रचनाकर्म

भारत-नेपाल संबन्ध और मीडिया की भूमिका

एडीटर अटैकः डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर   मैं छः सात दिन पहले जी न्यूज के सम्पादक सुधीर चौधरी का ट्वीट पढ़ रहा था जिसमें उन्होंने लिखा था कि नेपाल तो हमारे चैनलों से ही डर गया, भारत जब सामने आएगा तो क्या होगा। सुधीर चौधरी की ये टिप्पणी नेपाल में भारतीय चैनलों के प्रसारण प्रतिबंध पर थी। मामला दरअसल ये है कि कुछ भारतीय निजी चैनलों ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और चीनी महिला राजदूत होउ यांकी मामले में मसालेदार खबरें चलाईं। एक चैनल ने दोनों के संबंधों को हनीट्रेप से जोड़ कर बताया। इसके बाद नेपाल में भारतीय चैनलों के प्रसारण को बैन कर दिया... Read more

फाटन की गोली ले लो साहब…

[caption id="attachment_5154" align="alignleft" width="253"] जानवरों के प्रति मनुष्य की क्रूरता को दर्शाता एक चित्र[/caption] एडीटर अटैक- डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर   मुझे याद है मैं उत्तरप्रदेश के चित्रकूटधाम कर्वी स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने के लिए बैठा था। वहां कुछ आदिवासी जनजाति के लोग कुछ ऐसा बड़बड़ाते हुए निकल रहे थे कि फाटन की गोली ले लो साहब.. जैसे आमतौर पर रेलवे स्टेशनों में लोग तमाम दूसरी चीजें बेंचते हैं। मुझे वैसा ही लगा। महानगरीय स्टेशनों की अपेक्षा कर्वी बेहद छोटा और कह सकते हैं जंगल से जुड़ा स्टेशन है। आपसपास पहाड़ियां औऱ घने जंगल हैं। मैंने आवाज सुनकर सोचा कि कोई खाने पीने की ही वस्तु होगी जिसे... Read more
डीडी न्यूज

पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं कैसे दूं…

एडीटर अटैक-डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक, मीडिया मिरर pratap.prashant@rediffmail.com उमंग, उल्लास और उत्साह का तो ये दौर ही नहीं है। फिर भला शुभकामनाओं की बात कैसे हो भला। मुझे आश्चर्य़ है इन हालातों में कैसे कोई पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं दे सकेगा औऱ कैसे कोई ले सकेगा। जब पत्रकार आज जिंदगी औऱ रोटी के बीच झूल रहे हैं। उन्हें दो में से किसी एक को चुनना है और वो क्या चुनेंगे। हम सब जानते हैं। सूचना मिल रही है कि कल हिंदुस्तान पटना का टैबलॉयड स्मार्ट युवा बंद कर दिया गया है। औऱ वो भी हमेशा के लिए। इस टैबलायड से जुड़े दर्जनभर पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया... Read more
विद्यादर्शन

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेषः क्यों बचेंगे अखबार

उमेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार एवं सलाहकार आकाशवाणी दिल्ली सामाजिक हो या राजनीतिक या फिर आर्थिक व्यवस्था, समूचे तंत्र और सोच पर कोरोना संकट का प्रभाव परिलक्षित हो रहा है। ऐसे में मीडिया भला कैसे अछूता रहता! कोरोना संकट ने निश्चित तौर पर अखबारों के प्रसार पर असर डाला है, लिहाजा अखबारों की कमाई भी घटी है और उनके पृष्ठ भी। इसकी वजह से एक वर्ग मानने लगा है कि अब अखबार खत्म हो जाएंगे। यह भी कहा जाने लगा है कि संकट की इस घड़ी से अखबारों का निकल पाना मुश्किल होगा, लिहाजा वे बिखर जाएंगे और हो सकता है कि आस्ट्रेलिया के विद्वान रोस डाउसन के मुताबिक अखबारों की... Read more

मीडिया में महासंकटः पत्रकारों का बुरा दौर शुरू

एडीटर अटैकः  डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर pratap.prashant@rediffmail.com   अभी थोड़ी ही देर पहले टॉइम्स ऑफ इंडिया समूह के सम्पादक स्तर के एक वरिष्ठ पत्रकार मित्र से बात हो रही थी। बेहद डरे हुए थे। उनकी बातचीत से ऐसा जान पड़ रहा था कि सबकुछ ठीक नहीं है। कह रहे थे हमारे समूह में सबसे पहले पत्रकारों व अन्य विभागों के कर्मचारियों की सैलरी में कटौती की गई। फिर छंटनी की गई। अबतक तकरीबन सौ लोगों को समूह ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। लेकिन अब जो धमाका हुआ है वो न सिर्फ टाइम्स समूह के लिए अपितु समूचे मीडिया जगत के लिए चिंता का सबब है। टाइम्स... Read more
द वायर के सम्पादक सिद्धार्थ वरदराजन

द वायर के 5 साला होने पर जाने-माने पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन का कहा पढ़ा जाए

