रचनाकर्म

रवीश कुमार

मीडिया की लाश आपके घर आने वाली हैः रवीश कुमार

2019 के चुनावी साल में मीडिया की लाश आपके घर आने वाली है, आपकी क्या तैयारी है (लेखक हैं एनडीटीवी के कार्यकारी सम्पादक रवीश कुमार 2019 के चुनाव में अब 9 महीने रह गए हैं। अभी से लेकर आख़िरी मतदान तक मीडिया के श्राद्ध का भोज चलेगा। पांच साल में आपकी आंखों के सामने इस मीडिया को लाश में बदल दिया गया। मीडिया की लाश पर सत्ता के गिद्ध मंडराने लगे हैं। बल्कि गिद्धों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि लाश दिखेगी भी नहीं। अब से रोज़ इस सड़ी हुई लाश के दुर्गन्ध आपके नथुनों में घुसेंगे। आपके दिमाग़ में पहले से मौजूद सड़न को खाद देंगे और... Read more
राज्यसभा टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व प्रधान सम्पादक गुरदीप सिंह सप्पल

इमेज ब्रांडिंग में लगा राज्यसभा टीवी, प्रधान सम्पादक परेशान

एडीटर अटैकः राज्यसभा टीवी। वही गुरदीप सिंह सप्पल वाला। जी हां राज्यसभा टीवी की पूरी पहचान और वजूद अबतक भी गुरदीप सिंह सप्पल से ही जुड़ा हुआ है। जबकि चैनल के पूर्व प्रधान सम्पादक सप्पल कई महीने पहले ही  इस्तीफा देकर जा चुके हैं। राज्यसभा टीवी अब अपनी पुरानी पहचान से निकलना चाहता है। आज भी जब कुछ बात होती है तो लोग अनायास ही कह देते हैं अच्छा सप्पल वाला राज्यसभा टीवी न, अच्छा उर्मिलेश वाला राज्यसभा टीवी न, अच्छा बादल जी वाला राज्यसभा टीवी। अमृता रॉय वाला। अच्छा जिसमें अरफा खानम थीं। जबकि ये तमाम बड़े नाम चैनल छोड़कर जा चुके हैं। हालांकि अंदर की बात ये कि... Read more
जगदीश उपासने।

कुठियाला की नीतियों पर आहिस्ता आहिस्ता चलेगा उपासने का झाडू़

एडीटर अटैक... माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय जो कि पत्रकारिता के पठन-पाठन से ज्यादा संघ और भाजपा से प्रेरित राजनीति के लिए ज्यादा जाना जाता है। कुछ लोगों का तो सीधे तौर पर ये मानना है कि संघ के कार्यकर्ता ही इसके प्रोफेसर और कुलपति हैं और छात्र अखिलभारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू वाहिनी और संघ के सदस्य। वर्तमान कुलपति जगदीश उपासने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर के संपादक रहे हैं। सीधे तौर पर इस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व शिक्षक बीजेपी व संघ के प्रचार प्रसार में सार्वजनिक रूप से भागीदारी करते नजर आते हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव तो मोदी मामलों के विशेषज्ञ ही हैं। कई किताबें मोदी पर... Read more
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

2014 के जनादेश ने कैसे बदल दिया मीडिया को

वरिष्ठ टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी की कलम से  ---------------------------------------------------------- क्या वाकई भारतीय मीडिया को झुकने को कहा गया तो वह रेंगने लगा है। क्या वाकई भारतीय मीडिया की कीमत महज 30 से 35 हजार करोड की कमाई से जुड़ी है । क्या वाकई मीडिया पर नकेल कसने के लिये बिजनेस करो या धंधा बंद कर दो वाले हालात आ चुके हैं ।   हो जो भी पर इन सवालों के जवाब खोजने से पहले आपको लौट चलना होगा 4 बरस पहले। जब जनादेश ने लोकतंत्र की परिभाषा को ही बदलने वाले हालात एक शख्स के हाथ में दे दिये । यानी इससे पहले लोकतंत्र पटरी से ना उतरे जनादेश... Read more
नायपाल और अटल जी

कोई भी व्यक्ति दोषहीन नहीं होता

2 प्रसिद्ध व्यक्तियों का निधन हो गया है और उनके बारे में बहुत-सी बातें लिखी गई हैं। यह भारत में हमारी परम्परा है और विश्व भर में भी इसके बारे में बात की जाती है कि जो लोग दुनिया छोड़ जाते हैं उनके बारे में केवल अच्छी बातें की जाएं। मगर कोई भी व्यक्ति दोषहीन नहीं होता और ईमानदारी से कहें तो यह बात हम खुद पर भी लागू कर सकते हैं।    इसी भावना से हम इन दो व्यक्तियों के जीवन के कुछ पहलुओं पर नजर डालते हैं जो हमसे बिछुड़ गए हैं। इनमें से अधिक रुचिकर हैं लेखक वी.एस. नायपॉल। उनका पहला नाम विद्याधर था और वह त्रिनिदाद... Read more
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वो अश्लील! कविताएं जिन्होंने आजकल हिंदी पट्टी में मचा रखा है बवाल

