रचनाकर्म

कहानी संग्रह एक दस्तक से “उदास अगहन” कहानी

[caption id="attachment_5503" align="alignleft" width="300"] एक दस्तक कहानी संग्रह में शामिल महिला कथाकारों की सूची[/caption] सुपरिचित कथाकार जयश्री रॉय के सम्पादन में हालिया प्रकाशित कहानी संग्रह एक दस्तक चर्चा में है। मीडिया मिरर साहित्यिक शनिवार के क्रम में इस कहानी संग्रह से उपासना जी की कहानी उदास अगहन आपके लिए यहां दे रहा हैं।    दीया अनवरत जल रहा था. धीरे-धीरे आँखें कमरे की मटमैली, बेजान रौशनी की अभ्यस्त हो चुकी थीं. देवदत्त सिंह तख़्त पर चित लेटे हुए थे. वृंदा ने एक बार फिर अँधेरे में आँखें धँसा कर देखा. दीये की पीली रौशनी में मच्छरदानी की बारीक बुनाई चमक रही थी. देवदत सिंह नींद में बाएँ हाथ से बार-बार... Read more

महादेवी वर्मा की कहानी “बिंदा”

भीत-सी आँखोंवाली उस दुर्बल, छोटी और अपने-आप ही सिमटी-सी बालिका पर दृष्टि डाल कर मैंने सामने बैठे सज्जन को, उनका भरा हुआ प्रवेशपत्र लौटाते हुए कहा - 'आपने आयु ठीक नहीं भरी है। ठीक कर दीजिए, नहीं तो पीछे कठिनाई पड़ेगी।' 'नहीं, यह तो गत आषाढ़ में चौदह की हो चुकी', सुनकर मैने कुछ विस्मित भाव से अपनी उस भावी विद्यार्थिनी को अच्छी तरह देखा, जो नौ वर्षीय बालिका की सरल चंचलता से शून्य थी और चौदह वर्षीय किशोरी के सलज्ज उत्साह से अपरिचित। उसकी माता के संबंध में मेरी जिज्ञासा स्वगत न रहकर स्पष्ट प्रश्न ही बन गई होगी, क्योंकि दूसरी ओर से कुछ कुंठित उत्तर मिला - 'मेरी... Read more
अंजू

साहित्यिक शनिवार में अंजू खरबंदा के संस्मरण

संस्मरण 1. बाबू मोशाय लम्बा ऊँचा गौर वर्णीय बंगाली लड़का। पान की गिलौरी मुँह में दबाए जब बोलता तो इतनी जल्दी-जल्दी बोलता कि आधी बात उसके मुँह में ही रह जाती । ;चटर्जी भैया धीरे बोलिए न ! आपकी आधी बात तो मुझे समझ ही नहीं आई ; मैं उनकी बात न समझ पाने पर अकसर शिकायत करती । मेरी बात सुनकर फिस्स से हँस पड़ते । जब वह हँसते तो उसके गालों में गड्ढे पड़ जाते। उनकी गहरी काली आँखों पर नजर जाती तो यूँ लगता मानो वह भी खिलखिलाकर हँस रही हों....सुंदर मोहक मनभावन हँसी । मेरी बात में शिकायत का लहजा पा वह अपनी बड़ी - बड़ी... Read more
चित्रा मुद्गल

कादंबिनी और नंदन बंद होना लज्जा की बातः चित्रा मुद्गल

जानी मानी लेखिका चित्रा मुदगल के विचार देश के करोड़ों-करोड़ों हिंदी बोलने, पढ़ने, लिखने वालों के होते हुए कादंबिनी और नंदन का बंद होना बेहद-बेहद लज्जा की बात है और विराट हिंदी पट्टी से आत्मविश्लेषण कि मांग करता है कि जो कुछ हुआ, वह क्यों हुआ और क्यों नहीं होना चाहिए था और इसके लिए क्या हिंदी पट्टी के अंतर्विरोधी हिंदी प्रेम को प्रश्नांकित नहीं किया जाना चाहिए ? इस प्रश्न को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि व्यवस्थापक हिंदी विरोधी हो रहे हैं। उनकी दिलचस्पी उनके द्वारा प्रकाशित साहित्यिक हिंदी पत्र- पत्रिकाओं से उचट गयी है, या उचट रही है। इसके पूर्व इसी संस्थान से प्रकाशित साहित्य की अत्यंत... Read more

“कंगना” बीजेपी पहन पाएगी?

त्वरित टिप्पणीः डॉ प्रशांत राजावत कंगना रनौत आजकल अभिनय से ज्यादा अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहती हैं। इसका मतलब है कि अभिनय पर अब उनका नया औतार हावी है। उनकी पिछली कुछ फिल्में भी चर्चित नहीं रहीं। जिनमें पंगा, जजमेंटल है क्या आदि रहीं।  उनके अभिनय की सुर्खियां नहीं बनतीं अब, उनके विवाद मीडिया में छाए रहते हैं। कंगना रनौत। कौन। हिमाचल की एक छोटे से जगह की खूबसूरत पहाड़ी लड़की, जिसके सपनों का हीरो ह्रितिक था और सपना बॉलीवुड में जगह बनाना। उन्होंने दोनों को ही पाया और शिद्दत से। लेकिन दोनों से ही उन्होंने बगावत भी खूब की। ह्रितिक को जीभर के प्यार किया तो खुले... Read more

