रचनाकर्म

नमो टीवी

नमो टीवी: नियमों के दुरुपयोग का ऐसा दुस्साहस पहले कभी नहीं किया गया

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने नमो टीवी को लेकर चुनाव आयोग को अपने जवाब में कहा, ‘ब्रांड लोगो के तौर पर प्रधानमंत्री के चित्र वाला ‘नमो टीवी’ सभी डीटीएच प्लैटफॉर्म्स पर चलनेवाला एक ‘स्पेशल सर्विस’ ब्रॉडकास्ट (‘विशेष सेवा’ प्रसारण) चैनल है. इसलिए इसे सरकार से किसी लाइसेंस या इजाजत की जरूरत नहीं है. लेकिन सूचना और प्रसारण मंत्रालय और मोदी सरकार का जवाब इसके अलावा और हो भी क्या सकता था? वास्तव में, मंत्रालय वही दोहरा रहा है, जो भाजपा प्रवक्ता टेलीविजन की बहसों में कह रहे हैं. सबसे मनोरंजक यह है कि एक प्रतिनिधि ने यह स्वीकार करते हुए कि उसे यह नहीं पता है कि नमो टीवी का मालिक... Read more
वरिष्ठ टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी।

तलवार की धार पर चलने के सामान है पत्रकारिता करना 

पुण्य प्रसून वाजपेयी किसी भी मीडिया हाउस के लिये ये उपलब्धी हो सकती है कि उसके उद्धाटन में प्रधानमंत्री आ जाये । ठीक वैसे ही जैसे 31 मार्च 2019 को दिल्ली में एक न्यूज चैनल के उद्धाटन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहुंच गये । एतराज किसी को होना हीं चाहिये । कयोकि न्यूज चैनल की शुरुआत ही अगर देश के सबसे बडे ब्रांड की मौजूदगी के साथ ह रही है तो फिर बात ही क्या है । लेकिन इसका ये अर्थ भी कतई नहीं होना चाहिये प्रधानमंत्री की मौजूदगी में पत्रकारिता करना भूल जाया जाये । और वह भी तब जब देश लोकसभा चुनाव की तरफ बढ चुका हो ।... Read more
पुण्य प्रसून बाजपेयी

त्याग करोगे तो घर कैसे चलाओगे प्रसून जी, ये जनता मोदी को ही जिताएगी

एडीटर अटैक- प्रशांत राजावत   होली के दो दिन पहले ही मैं एक कार्यक्रम में गया था, जहां रवीश कुमार वक्ता के रूप में आकर्षण का केंद्र थे। उसके बाद मैंने मिरर पर अपनी रिपोर्ट में लिखा कि ये रवीश के बहिष्कार का वक्त है। उनकी सुनेंगे, उनकी मानेंगे या उन्हें आदर्श मानेंगे, तो अगर आप पत्रकार हैं या पत्रकारिता के छात्र हैं, तो खतरा उठाना पड़ सकता है। मेरे इस आलेख के बाद मुझे जमकर गालियां मिलीं। खैर लोकतंत्र हैं गालियों से कोई महरूम नहीं। चूंकि होली का अवसर है। तो गालियां भी गुलाल सरीखा मानकर मैंने धो डाली। आगे चलते हैं.. उसी के बाद खबर आई है पुण्य... Read more
भारतीय टीवी मीडिया

पुलवामा के बाद भड़काने वाली पत्रकारिता से किसका भला?

टीवी पत्रकार रहे मुकेश कुमार ने ये आलेख बीबीसी के लिए लिखा, महत्वपूर्ण है। इसलिए हम साभार प्रस्तुत कर रहे हैं। मिरर के पास इतना आर्थिक सम्बल नहीं कि हम बड़े पत्रकारों से सीधे तौर पर लिखवा सकें इसलिए हमे कोई आवश्यक सामग्री दिखती है तो उसमें हमें क्रेडिट के साथ जरूर आपको पढवाते हैं।  भारत-पाकिस्तान के बीच जिस तरह के रिश्ते हैं उसमें मीडिया कवरेज कभी भी संतुलित और ऑब्जेक्टिव नहीं रहा. ये भी सही है कि जंग और युद्धोन्माद जैसा कुछ नहीं बिकता. वह सुपरहिट मसाला होता है और दुनिया भर का मीडिया इसका इस्तेमाल अपनी लोकप्रियता और मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए करता रहा है. भारत और पाकिस्तान... Read more
अभिनंदन

बदलते हुए इस पाकिस्तान को भी देखें 

अंबरीश कुमार, सम्पादक शुक्रवार विंग कमांडर अभिनंदन जो पाकिस्तान का जहाज गिरा कर उधर ही गिर गए थे वे लौट आएं हैं . पकिस्तान कट्टरपंथियों का देश रहा है कोई लोकतांत्रिक देश नहीं जिससे दुश्मन देश के किसी सैनिक से सम्मानजनक बर्ताव की उम्मीद की जाए .वे क्या जिनेवा समझौता मानेगा जिसने अपने ही जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटका दिया था .भुट्टो की बेटी बेनजीर को इसी देश में चुनाव प्रचार के दौरान बम से उड़ा दिया गया .सौरभ कालिया याद है न और अजय आहूजा भी .ऐसे देश से अपना एक बहादुर सैनिक सकुशल लौट आए तो यह ख़ुशी का मौका है ही .पर इसके पीछे कई... Read more
रवीश कुमार

