रचनाकर्म

नायपाल और अटल जी

कोई भी व्यक्ति दोषहीन नहीं होता

2 प्रसिद्ध व्यक्तियों का निधन हो गया है और उनके बारे में बहुत-सी बातें लिखी गई हैं। यह भारत में हमारी परम्परा है और विश्व भर में भी इसके बारे में बात की जाती है कि जो लोग दुनिया छोड़ जाते हैं उनके बारे में केवल अच्छी बातें की जाएं। मगर कोई भी व्यक्ति दोषहीन नहीं होता और ईमानदारी से कहें तो यह बात हम खुद पर भी लागू कर सकते हैं।    इसी भावना से हम इन दो व्यक्तियों के जीवन के कुछ पहलुओं पर नजर डालते हैं जो हमसे बिछुड़ गए हैं। इनमें से अधिक रुचिकर हैं लेखक वी.एस. नायपॉल। उनका पहला नाम विद्याधर था और वह त्रिनिदाद... Read more
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वो अश्लील! कविताएं जिन्होंने आजकल हिंदी पट्टी में मचा रखा है बवाल

वर्ष 2018 को गुदावर्ष घोषित कर दो’ अंबर पांडेय और मोनिका कुमार की कविता-शृंखला :: अंबर पांडेय की कविताएँ मेरी प्रेमिका के गुदास्थान का विवरण रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए मैं इसे नहीं लिखना चाहता। अपनी प्रेमिका को यह लिखकर मैं अचंभित भी नहीं करना चाहता क्योंकि अचंभा कोई ऐसा मनोभाव नहीं जिस पर प्रेमी का एकाधिकार हो—जिस तरह उसके गुदास्थान पर मेरा अधिकार है। साहित्य के आलोचकों को चौंका देने के लिए भी मैं यह नहीं लिखना चाहता। गुदास्थान पर लिखने में समस्याएँ भी बहुत हैं, ख़ासतौर पर तब जब इसे लिखने वाला मुझ जैसा कोई धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति हो। अधिकतर बिंब खाद्य पदार्थ या धर्म संबंधित... Read more
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सम्पादक आत्महत्या मामलाः आरोप की परिभाषा दोषी होना नहीं है

एडीटर अटैक-    एक स्त्री। जो एक छोटे बच्चे की मां भी है और तलाकशुदा भी। सारे रिश्ते नाते बिखर चुके हैं और अब माथे पर एक नामी गिरामी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। आरोप, आरोप होता है। आरोप की परिभाषा दोषी होना नहीं है। किसी आरोपी को दोषी सिद्ध करना प्रथम दृष्टया अदालत का काम है। मीडिया और हम किसी आरोपी को अदालत से पहले ही दोषी क्यों मान लें। आरोपी जिसे हमें ज़लील करते हैं, मीडिया चटखारे ले लेकर मसालेदार खबरें करता है, वही आरोपी जब अदालत से दोषमुक्त हो जाता है, तो उस आरोपी की छविभंजन के दोषी कौन लोग होंगे और उनकी... Read more
अमीष देवगन

कोई ऑन डिबेट पत्रकार को दलाल बोले तो चिंतन की दरकार है

[caption id="attachment_3639" align="alignleft" width="154"] प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर[/caption] एडीटर अटैकः प्रशांत राजावत , सम्पादक मीडिया मिरर   -  मेरे घर में टीवी नहीं है औऱ होती भी तब भी न्यूज चैनल नहीं ही देखता। इसलिए मुझे बहुत बेहतर तरीके से पता नहीं पर शायद पिछले दिनो एक कांग्रेस प्रवक्ता ने लाइव शो के दौरान जिस टीवी एंकर को भड़वा औव दलाल कहा वो शायद न्यूज 18 के हैं। नाम है अमीष देवगन। नाम और मामला क्लियर है मुझे। मैंने यूट्यूब पर पूरा वीडियो देखा जिसमें अमीष को कांग्रेस प्रवक्ता दमदारी से भड़वा और दलाल कह रहे हैं। ये कैसा दौर है जब हम पत्रकारों को हमारे ही संस्थान में... Read more
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हम पत्रकार हैं, केवल महिला पत्रकार नहीं

हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ एक मुलाकात के लिए इंडिया इंटरनैशनल सैंटर में आयोजित अत्यंत गोपनीय कार्यक्रम में 50 से अधिक  महिला पत्रकारों को आमंत्रित किया गया। कांग्रेस को गोपनीयता पसंद है और हैरानी की बात है कि महिला पत्रकारों को भी यह पसंद है। अब विवाद इस बात को लेकर है कि किसे आमंत्रित किया गया और किसे नहीं तथा किसने इस चुनिंदा बातचीत को आयोजित करने में सहायता की। क्या यह इंडियन वूमैन्स प्रैस कॉप्र्स (आई.डब्ल्यू.पी.सी.)थी? यदि ऐसा था तो क्यों नहीं इसका आयोजन संगठन के कार्यालय में किया गया और सभी सदस्यों के लिए इसे खुला रखा गया? क्यों केवल कुछ सदस्यों को... Read more
चारूल मलिक

ये एंकरिंग नहीं आसान…!!

