रचनाकर्म

1999 में कारगिल युद्ध की रिपोर्टिंग के दौरान टाइगर हिल से बरखा दत्त

जान हथेली पर रखकर रिपोर्टिंग करने के पीछे की कहानी

(खतरा है या खतरा बताया जाता है) पंचकुला में हाल ही में हर रिपोर्टर जान की बाजी लगाकर रिपोर्ट कर रहा था एडीटर अटैक@प्रशांत राजावत  बरखा दत्त, दीपक चौरसिया और न जाने कितने पत्रकार युद्ध या बाढ़ जैसी खतरनाक रिपोर्टिंग के बाद चर्चा में आये, उनको इसका लाभ भी मिला। बरखा दत्त ने कारगिल युद्ध का लाइव प्रसारण किया था, लक्ष्य फ़िल्म बरखा की कारगिल जीवन से जुड़ी है। ऐसी रिपोर्टिंग करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित  हुई हैं। सीरिया, ईरान, ईराक, गाजा पट्टी आदि क्षेत्रों में बड़ी विषम परिस्थितियों में रिपोर्टरों ने खबरें कवर की। पर कभी कभी सामान्य इलाके से की गई सामान्य रिपोर्टिंग को बढ़ा चढ़ाकर पेश... Read more
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन का नया बैच

ये पत्रकारिता के छात्रों को हुआ क्या है

न जवाबदेही, न अनुशासन, न धैर्य --- एडीटर अटैक---  प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर    मीडिया के छात्रों में गंभीरता, जिम्मेदारी और अनुशासन की बेहद कमी देखता हूं मैं आज के दौर में। इन्हें अपने संस्थान और कार्यस्थल में जो अंतर है वो नहीं पता होता। कॉलेज वाली मस्ती ही वो इंटर्नशिप के दौरान करते हैं। जब मन चाहा दफ्तर आए, जब मन चाहा गए। काम को लेकर सीखने में कोई दिलचस्पी नहीं, केवल ग्लैमर हावी। - मनोज टिबड़ेवाल आकाश, प्रसिद्ध टीवी पत्रकार व एडीटर डायनामाइट न्यूज)   मीडिया के छात्रों में गंभीरता की बेहद कमी है। ये सिर्फ आपके पीछे अपने स्वार्थ औऱ मतलब के लिए जुड़ेंगे। आप इनसे... Read more
रवीश कुमार

रवीश कुमार आप पत्रकारिता के छात्रों के लिए जहर हो !

-एडीटर अटैक- --- रवीश कुमार कौन हैं ? मुझे नहीं लगता ये बताने की आवश्यक्ता है। अगर मैं कहूं कि वो एनडीटीवी के वरिष्ठ सम्पादक हैं तो मैं समझता हूं बेइमानी ही होगी क्योंकि एनडीटीवी से भी ज्यादा लोकप्रिय हैं रवीश। इसलिए बेहतर होगा रवीश की पहचान के लिए एनडीटीवी न जोड़ा जाए। हां ख्यात पत्रकार ठीक होगा। खैर रवीश के कुछ बयानों को ले लेते हैं पहले उसके बाद हम संदर्भ चर्चा पर आते हैं। रवीश कुमार के बयान- मैं टीवी नहीं देखता, आप लोग भी मत देखिए रात 9 बजे चैनलों पर काले कोट और टाई पहनकर एंकर के रूप में सरकार के चमचे बैठते हैं, जो देश... Read more
आपकी अदालत के सेट पर रजत शर्मा के सवालों का जवाब देतीं कंगना रनौत।

बेबाकी का मतलब बदजुबानी नहीं है कंगना रनौत

[caption id="attachment_2236" align="alignleft" width="300"] ह्रितिक रोशन[/caption] कंगना अब आप टीनएज नहीं हैं। कोई आम लड़की भी नहीं हैं। जिस चैनल में आपका साक्षात्कार चला, वो भी कोई गली नुक्कड़ का चैनल नहीं है। जिस कार्यक्रम का आप हिस्सा थीं (आपकी अदालत) वो भी कोई सामान्य कार्यक्रम नहीं है। बावजूद आपने खुद को इतने हल्केपन से पेश किया कि हम सब हैरान हैं। बतौर अभिनेत्री हम सब आपके मुरीद हैं, आपके कायल हैं। पर रजत शर्मा के कार्यक्रम आपकी अदालत में आपके विचारों और सार्वजनिक संभाषण के तौर तरीकों ने हमें निराश किया। सच। आप मानें या न मानें पर आपके प्रशंसक वर्ग में शामिल खासतौर पर महिलाओं का एक बड़ा... Read more
रचना भोला यामिनी