वायु सेना, सरकार के पराक्रम के बीच पत्रकारिता का पतन झाँक रहा है

टीवी पत्रकार रवीश कुमार की कलम से  आज का दिन उस शब्द का है, जो भारतीय वायु सेना के पाकिस्तान में घुसकर बम गिराने के बाद अस्तित्व में आया है। भारत के विदेश सचिव ने इसे अ-सैन्य कार्रवाई कहा है। अंग्रेज़ी में non-military कहा गया है। इस शब्द में कूटनीतिक कलाकारी है। बमों से लैस लड़ाकू विमान पाकिस्तान की सीमा में घुस जाए, बम गिराकर बगैर अपने किसी नुकसान के सकुशल लौट आए और कहा जाए कि यह अ-सैन्य कार्रवाई थी तो मुस्कुराना चाहिए। मिलिट्री भी नॉन-मिलिट्री काम तो करती ही है। इसके मतलब को समझने के लिए डिक्शनरी को तकलीफ देने की ज़रूरत नहीं है। पोलिटिक्स को समझने की... Read more
रवीश

हिन्दी के अख़बार हिन्दी के पाठकों की हत्या कर रहे हैं

ख़बर नहीं बस ख़बरों के नाम पर अख़बार छपता है, हिन्दुस्तान छपता है रवीश कुमार, एनडीटीवी गर्त इतना गहरा हो गया है कि बात में तल्ख़ी और सख़्ती की इजाज़त मांगता हूं। आप आज का हिन्दुस्तान अखबार देखिए। फिर इंडियन एक्सप्रेस देखिए। एक्सप्रेस का पहला पन्ना बताता है कि देश में कितना कुछ हुआ है। घटनाओं के साथ पत्रकारिता भी हुई है। एक्सप्रेस के पहले पन्ने की बड़ी ख़बर है कि भूपेन हज़ारिका के बेटे ने भारत रत्न लौटा दिया है। रफाल डील होने से दो हफ्ता पहले अनिल अंबानी ने फ्रांस के रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की थी। हिन्दुस्तान का पहला पन्ना बताता है कि भारत में दो ही... Read more
रवीश कुमार

चैनल देखना बंद कर दें, ये चुनाव के नाम पर टाइम काट रहे हैं

रवीश कुमार, कार्य़कारी सम्पादक एनडीटीवी  मैं एक सामान्य दर्शक की तरह नहीं सोच पाता हूं। नहीं समझ पाता कि एक दर्शक का सामान्य होना क्या होता है। क्यों वह सतही और घटिया कंटेंट देखता है? क्या टीवी ने आपको इतना सामान्य बना दिया है कि आपको इस टीवी के कारण आपके भीतर और लोकतंत्र के भीतर आ रहे संकटों का अहसास ही नहीं होता है? आपके भीतर का ख़ालीपन और खोखलापन ही लोकत्तंत्र का ख़ालीपन और खोखलापन है। क्या आप कभी महसूस कर पाते हैं कि न्यूज़ चैनल किस तरह आपको सूचना विहीन बनाते जा रहे हैं। एक ही तरह के दृश्य बार-बार दिखाकर आपको दृश्यविहीन बनाते जा रहे हैं।... Read more
हिंदु समूह के एन राम

एन राम को पत्रकारिता मत सिखाइए अब…

एडीटर अटैक - प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर  इस बात को एकदम भूल जाइए कि एन राम यानि नरसिम्हन राम ने क्या छापा और क्यों चर्चा में हैं। सबसे पहले ये बात जान लीजिए कि एन राम उस अंग्रेजी दैनिक अखबार के सम्पादक हैं जो वर्जन नहीं छापता कि एसपी ने कहा है, या डीसी ने कहा है। बस इतना जान लीजिए हिंदू ने कहा बस इतना काफी होता है। हिंदू के रिपोर्टर ने लिख दिया वो लकीर हो गई पत्थर की। उसपर फिर किसी वर्जन की आवश्यक्ता नहीं होती। हिंदू के बारे ये प्रचिलित है। अब आइए एन राम पर। एन राम अभी बीजेपी वालों को चुभ सकते हैं... Read more
अंशु मालवीय

वे कविता पढ़ रहे थे और उनकी पुलिस कवि को अगवा कर रही थी

यूपी सरकार की पुलिस एक कवि अंशु मालवीय को अपहर्ताओं की तरह एक कार्यक्रम के बीच से उठा कर गाड़ी में डाल कर कहीं ले जा रही थी. प्रियदर्शन की कलम से- जिस समय लोकसभा में राष्ट्रपति के भाषण पर चर्चा का जवाब देते समय अपनी पीठ ठोकते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना नाम लिए सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता पंक्तियां दुहरा रहे थे- कि मैं सूरज को डूबने नहीं दूंगा, लगभग उसी समय झूंसी में यूपी सरकार की पुलिस एक कवि अंशु मालवीय को अपहर्ताओं की तरह एक कार्यक्रम के बीच से उठा कर गाड़ी में डाल कर कहीं ले जा रही थी. अंशु मालवीय गीत और कविता की... Read more