द हिंदू अंग्रेजी दैनिक के सम्पादक रहे प्रसिद्ध पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन ने ठीक आज से 5 साल पहले स्वतंत्र रूप से डिजिटल मीडिया में प्रवेश किया, उन्होंने न्यूज वेबसाइट द वायर की स्थापना की। आज वो वेबसाइट तीन भाषाओं में संचालित हो रही है। बहुत कम संसाधनों और कम मैन पावर छोटी से जगह में शुरू हुई इस वेबसाइट ने न सिर्फ देश में नाम कमाया बल्कि विदेशों में इसकी समान रूप से ख्याति है। भारत में जब इलेक्ट्रानिक मीडिया, प्रिंट मीडिया के साथ हजारों लाखों वेबसाइट हैं, वहां द वायर का स्थापित हो जाना उतना आसान नहीं था। मुझे इन पांच सालों में पत्रकारिता का कोई बड़ा कारनामा अगर... Read more
स्त्री

ब्वायज लाकर रूम-2ः बरसों से मैंने दुपट्टा डाले लड़की नहीं देखी…

डॉ प्रशांत राजावत..सम्पादक मीडिया मिरर ब्वायज लॉकर रूम की ये दूसरी कड़ी है। आपको बता दें कि ब्वायज लाकर रूम सोशल साइट इंस्टाग्राम पर टीनएज  छात्र-छात्राओं का एक समूह है जिसमें दिल्ली के प्रतिष्ठित स्कूल के तकरीबन 20 से ज्यादा छात्र छात्राएं जुड़े थे। ये सब यहां अश्लील बातें करते थे, अश्लील तस्वीरें साझा करते थे। मामला तब प्रकाश में आया जब समूह के एक छात्र ने समूह की एक लड़की की अश्लील तस्वीर इस ग्रुप में पोस्ट करते हुए लिखा कि इससे रेप कैसे हो सकता है। लड़की ने आपत्ति जताई। मामला पुलिस औऱ महिला आयोग पहुंचा। पुलिस की सायबर सेल हरकत में आई। केस दर्ज हुआ। ग्रुप बंद... Read more

बॉयज लाकर रूमः बच्चों की करतूतों पर नजर ऱखिए वरना देर न हो जाए

लेखक- डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर    बॉयज लाकर रूम। ये तीन शब्द तीन दिन पहले ही चर्चा में आए और एक प्रश्नचिंह छोड़ गए। समाज के लिए, शिक्षकों के लिए, अभिभावकों के लिए। दरअसल बॉयज लाकर रूम इंस्टाग्राम पर एक समूह है जिसे दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल के 18 वर्ष से कम आयु के छात्र-छात्राओं ने बनाया था। जिसमें ये छात्र छात्राएं अश्लील बातें करते थे। पोल तब खुली जब एक छात्र ने एक लड़की की अश्लील तस्वीर पोस्ट कर दी और कमेंट किया कि रेप कैसे किया जा सकता है। विरोध में पीड़ित लड़की ने स्क्रीन शॉट लेकर सोशल मीडिया में जारी किए, आपत्ति दर्ज कराई... Read more
लेखक

बिना आवाज की ताली रचना की प्रस्तुति द्वारा डॉ सच्चिदानंद जोशी

https://youtu.be/1n8DE95_fl8   बिना आवाज़ की ताली : हम सब #covid19 के प्रकोप से जूझ रहे है । अपने संयम , संकल्प और सहकार से हम सब मिलकर उसका मुकाबला कर रहे हैं। इस लॉक डाउन यानी ग्रहवास के कारण हममें से अधिकांश का जीवन गणित गड़बड़ा गया है। उसे कब , कैसे और कितना सुधारा जाएगा कोई नही जानता। हम ही में से कई कलाकार ऐसे भी है जिनके घर हमारे मनोरंजन से चलते है।ये कलाकार नामचीन नही है । लेकिन उनके बिना हम उन कला प्रदर्शनों की कल्पना भी नही कर सकते । वो रोज काम करते है और रोज कमाते है, उसी पर उनकी आजीविका चलती है , उनका परिवार... Read more
इरफान

संग-संग : सुतपा सिकदर और इरफान खान के साथ

इरफान खान और सुतपा सिकदर दिल्ली स्थित एनएसडी में मिले. साल था 1985... दिल्ली की सुतपा ने अपनी बौद्धिक रुचि और कलात्मक अभिरुचि के विस्तार के रूप में एनएसडी में दाखिला लिया था और इरफान खान जयपुर में न समा सके अपने सपनों को लिए दिल्ली आ गए थे. उनके सपनों को एनएसडी में एक पड़ाव मिला था. इसे दो विपरीत ध्रुवों का आकर्षण भी कह सकते हैं, लेकिन अमूमन जीवन नैया में एक ही दिशा के दो यात्री सवार होते हैं. सुतपा और इरफान लंबे समय तक साथ रहने (लिविंग रिलेशन) के बाद शादी करने का फैसला किया और तब से एक-दूसरे के सहयात्री बने हुए हैं. मुंबई के... Read more