एक अनुवादिका की डायरी के कुछ अंश

 रचना भोला यामिनी अनुवादन के क्षेत्र का एक जाना पहचाना नाम हैं। अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद करती हैं। उन्होंने मीडिया मिरर से अपनी डायरी के कुछ अंश साझा किए हैं, जिनसे आप भी समझ पाएंगे एक अनुवादिका का जीवन।..   जाने कितने बरस बीत गए... कितने बसंत और पतझड़ आ-आ कर चले गए...हम अपने नोट्स, किताबों और हवा से फड़फड़ाते पन्नों के बीच सिर झुकाए शब्दों के मोह में ऐसे उलझे कि लहराते बालों के बीच कब चाँदी के तार झिलमिलाने लगे, पता ही नहीं चला। समझ ही नहीं आया कि सुई की नोक में झट से धागा पिरो कर, महीन से महीन काम कर लेने वाली नज़र, दूर... Read more
चंद्रकांत देवताले

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित चंद्रकांत देवताले की कविताएं

चंद्रकांत देवताले का महज 2 दिन पहले लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। इंदौर रहते थे।  पत्थर फैंक रहा हूं कविता संग्रह के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उनकी कुछ कविताएं आप सबके लिए श्रद्धांजलि स्वरूप। कठिन और गूढ़ हिंदी शब्दों के बगैर भी कैसे अच्छी कविताएं लिखी जा सकती हैं, ये आपको देवताले की कविताएं बताएंगी।    अगर तुम्हें नींद नहीं आ रही तो मत करो कुछ ऐसा कि जो किसी तरह सोए हैं उनकी नींद हराम हो जाए हो सके तो बनो पहरुए दुःस्वप्नों से बचाने के लिए उन्हें गाओ कुछ शांत मद्धिम नींद और पके उनकी जिससे सोए हुए बच्चे तो नन्हें फरिश्ते ही होते... Read more
मनोज पटेल

विदेशी कविताओं का अनुवाद मनोज पटेल की कलम से

प्रकृति किसी आवश्यक व्यक्ति को समय से पहले खत्म कर देती है, बड़ा अफसोस होता है। मनोज पटेल साहित्य जगत के लिए बेहद आवश्यक व्यक्ति थे। काबिल अनुवादक। विदेशी कवियों और लेखकों को मनोज के जरिए लाखों लोगों ने पढ़ा और समझा होगा। मनोज पटेल मूलतः अकबरपुर के थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़े थे। कैंसर के चलते उनकी आसमायिक मृत्यु हो गई। उन्हें नमन। उनकी अनुदित कुछ कविताएं।    ऐनक? किसको पड़ी है उनकी? वे धुंधला जाते हैं चुम्बन के समय, रगड़ खाते हैं पलकों से, गंध और आवाज़ को कर देते हैं मंद, आंसुओं को भटका देते हैं रास्ते से...  और किसी काम नहीं आते जब आप तलाश रहे... Read more
भूपेंद्र राघव

रचनाकर्म में भूपेन्द्र राघव की कविताएं

मूलरूप से खुर्जा के रहने वाले भूपेंद्र राघव दिल्ली रहते हैं। मीडिया या अन्य प्रचार माध्यमों में बेशक वो पीछे हों पर उनकी रचनाएं अपनी शैली की खास रचनाएं हैं। आप भी पढ़िए। अगली बार फिर एक नए कवि की रचना के साथ।    बिन तुम्हारे जीने का अधिकार लेकर क्या करूँगा प्यार देकर क्या करूँगा, प्यार लेकर क्या करूँगा हमसफ़र ही राह चलते हर कदम पर साथ छोड़े  हाथ थामे था अभी तक वो अचानक हाथ छोड़े मांझी ही मझधार में जब नाव को ऐसे उतारे हों उफनते तेज धारे ओर ओझल हों किनारे डूबना ही तब उचित, पतवार लेकर क्या करूँगा सिक्त साँसों का ह्रदय में, भार लेकर... Read more
अच्युतानंद मिश्र, कवि

वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कविता आप भी पढ़िए, मिला भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार

युवा कवि और आलोचक अच्युतानंद मिश्र को इस वर्ष का प्रतिष्ठित भारत भूषण अग्रवाल कविता पुरस्कार उनकी कविता 'बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं' के लिए दिया गया है । निर्णायक मंडल में अशोक वाजपेयी, उदय प्रकाश, पुरुषोत्तम अग्रवाल, अनामिका थे। भारत भूषण अग्रवाल कविता पुरस्कार वर्ष की कोई एक सर्वश्रेष्ठ कविता का चयन करके उसके कवि को दिया जाता है। पढिए वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कविताः    बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं  -अच्युतानंद मिश्र (अमेरिकी युद्धों में मारे गये, यतीम और जिहादी बना दिए गये उन असंख्य बच्चों के नाम) सच के छूने से पहले झूठ ने निगल लिया उन्हें नन्हें हाथ जिन्हें खिलौनों से उलझना था खेतों में बम के टुकड़े... Read more
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर उनकी एक कविता

नर हो न निराश करो मन को  नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करो जग में रहके निज नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो कुछ तो उपयुक्त करो तन को नर हो न निराश करो मन को । संभलो कि सुयोग न जाए चला कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला समझो जग को न निरा सपना पथ आप प्रशस्त करो अपना अखिलेश्वर है अवलम्बन को नर हो न निराश करो मन को । जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो उठके अमरत्व विधान करो दवरूप रहो... Read more