रचनाकर्म

बीबीसी

एक कश्मीरी लड़की की पाँच दिन की डायरी

मिसबाह रेशीछात्रा, दिल्ली विश्वविद्यालय फ़ेक न्यूज़ की ताक़त और उसके प्रसार का अंदाज़ा तभी होता है जब आप संघर्ष वाले इलाक़े में हों, जहां हिंसा और विश्वासघात दोनों हो रहे हों, तब आपको किसी सूचना के सही होने पर भी विश्वास नहीं होता. शुक्रवार से सोमवार शाम तक हम अलग-अलग लोगों से कश्मीर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाने और यात्रियों-ग़ैर-कश्मीरियों से कश्मीर छोड़ने की अपील की अलग-अलग वजहें सुन रहे थे. लेकिन हमें कोई जानकारी नहीं थी. कुछ लोग यह कह रहे थे कि राज्य को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है. कश्मीर को केंद्र प्रशासित प्रदेश बनाया जा सकता है, जम्मू को राज्य का दर्जा दिया... Read more
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय

सरकार क्या बदली सरकार ही बन गए माखनलाल के ठाकुर साब

एडीटर अटैकः प्रशांत राजावत   मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से उड़ती उड़ती नहीं बल्कि चलती फिरती खबरें आ रही हैं कि वहां के माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के एक ठाकुर साब प्रदेश में सरकार बदलते ही खुद सरकार बन बैठे हैं। सच है कि उन्हें बड़े पद से सरकार ने नवाजा है और वरिष्ठ अध्यापक हैं लेकिन ऐसे थोड़े न होता है..ठाकुर साब दिग्विजय सिंह और कमलनाथ से तो नीचे बात ही नहीं करते। ऐसी चलती फिरती खबरें हैं। हालांकि संघ काल में ये उपेक्षित महसूस कर रहे थे लेकिन उपेक्षित न थे। अब ये सर्वशक्तिमान की तरह दिख रहे हैं। कभी कभी तो कुलपति पर भी हावी हो जाते... Read more
कार्टून बीबीसी से

राजसत्ता पत्रकारिता से क्यों डर रही है?

रामशरण जोशी, वरिष्ठ पत्रकार लगता है, राजसत्ता के कर्ताधर्ताओं ने लोकतांत्रिक राज्य के चौथे स्तंभ मीडिया को सबक़ सिखाने की ठान रखी है. देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश की पुलिस ने दिल्ली-नोएडा क्षेत्र से तीन मीडिया कर्मियों को गिरफ़्तार किया. उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. और एक पत्रकार के ख़िलाफ़ उत्तरप्रदेश में ही एफ़आईआर दर्ज करा दी गई है. देश के संपादकों की सबसे बड़ी संस्था 'एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया' ने गिरफ़्तारियों की कड़ी निंदा की है और पुलिस की कार्रवाई को क़ानून का निरकुंश दुरूपयोग क़रार दिया है. मुख़्तसर से, इन पत्रकारों का अपराध यह है कि इन्होनें महंत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ... Read more
दैनिक जागरण

कठुआ केस में दैनिक जागरण को बरी कौन करेगा?

एडीटर अटैकः    दैनिक जागरण को अब तो अपने पाठकों से इस मुख्य खबर के लिए माफी मांग लेनी चाहिए। अखबार में वैसी ही प्रमुख जगह पर और पहला सम्पादकीय लिखकर। अपनी गलतियों के लिए माफी मांगने में हिचकना नहीं चाहिए। किसी को भी नहीं ः सत्यानंद निरूपम, सम्पादक, राजकमल प्रकाशन    कल कठुआ मामले पर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। गौरतलब है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म औऱ हत्या के जिस मामले को बेहद संगीन मानते हुए कोर्ट ने कल फैसला दिया है उसको भारत के सबसे ज्यादा बिकने वाले हिंदी अखबार दैनिक जागरण ने नकार दिया था। दैनिक जागरण ने पहले... Read more
गिरीश कर्नाड

बहुमुखी प्रतिभा और संकल्प का धनी अनूठा कलाकार

महान रंगकर्मी, फिल्मकार और अभिनेता गिरीश कर्नाड का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे भारत के एकमात्र व्यक्ति थे, जिन्हें अमेरिका से भारत में हिंसा विषय पर शोध करने के लिए धन उपलब्ध कराया गया था। उन्हें रोड्स स्कॉलरशिप मिली थी। उनका नाटक ‘हयवदन’ यह रेखांकित करता है कि जीवन में संपूर्णता की खोज एक महान आदर्श है परंतु यथार्थ यह है कि हम सब आधे अधूरे लोग हैं। एक कवि और पहलवान में गहरी मित्रता है परंतु एक ही स्त्री से प्रेम के कारण वे प्रतिद्वंद्वी हो जाते हैं। बियाबान में एक मंदिर के सामने वे एक-दूसरे से लड़ते हैं और दोनों के सिर धड़ से... Read more
‘टाइम’ कवर- मोदी,

‘टाइम’ मैगजीन, तुम पत्रकारिता कर रहे हो या दलाली?