वर्ष 2018 को गुदावर्ष घोषित कर दो’ अंबर पांडेय और मोनिका कुमार की कविता-शृंखला :: अंबर पांडेय की कविताएँ मेरी प्रेमिका के गुदास्थान का विवरण रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए मैं इसे नहीं लिखना चाहता। अपनी प्रेमिका को यह लिखकर मैं अचंभित भी नहीं करना चाहता क्योंकि अचंभा कोई ऐसा मनोभाव नहीं जिस पर प्रेमी का एकाधिकार हो—जिस तरह उसके गुदास्थान पर मेरा अधिकार है। साहित्य के आलोचकों को चौंका देने के लिए भी मैं यह नहीं लिखना चाहता। गुदास्थान पर लिखने में समस्याएँ भी बहुत हैं, ख़ासतौर पर तब जब इसे लिखने वाला मुझ जैसा कोई धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति हो। अधिकतर बिंब खाद्य पदार्थ या धर्म संबंधित... Read more
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सम्पादक आत्महत्या मामलाः आरोप की परिभाषा दोषी होना नहीं है

एडीटर अटैक-    एक स्त्री। जो एक छोटे बच्चे की मां भी है और तलाकशुदा भी। सारे रिश्ते नाते बिखर चुके हैं और अब माथे पर एक नामी गिरामी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। आरोप, आरोप होता है। आरोप की परिभाषा दोषी होना नहीं है। किसी आरोपी को दोषी सिद्ध करना प्रथम दृष्टया अदालत का काम है। मीडिया और हम किसी आरोपी को अदालत से पहले ही दोषी क्यों मान लें। आरोपी जिसे हमें ज़लील करते हैं, मीडिया चटखारे ले लेकर मसालेदार खबरें करता है, वही आरोपी जब अदालत से दोषमुक्त हो जाता है, तो उस आरोपी की छविभंजन के दोषी कौन लोग होंगे और उनकी... Read more
अमीष देवगन

कोई ऑन डिबेट पत्रकार को दलाल बोले तो चिंतन की दरकार है

[caption id="attachment_3639" align="alignleft" width="154"] प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर[/caption] एडीटर अटैकः प्रशांत राजावत , सम्पादक मीडिया मिरर   -  मेरे घर में टीवी नहीं है औऱ होती भी तब भी न्यूज चैनल नहीं ही देखता। इसलिए मुझे बहुत बेहतर तरीके से पता नहीं पर शायद पिछले दिनो एक कांग्रेस प्रवक्ता ने लाइव शो के दौरान जिस टीवी एंकर को भड़वा औव दलाल कहा वो शायद न्यूज 18 के हैं। नाम है अमीष देवगन। नाम और मामला क्लियर है मुझे। मैंने यूट्यूब पर पूरा वीडियो देखा जिसमें अमीष को कांग्रेस प्रवक्ता दमदारी से भड़वा और दलाल कह रहे हैं। ये कैसा दौर है जब हम पत्रकारों को हमारे ही संस्थान में... Read more
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हम पत्रकार हैं, केवल महिला पत्रकार नहीं

हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ एक मुलाकात के लिए इंडिया इंटरनैशनल सैंटर में आयोजित अत्यंत गोपनीय कार्यक्रम में 50 से अधिक  महिला पत्रकारों को आमंत्रित किया गया। कांग्रेस को गोपनीयता पसंद है और हैरानी की बात है कि महिला पत्रकारों को भी यह पसंद है। अब विवाद इस बात को लेकर है कि किसे आमंत्रित किया गया और किसे नहीं तथा किसने इस चुनिंदा बातचीत को आयोजित करने में सहायता की। क्या यह इंडियन वूमैन्स प्रैस कॉप्र्स (आई.डब्ल्यू.पी.सी.)थी? यदि ऐसा था तो क्यों नहीं इसका आयोजन संगठन के कार्यालय में किया गया और सभी सदस्यों के लिए इसे खुला रखा गया? क्यों केवल कुछ सदस्यों को... Read more
चारूल मलिक

ये एंकरिंग नहीं आसान…!!

इंडिया टीवी की मुंबई एंकर चारुल मलिक ने एंकर्स के लिए एक कविता लिखी है। आप भी पढ़िए।   कौन नहीं चाहता एंकर बनना ये मेरा भी ख़्वाब था , जब मैं पाँच साल की थी तब से टीवी लगता बहुत लाजवाब था ! स्कूल में आए तो असेम्बली में न्यूज़ रीड की हर कॉम्पिटीशन में सबसे आगे रही , फ़र्स्ट प्राइज़ से नीचे कुछ लगता नहीं था अच्छा जानता था स्कूल का बच्चा-बच्चा ! पेरेंट्स ने सिखाया, पेरेंट्स ने बनाया फिर मेहनत और डेडिकेशन ने सफलता का तड़का लगाया ! ये एंकरिंग नहीं है आसान रोज़ मेकअप करना पड़ता है , हमेशा स्माइल करते और एनर्जेटिक रहना पड़ता है... Read more