रचनाकर्म

मुक्तांगन

क्रास हुए राहुल देव, स्त्री सम्मान में सेंध लगाते लेखक-पत्रकार

एडीटर अटैकःप्रशांत राजावत   मामला लगभग दस दिन पुराना हो गया। मध्यप्रदेश की यात्रा पर अचानक जाना हुआ इसलिए लिख नहीं पाया था। पर लिखना जरूरी था ताकि आपलोगों को सच्चाई पता लगे साहित्य और पत्रकारिता जगत की गंदगी की। हुआ कुछ यूं कि दैनिक जागरण ने कठुआ रेप मामले की खबर को इस तथ्य के साथ प्रकाशित किया कि वहां रेप हुआ ही नहीं था और इस खबर पर देशभर में बवाल मच गया। दैनिक जागरण अखबार की प्रतियां जलाई जाने लगीं, जागरण के बहिष्कार की अपील होने लगी। लोग जागरण के खिलाफ सड़कों पर मार्च करने लगे। इसी बीच दैनिक जागरण द्वारा प्रायोजित साहित्यिक कार्य़क्रम मुक्तांगन जो कि... Read more
newspaper

ग्रामीण पत्रकारिताः सैलरी नहीं वसूली से चलता है काम

एडीटर अटैकः प्रशांत राजावत अभी मैं पिछले 6-7 दिनों के लिए मध्यप्रदेश की यात्रा पर था। भिण्ड जिले के लहार क्षेत्र में रहा, वहीं रीवा जिले के गढ़ कटरा में रहा। मैंने वहां लोगों से समझने की कोशिश की कि उनकी नजर में पत्रकार औऱ पत्रकारिता क्या है। जो जाना वही आपको बता रहा हूं।   रीवा के गांव में मैंने जब लोगों से मीडिया पर बात करना शुरू की तो जैसे ही उनको मालूम हुआ कि मैं पत्रकार हूं लोग कहने लगे अरे पत्रकार तो बहुत पावरफुल होता है। किसी की भी बैंड बजा दे। पुलिस, नेता, अफसर सब डरते हैं पत्रकारों से। जिन लोगों से मैं बात कर... Read more
नरेंद्र मोदी

प्रसून प्रसंगः प्रसून जोशी बनाम लेडी गागा

एडीटर अटैक-प्रशांत राजावत   [caption id="attachment_3280" align="alignleft" width="300"] लंदन के सेंट्रल हॉल में प्रसून जोशी और नरेंद्र मोदी बातचीत के दौरान[/caption] कवि, लेखक, गीतकार और सेंसरबोर्ड के मुखिया प्रसून जोशी आजकल चर्चा में हैं। क्यों। मुझे नहीं लगता बताने की जरूरत है पर फिर भी बता दें लंदन में भारतीय प्रधानमंत्री से साक्षात्कारनुमा बातचीत के बाद वो चर्चा में हैं और हर तरफ उनकी आलोचना की जा रही है। उन्हें भाट, चारण, दरबारी कवि, चापलूस आदि संज्ञाएं दी जा रही हैं। विनोद दुआ जैसे महारथी पत्रकार अपने लोकप्रिय कार्य़क्रम जनगणमन की बात में प्रसून को दरबारी कवि, भांट आदि बता चुके हैं। श्री दुआ का कहना है कि ऐसे सवाल... Read more
म.प्र. पुलिस

सर्कुलर जारीः पुलिस को बिना अनुमति पत्रकारों से दोस्ती रखना नियम विरुद्ध

म.प्र. डीजीपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पुलिस अधीक्षकों को खीजकर यह कहते सुने गए कि मीडिया पर कंट्रोल करें ? एक सर्कुलर जारी कर यह सख्त हिदायत दे दी गई कि बिना अनुमति पत्रकारों से दोस्ती रखना भी मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के खिलाफ है।   मध्यप्रदेश पुलिस मीडिया व सोशल मीडिया पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। डीजीपी चाहते हैं कि कोई पुलिस वाला पत्रकारों से मेल मिलाप न करे वरना कार्रवाई होगी। साथ ही पुलिस विभाग के लिए एक सर्कुलर भी जारी होने की बात सामने आ रही है जिसमें कहा गया है कि बिना अनुमति पत्रकारों से दोस्ती रखना भी म.प्र.सिविल सेवा आचरण नियम 1965... Read more
बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ

रेपिस्ट को मिले मौत की सजा और लाइव हो प्रसारणः वैदिक

बलात्कारों से कैसे निपटा जाए ? इस पर अपने विचार रख रहे वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिकः   बलात्कार की राक्षसी घटनाओं से जम्मू-कश्मीर और उत्तरप्रदेश में हंगामा इसलिए खड़ा हो गया है कि इन घटनाओं से कुछ नेताओं का संबंध जुड़ा हुआ है लेकिन पिछले एक सप्ताह में बलात्कार की लगभग आधा दर्जन नृशंस घटनाएं देश के अन्य भागों में हो गई हैं। ये घटनाएं कठुआ और उन्नाव से भी भयंकर हैं। पहले बलात्कार और फिर हत्या ! ये घटनाएं क्या बताती हैं ? पहली बात तो यह कि देश में बलात्कार की घटनाएं आम हो गई हैं। बलात्कार पहले भी होते थे लेकिन इन दिनों भारत का हाल वही... Read more
learn english