साहित्यिक शनिवार में डॉ. नीरज सुधांशु की लघुकथाएं

डॉ. नीरज सुधांशु बिजनौर उत्तरप्रदेश की रहने वाली हैं। प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। चिकित्सकीय कार्य के साथ साहित्यकार भी हैं। उनकी कुछ लघुकथाएं यहां प्रस्तुत हैं। उनका विस्तृत परिचय भी यहां संलग्न है।    दबे पाँव उनका शरीर जैसे अपनी ही धुरी पर घूम रहा था। अधमुंदी आँखों से हर तस्वीर चलती हुयी धुंधली-सी दिखायी दे रही थी। थोड़ी देर पहले ही एन्जियोग्रापफी के बाद वर्मा जी को रूम में शिफ्ट किया गया था। वे अभी भी हल्के नशे की गिरफ्त में थे। नज़र अभी किसी एक जगह नहीं टिक पा रही थी। सामने वाली दीवार पर एक  छिपकली चल रही थी, वो उस पर नज़र जमाने की असफल... Read more

साहित्यिक शनिवार में कवि सुभाष नीरव की कविताएं

सुभाष नीरव की कुछ कविताएं सद्य प्रकाशित कविता संग्रह ;बिन पानी समंदर; से… श्री नीरव जाने कवि, कथाकार और अनुवादक हैं। दिल्ली रहते हैं। उनका विस्तृत परिचय यहां कविताओं के अंत में उल्लेखित किया गया है। उनके कविता संग्रह से ये खूबसूरत कविताएं प्रस्तुत हैं।    1 बरसों बाद बरसों बाद कोई करीब आकर बैठा सर्दियों की गुनगुनी धूप-सा बरसों बाद किसी ने यूँ हल्के से छुआ जैसे छूती है हवा हौले से सिहरन दौड़ाती देह में बरसों बाद यूँ साझे किये अपने दो बोल किसी ने जैसे घर की मुंडेर पर आकर करती है चिड़िया बरसों बाद खुशबुओं के सरोवर में उतरा हूँ डूब जाने के लिए ! 2... Read more

नंदन और कादम्बिनी कि विदाई में आप कितने जिम्मेदार?

त्वरित टिप्पणीः डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर   हिंदुस्तान टाइम्स समूह की दो पत्रिकाएं क्रमशः नंदन (बाल पत्रिका) व कादम्बिनी (साहित्य पत्रिका) के जैसे ही कल बंद होने की खबर आई। सोशल साइट्स में लगातार लोग इन पत्रिकाओं से जुड़ी अपनी यादें साझा करने लगे। कुछ लोग प्रकाशन बंद करने के निर्णय को कोसने लगे। कुछ कहने लगे कि ऐसा नहीं करना चाहिए था। ज्यादा लोग दुख व्यक्त कर रहे थे कि इन दोनों पत्रिकाओं को चलना था। काफी पुराना संग रहा है लोगों का इन पत्रिकाओं से। कादम्बिनी 1960 तो वहीं नंदन 1964 से अनवरत प्रकाशित हो रही है। प्रकाशन बंद होने को पाठकों ने, लेखकों, पत्रकारों आदि ने... Read more

‘कादम्बिनी ‘ आखिर लाकडाउन की बलि चढ़ा दी गई- बाल पत्रिका ‘ नंदन’ के साथ

- विष्णु नागर, लेखक व पत्रकार  साठ साल का सफर पूरा कर 'कादम्बिनी ' आखिर लाकडाउन की बलि चढ़ा दी गई- बाल पत्रिका ' नंदन' के साथ। ' कादम्बिनी ' से हालांकि मेरा संबंध बारह साल पहले ही छूट गया था और अब वह पत्रिका मुझे भेजा जाना भी बंद हो चुका था मगर उसके अतीत से पहले पाठक के रूप में और बाद में उसके संपादक के समकक्ष जिम्मेदारी संभाल चुकने के कारण उससे एक लगाव था ,इसलिए यह खबर मेरे लिए भी दुखद है।टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की राह पर देर से ही सही, हिंदुस्तान टाइम्स समूह भी आ गया।कादम्बिनी प्रबंधन की उपेक्षा का शिकार तो मेरे कार्यकाल... Read more
अल्पना

साहित्यिक शनिवार में अल्पना सुहासिनी की ग़ज़लें

परिचय--  नाम- डॉ. अल्पना सुहासिनी शिक्षा-बी.ए. ऑनर्स (हिन्दी),  एम.ए. हिन्दी, पी.एच.डी.(हिन्दी) पता - राजनगर एक्सटेंशन, गाजियाबाद. मेल आई डी - 2011alpana@gmail.com सम्प्रति -  भूतपूर्व मे दैनिक भास्कर अखबार में उपसम्पादक, फिलवक्त- आकाशवाणी हिसार में आकस्मिक उद्घोषिका, दूरदर्शन हिसार में एंकर साथ ही अनेक राष्ट्रीय साँस्कृतिक साहित्यिक मंचों का संचालन एवम कविता-पाठ,  अंतर्राष्टीय फिल्म फेस्टिवल हरियाणा मे मंच-संचालन, राष्ट्रीय थियेटर फेस्टिवल में  मंच-संचालन। ज़ी न्यूज़,  इँडिया न्यूज़, दूरदर्शन दिल्ली आदि सहित कई टी.वी चैनलों से काव्य-पाठ ग़ज़लें 1.सितारा अपना बलंदी पे जगमगाएगा, कभी तो ऐसा हमारा भी वक़्त आएगा। सुनोगे जब भी कहीं कोई गीत उल्फ़त का, तुम्हारा दिल भी मेरे नग़्मे गुनगुनाएगा । कहीं पे बात चलेगी कभी मुहब्बत की, हरेक... Read more