ञासा स्वगत न रहकर स्पष्ट प्रश्न ही बन गई होगी, क्योंकि दूसरी ओर से कुछ कुंठित उत्तर मिला - 'मेरी... Read more
अंजू

साहित्यिक शनिवार में अंजू खरबंदा के संस्मरण

संस्मरण 1. बाबू मोशाय लम्बा ऊँचा गौर वर्णीय बंगाली लड़का। पान की गिलौरी मुँह में दबाए जब बोलता तो इतनी जल्दी-जल्दी बोलता कि आधी बात उसके मुँह में ही रह जाती । ;चटर्जी भैया धीरे बोलिए न ! आपकी आधी बात तो मुझे समझ ही नहीं आई ; मैं उनकी बात न समझ पाने पर अकसर शिकायत करती । मेरी बात सुनकर फिस्स से हँस पड़ते । जब वह हँसते तो उसके गालों में गड्ढे पड़ जाते। उनकी गहरी काली आँखों पर नजर जाती तो यूँ लगता मानो वह भी खिलखिलाकर हँस रही हों....सुंदर मोहक मनभावन हँसी । मेरी बात में शिकायत का लहजा पा वह अपनी बड़ी - बड़ी... Read more