गिरीश उपाध्‍याय  वैसे तो इस विषय पर कल यानी 30 मई को ही लिखा जाना चाहिए था जिस दिन ‘हिन्‍दी पत्रकारिता’ दिवस मनाया जाता है, लेकिन देर आयद दुरुस्‍त आयद। एक दिन बाद लिखने से भी विषय के महत्‍व और उसकी प्रासंगिकता पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। क्‍योंकि पत्रकारिता से जुड़ा यह मामला ही ऐसा है जिस पर सिर्फ एक खास दिन तो क्‍या, चौबीसों घंटे सोचा जाना चाहिए। प्रसंग अमेरिका से प्रकाशित होने वाली दुनिया की सबसे चर्चित पत्रिका ‘टाइम’ से जुड़ा है। आपको याद होगा भारत में जब चुनाव चल रहे थे तब मई के अंक में इस पत्रिका ने अपने एशिया एडिशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी... Read more
अर्नब गोस्वामी

अर्णब का दौड़ना चैनलों की अंतहीन पीड़ा से मुक्ति की पुकार

रवीश कुमारः पत्रकार एनडीटीवी विशालकाय सेट पर अर्णब का दौड़ना चैनलों की अंतहीन पीड़ा से मुक्ति की पुकार है। कुणाल कामरा की टीम का एक वीडियो व्हाट्स एप पर आया। इस वीडियो में हमारे पूर्व सीनियर और एडिटर अर्णब गोस्वामी दौड़ते हुए टीवी के सेट पर आ रहे हैं। उनके पीछे दो और मेहमान दौड़ते हुए आ रहे हैं जिन्हें एग्ज़िट पोल के कार्यक्रम में बोलना है। अर्णब दोनों से आगे दौड़ रहे हैं। उन्हें भागते देख लगा कि हम जैसे मोटे-झोटे एंकर तो बीच मे ही दांत चियार देते। मुंह से झाग फेंक देता। मगर अर्णब ख़ूब दौड़ रहे हैं। थोड़ी देर के लिए कैमरे के सामने रूकते हैं... Read more
रवीश कुमार

क्या 2019 के चुनाव में मैं भी हार गया हूंः रवीश कुमार

रवीश कुमार, प्रबंध सम्पादक, एनडीटीवी  23 मई 2019 के दिन जब नतीजे आ रहे थे, मेरे व्हाट्स एप पर तीन तरह के मेसेज आ रहे थे। अभी दो तरह के मेसेज की बात करूंगा और आख़िर में तीसरे प्रकार के मेसेज की। बहुत सारे मेसेज ऐसे थे कि आज देखते हैं कि रवीश कुमार की सूजी है या नहीं। उसका चेहरा मुरझाया है या नहीं। एक ने लिखा कि वह रवीश कुमार को ज़लील होते देखना चाहता है। डूब कर मर जाना देखना चाहता है। पंचर बनाते हुए देखना चाहता है। किसी ने पूछा कि बर्नोल की ट्यूब है या भिजवा दें। किसी ने भेजा कि अपने शक्ल की तस्वीर... Read more
ओम थानवी, वरिष्ठ पत्रकार

मेरा गिला अपनी ही बिरादरी से हैः ओम थानवी

लोग पूछते हैं, राजग को प्रचंड जनादेश मिला है। आप अब भी आलोचक क्यों हैं? कोई बताए कि क्या जनादेश आलोचना का हक़ छीन लेता है? मेरा गिला राजनेताओं से उतना नहीं, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों की अपनी ही बिरादरी से है। आपको याद होगा, जब पत्रकार मोदी के गिर्द सेल्फ़ी के लिए झूमने लगे, उनकी कितनी फ़ज़ीहत हुई थी। पर आज घर बैठे जयकारे लगाने में भी उन्हें (या साथियों को) कोई झिझक नहीं। किसे शक कि मोदी की वक्तृता बहुत लोक-लुभावन है। लिंग-दोष के बावजूद शब्दों और अभिव्यक्ति के हुनर पर उनका अधिकार है। उनका आत्मविश्वास और बढ़ा है। मगर साथ में अहंकार भी: "मोदी ही मोदी का चैलेंजर (चुनौती)... Read more
नरेंद्र मोदी

गैंग है तो मोदी का मीडिया सिस्टम है

रवीश कुमार की कलम से-  ख़ान मार्केट गैंग नहीं है, गैंग है तो मोदी का मीडिया सिस्टम है जगह-जगह पहली बार पहुंचने का इतिहास बनाने के शौक़ीन प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पार्टी के मुख्यालय में ही पहली बार का इतिहास बना दिया। प्रधानमंत्री के नाम पर हुई प्रेस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री ने एक भी सवालों का जवाब नहीं दिया। यह पहली बार हुआ है। यह भी पहली बार हुआ कि दर्शकों ने प्रधानमंत्री मोदी को 22 मिनट तक चुप देखा और 22 मिनट तक दूसरे को सुनते देखा। अमित शाह 22 मिनट तक बोलते गए। लगा कि अमित शाह जल्दी माइक प्रधानमंत्री को सौंप देंगे और सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू... Read more