रचनाकर्म

हार्वर्ड विश्वविद्यालय में रवीश कुमार।

“टोकने वाले लोग न्यूज रूम से हटा दिए जा रहे हैं”

सच कहा रवीश जी.... "टोकने वाले लोग न्यूज रूम से हटा दिए जा रहे हैं" --- रविशकुमार जी को दो फीट ऊंचे मंच पर, 30 फीट दूर से देखने और सुनने का पहला मौका आज ग्वालियर में मिला। रवीश जी!! आपके जैसे हर पत्रकार को लगता होगा कि वो बिलकुल आपके जैसा है। जब आप अपने काम करने के तरीके और सोचने के ढंग को बयां कर रहे थे, तब मुझे भी स्वाभाविक रूप से यही लगा कि मैं भी रवीश के जैसा हूँ। लेकिन हकीकत में ऐसे कैसे कोई रविशकुमार हो सकता है? हां ये हो सकता है कि पत्रकारिता में जो रवीश के साथ हुआ वो कहीं न कहीं... Read more
चार्ली

चार्ली चैपलिन का तीन दिन का प्यार

जो बातें ख़ुद कहनी चाहिए, उसे सामने वाले से सुनने की उम्मीद करना, दरअसल, एक आत्महंता नादानी है। चार्ली ने अपना पहला प्यार इसी नादानी के चलते खो दिया। यही नहीं, एक ही झटके में उसने वे सारे पुल तोड़ दिए, जिनसे वह हेटी केली तक दुबारा पहुँच सकता था।   बात तब की है, जब चार्ली चैपलिन ने फिल्मी दुनिया में क़दम नहीं रखे थे। 19 की उम्र के चैपलिन को पहली बार प्रेम हुआ। वह लंदन में रंगमंच करते थे और 15 साल की वह लड़की भी उसी थिएटर में नर्तकी थी। उसका नाम हेटी केली था। जब चार्ली ने पहली बार उसे देखा, वह रिहर्सल कर रही... Read more
वरिष्ठ टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी।

अमेरिकी मीडिया बनाम भारतीय मीडिया यानी लोकतंत्र के दो चेहरे 

प्रसिद्ध टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी की कलम से ------ मौजूदा वक्त में जिन हालातो से भारतीय मीडिया दो चार हो रहा है या फिर पत्रकारो के सामने जो संकट है उस परिपेक्ष्य में अमेरिकी मीडिया का ट्रंप की सत्ता से टकराना दुनिया के दो लोकतांत्रिक देशो की दो कहानिया ही सामने लाता है । और दोनो ही दिलचस्प है । क्योकि दुनिया के सबसे पुराने लोकतांभिद देश अमेरिका के राष्ट्रपति मीडिया के सामने खुले तौर पर आने से कतराते नहीं है । पर दुनिया के सबसे बडे लोकतांत्रिक देश भारत के प्रधानमंत्री मीडिया के सामने सवालो के जवाब देने से घबराते है तो अपनी पंसद के पत्रकार या मीडिया... Read more
राहुल गांधी

एक अकेले राहुल और हम नब्बे पत्रकार…

( सुबह सवेरे में ग्राउंड रिपोर्ट )  एक पत्रकार के तौर पर नेताओं से मिलना जुलना और उनकी राजनीति को समझना हमेशा अच्छा लगता है। ऐसे में जब कहा गया कि इंदौर में राहुल गांधी पत्रकारों से मिलेंगे तो इंदौर जाने की ललक बढ गयी थी। इंदौर की रेडिसन ब्लू के बडे हाल में करीब नौ बडी टेबल लगाकर राहुल से पत्रकारों की चर्चा के इंतजाम किये गये थे। हर टेबल पर करीब आठ से दस पत्रकार थे। राहुल तय समय से करीब आधे घंटे बाद आये। राहुल का पहनावा वही था जो आमतौर पर सभाओं में दिखता है बेतरतीबी से पहना हुआ सादा सा सफेद कुर्ता पायजामा और नीले... Read more
media mirror

मीडिया सेंटर कितना पास कितना फेल…

बाखबर - राघवेन्द्र सिंह (नया इंडिया में रोजाना) मीडिया के भरोसेमंद होने का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि एक अखबार में खबर छपती है कि आज अवकाश है और लोग उसे पढ़कर आफिस और बच्चे स्कूल नहीं जाते। अलग बात है बाद में जिस रिपोर्टर की गलती से ये भ्रमपूर्ण खबर छपी उनकी अखबार से विदाई भी हो जाती है। ऐसी ही विश्वसनीयता को खरीदने बेचने वाले आज के जमाने में मीडिया मैनेजमेंट का नाम देते हैं। पार्टियां सत्ता में हो तो इस तरह के मैनेजमेंट के बिना माना जाता है कि पत्ता भी नहीं हिलेगा। चुनावी साल में ये मीडिया मैनेजमेंट का भूत भाजपा और कांग्रेस दोनों के सिर... Read more
रवीश कुमार