अंग्रेजी नहीं आती तो मीडिया में करियर मुश्किल

एडीटर अटैकः प्रशांत राजावत   जब मैं एकदम पढ़ाई करके ही निकला था नौकरी की तलाश में तो मुझे ईटीवी सतना जिले के संवाददाता मिले और बातचीत हुई। बोले यार मैं ईटीवी में हूं कई वर्षों से पर उन्नति नहीं हो पाई, क्योंकि अंग्रेजी नहीं आती। मेरी समझ में नहीं आया हिंदी चैनल में अंग्रेजी की क्या जरूरत। उसके बाद तमाम हिंदी अखबारों के जिला संस्करणों और मुख्यालयों में रहा वहां भी सब सामान्य ही रहा। पर भोपाल गया दैनिक भास्कर में साक्षात्कार देने 2009 में तो देखा मामला एकदम अलग था। सबसे पहले यही पूछा गया कि अंग्रेजी आती है। तो हमने भी तपाक से कहा कि यहां अंग्रेजी... Read more
पत्रकारिता व मीडिया

कर्मचारी सुविधा अब मीडिया संस्थानों के लिए चुनौती

कर्मचारियों को सप्ताह में 2 दिन के अवकाश व अन्य सुविधाओं के लिए दिल्ली के मीडिया संस्थानों पर बन रहा दबाव    एडीटर अटैक-प्रशांत राजावत    खासतौर पर भारत के मीडिया हब के रूप में प्रसिद्ध दिल्ली के मीडिया संस्थानों के लिए कर्मचारी सुविधा के नाम पर एक बड़ी चुनौती आने वाली है। और आने वाली क्या है आ ही गई है। इस प्रतिस्पर्धी दौर में मीडिया घरानों के लिए सबकुछ सामान्य होगा, सबकुछ उनके पक्ष में होगा ऐसा नहीं है। मीडिया संस्थानों में सभी विभागों के कर्मचारियों को सुविधा देने की चुनौती सामने आ रही है। चाहे सम्पादकीय विभाग हो, विज्ञापन विभाग, प्रसार या अन्य। दरअसल हो ये रहा... Read more
राहुल गांधी

राहुल गांधी का मिडनाइट मार्च और गोदी मीडिया की ‘व्यथा’

ग्वालियर म.प्र. के वरिष्ठ पत्रकार डॉ.राकेश पाठक कल रात दिल्ली में हुए केंडिल मार्च को लेकर मीडिया की कवरेज़ पर प्रकाश डाल रहे हैं।    (कृपया ध्यान रखिये..विषय राहुल नहीं गोदी मीडिया है) कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बीती रात महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ केंडिल मार्च पर क्या निकले बेचारे गोदी मीडिया की छाती पर कालिया नाग लोटने लगे..! स्टूडियो में बैठे दिव्य दृष्टि एंकर से लेकर राजपथ पर डटे रिपोर्टर इस मिडनाइट मार्च से इतने व्यथित हो गए कि "तुरंता न्याय" पर उतारू हो गए। हर एंगिल से राहुल गांधी और कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की लेकिन जनता के जवाब ने उनके मुंह पर... Read more
newspaper

अखबारी दफ्तरों में सैलरी का गणित समझो

जयपुर के युवा पत्रकार विनोद पाठक अखबारी दफ्तरों में मिलने वाली सैलरी का बढ़िया विश्लेषण कर रहे हैं। हालांकि वो पत्रकारों के हक के लिए मजीठिया वेज बोर्ड के लिए संघर्षरत हैं। राजस्थान पत्रिका को आधार बनाकर उनका ये आलेख   दोस्तों पत्रिका के भीतर कर्मचारियों में बेचैनी है। छटपटाहट है। प्रबंधन के कर्मचारियों की कंपनी बदलने से गफलत बढ़ी है। ऊपर से एक-एक आदमी से तीन-तीन आदमियों का काम लिया जा रहा है। बड़ी संख्या में पत्रिका में कार्य कर रहे साथी मुझसे संपर्क कर अपनी पीड़ा बयां करते हैं। एक साथी ने अपनी पीड़ा और कर्मचारियों के शोषण को इस लेख में बयां किया है। मैंने इस लेख... Read more
राजेश बादल, वरिष्ठ पत्रकार

अपयश का प्रेत भी पीछा नहीं छोड़ताः राजेश बादल

देश के जाने माने पत्रकार, सम्पादक, लघु फिल्म निर्माता राजेश बादल अपयश का प्रेत भी पीछा नहीं छोड़ता नाम से एक श्रृंखला लिख रहे हैं। 2 हिस्से मिरर पर आप पढ़ सकते हैं। मीडिया और हालिया फ़ेक न्यूज प्रसंग का बहुत बारीक विश्लेषण किया है उन्होंने। जिन लोगों ने राज्यसभा टीवी में उन्हें सुना औऱ देखा है वो बखूबी जानते हैं कि श्री बादल आवाज़ और शब्दों के भी धनी हैं।  बटन दबेगा दिल्ली से ,दंगा होगा टिमबक टू में ये राजेश बादल ही लिख सकते हैं। पढ़िए 2 हिस्से-- श्री बादल हाल ही में राज्यसभा टीवी से कार्यकारी निदेशक पद से मुक्त हुए हैं। मूलरूप से छतरपुर म.प्र. से आते हैं। ... Read more