इंडिया टीवी की मुंबई एंकर चारुल मलिक ने एंकर्स के लिए एक कविता लिखी है। आप भी पढ़िए।   कौन नहीं चाहता एंकर बनना ये मेरा भी ख़्वाब था , जब मैं पाँच साल की थी तब से टीवी लगता बहुत लाजवाब था ! स्कूल में आए तो असेम्बली में न्यूज़ रीड की हर कॉम्पिटीशन में सबसे आगे रही , फ़र्स्ट प्राइज़ से नीचे कुछ लगता नहीं था अच्छा जानता था स्कूल का बच्चा-बच्चा ! पेरेंट्स ने सिखाया, पेरेंट्स ने बनाया फिर मेहनत और डेडिकेशन ने सफलता का तड़का लगाया ! ये एंकरिंग नहीं है आसान रोज़ मेकअप करना पड़ता है , हमेशा स्माइल करते और एनर्जेटिक रहना पड़ता है... Read more
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प्रतिदिन हुजुर ! पत्रकार आपके लिए ही काम करते हैं..

यह कहना बड़ा आसान है, मीडिया बिका हुआ है | उससे अधिक आसान यह कहना है कि मीडिया ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ दिया और बात कह कर पलटने वालों के लिए सबसे आसान है मीडिया पर नासमझी का आरोप लगाना | पत्रकार यह सब सहन करते हैं और भारत में सबसे ज्यादा सहन करते हैं | ऐसा क्यों होता हैं ? क्योंकि भारत में पत्रकारों के मालिक यानि आप, उनके साथ खड़े नहीं होते | विश्व के अन्य देशों की तरह भारत के पत्रकार अपना मालिक आम जनता को मानते हैं, क्योंकि वे मूलतः समाज लिए ही काम करते हैं, जो शोषित और दबा हुआ, प्राथमिकता है | अख़बार निकालने... Read more
राजेश बादल, वरिष्ठ पत्रकार

नए विषयों पर चैनलों का ध्यान क्यों नहीं जाता ?

वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल का आलेख। बादल जी मध्यप्रदेश से हैं। हाल ही में राज्यसभा टीवी के निदेशक पद से मुक्त हुए हैं।  हमारे समाज में हर व्यक्ति न तो गहराई से राजनीति समझता है न परदे के पीछे की राजनीति और न परदे पर हर राजनीतिक ख़बर देखने में उसकी दिलचस्पी होती है | ठीक वैसे ही ,जैसे स्पोर्ट्स और बिजनेस की ख़बरें हर दर्शक या रेडियो का श्रोता या अख़बार का पाठक पसंद नहीं करता | अपनी अपनी चाहत है | लेकिन इस स्थापित तथ्य पर हमारे मीडिया हाउस चलाने वाले शायद ध्यान नहीं देना चाहते | आप देखिए रोज़ ही एक ही विषय घूम फिरकर सारे चैनलों... Read more
अभिनेता इरफान खान

कैंसर से जूझ रहे अभिनेता इरफान खान का आत्मबोध कराता पत्र…

अभिनेता इरफान खान का पत्र... कुछ महीने पहले अचानक मुझे पता चला था कि मैं न्यूरोएंडोक्रिन कैंसर से ग्रस्त हूं. मैंने पहली बार यह शब्द सुना था. खोजने पर मैंने पाया कि इस शब्द पर बहुत ज्यादा शोध नहीं हुए हैं. क्योंकि यह एक दुर्लभ शारीरिक अवस्था का नाम है और इस वजह से इसके उपचार की अनिश्चितता ज्यादा है. अभी तक अपने सफ़र में मैं तेज़-मंद गति से चलता चला जा रहा था ... मेरे साथ मेरी योजनाएं, आकांक्षाएं, सपने और मंजिलें थीं. मैं इनमें लीन बढ़ा जा रहा था कि अचानक टीसी ने पीठ पर टैप किया, ’आप का स्टेशन आ रहा है, प्लीज उतर जाएं।’ मेरी समझ... Read more
कोबरा पोस्ट

क्या अब मीडिया के ज़रिये साज़िशें भी कराई जा सकती हैं

कोबरापोस्ट का ताज़ा स्टिंग ऑपरेशन मीडिया की ऐसी शर्मनाक पतन गाथा है, जो देश के लोकतंत्र के लिए वाक़ई बहुत बड़े ख़तरे की घंटी है. कथित स्टिंग ऑपरेशन की जो सबसे ज़्यादा गंभीर, सबसे ज़्यादा चिन्ताजनक बात है, वो यह कि पैसे के लिए मीडिया कंपनियों को किसी गंदी से गंदी साज़िश में भी शरीक होने से हिचक नहीं है, चाहे यह साज़िश देश और लोकतंत्र के विरुद्ध ही क्यों न हो! स्टिंग करनेवाला रिपोर्टर खुल कर यह बात रखता है कि वह चुनावों के पहले देश में किस तरह का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराना चाहता है, और किस तरह विपक्ष के बड़े नेताओं की छवि बिगाड़ना चाहता है. ये बात... Read more