मीडिया की लाश आपके घर आने वाली हैः रवीश कुमार

2019 के चुनावी साल में मीडिया की लाश आपके घर आने वाली है, आपकी क्या तैयारी है (लेखक हैं एनडीटीवी के कार्यकारी सम्पादक रवीश कुमार 2019 के चुनाव में अब 9 महीने रह गए हैं। अभी से लेकर आख़िरी मतदान तक मीडिया के श्राद्ध का भोज चलेगा। पांच साल में आपकी आंखों के सामने इस मीडिया को लाश में बदल दिया गया। मीडिया की लाश पर सत्ता के गिद्ध मंडराने लगे हैं। बल्कि गिद्धों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि लाश दिखेगी भी नहीं। अब से रोज़ इस सड़ी हुई लाश के दुर्गन्ध आपके नथुनों में घुसेंगे। आपके दिमाग़ में पहले से मौजूद सड़न को खाद देंगे और... Read more
राज्यसभा टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व प्रधान सम्पादक गुरदीप सिंह सप्पल

इमेज ब्रांडिंग में लगा राज्यसभा टीवी, प्रधान सम्पादक परेशान

एडीटर अटैकः राज्यसभा टीवी। वही गुरदीप सिंह सप्पल वाला। जी हां राज्यसभा टीवी की पूरी पहचान और वजूद अबतक भी गुरदीप सिंह सप्पल से ही जुड़ा हुआ है। जबकि चैनल के पूर्व प्रधान सम्पादक सप्पल कई महीने पहले ही  इस्तीफा देकर जा चुके हैं। राज्यसभा टीवी अब अपनी पुरानी पहचान से निकलना चाहता है। आज भी जब कुछ बात होती है तो लोग अनायास ही कह देते हैं अच्छा सप्पल वाला राज्यसभा टीवी न, अच्छा उर्मिलेश वाला राज्यसभा टीवी न, अच्छा बादल जी वाला राज्यसभा टीवी। अमृता रॉय वाला। अच्छा जिसमें अरफा खानम थीं। जबकि ये तमाम बड़े नाम चैनल छोड़कर जा चुके हैं। हालांकि अंदर की बात ये कि... Read more
जगदीश उपासने।

कुठियाला की नीतियों पर आहिस्ता आहिस्ता चलेगा उपासने का झाडू़

एडीटर अटैक... माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय जो कि पत्रकारिता के पठन-पाठन से ज्यादा संघ और भाजपा से प्रेरित राजनीति के लिए ज्यादा जाना जाता है। कुछ लोगों का तो सीधे तौर पर ये मानना है कि संघ के कार्यकर्ता ही इसके प्रोफेसर और कुलपति हैं और छात्र अखिलभारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू वाहिनी और संघ के सदस्य। वर्तमान कुलपति जगदीश उपासने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर के संपादक रहे हैं। सीधे तौर पर इस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व शिक्षक बीजेपी व संघ के प्रचार प्रसार में सार्वजनिक रूप से भागीदारी करते नजर आते हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव तो मोदी मामलों के विशेषज्ञ ही हैं। कई किताबें मोदी पर... Read more
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

2014 के जनादेश ने कैसे बदल दिया मीडिया को

वरिष्ठ टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी की कलम से  ---------------------------------------------------------- क्या वाकई भारतीय मीडिया को झुकने को कहा गया तो वह रेंगने लगा है। क्या वाकई भारतीय मीडिया की कीमत महज 30 से 35 हजार करोड की कमाई से जुड़ी है । क्या वाकई मीडिया पर नकेल कसने के लिये बिजनेस करो या धंधा बंद कर दो वाले हालात आ चुके हैं ।   हो जो भी पर इन सवालों के जवाब खोजने से पहले आपको लौट चलना होगा 4 बरस पहले। जब जनादेश ने लोकतंत्र की परिभाषा को ही बदलने वाले हालात एक शख्स के हाथ में दे दिये । यानी इससे पहले लोकतंत्र पटरी से ना उतरे जनादेश... Read more
नायपाल और अटल जी

कोई भी व्यक्ति दोषहीन नहीं होता

2 प्रसिद्ध व्यक्तियों का निधन हो गया है और उनके बारे में बहुत-सी बातें लिखी गई हैं। यह भारत में हमारी परम्परा है और विश्व भर में भी इसके बारे में बात की जाती है कि जो लोग दुनिया छोड़ जाते हैं उनके बारे में केवल अच्छी बातें की जाएं। मगर कोई भी व्यक्ति दोषहीन नहीं होता और ईमानदारी से कहें तो यह बात हम खुद पर भी लागू कर सकते हैं।    इसी भावना से हम इन दो व्यक्तियों के जीवन के कुछ पहलुओं पर नजर डालते हैं जो हमसे बिछुड़ गए हैं। इनमें से अधिक रुचिकर हैं लेखक वी.एस. नायपॉल। उनका पहला नाम विद्याधर था और वह त्रिनिदाद... Read more