रचनाकर्म

पुष्पा अवस्थी

पुष्पा अवस्थी की कविता

आज की कविता आज पुष्पा अवस्थी की कविता पुष्पा जी नीदरलैंड रहती हैं और उन्हें हाल ही में केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा द्वारा विदेश में रहकर साहित्य सेवा के लिए सम्मान की घोषणा हुई है। ।। गठीले हाथ ।। वे हमारी खुशियों को रचाने में शामिल हैं जिन्हें हम नहीं जानते हैं पर वे पहचानते हैं अपने से अधिक हमारी खुशियाँ खुशियों का स्वाद रंग-रूप और चाल-गति । उनके हाथों से रचा जाता है सुख का संसार हम सिर्फ खरीदते हैं जिसे । बड़े लोग मानते हैं रुपया खुशी है छोटे लोग जानते हैं मेहनत मजूरी । नया साल आने से पहले फड़फड़ाने लगता है कागजों का सफ़ेद सीना मशीनों... Read more
अर्जुन (कविता - उमेश चौहान)

अर्जुन (कविता – उमेश चौहान)

नमन लेखक और कवि उमेश चौहान जी का निधन हो गया है। विनम्र श्रद्धांजलि। उमेश जी लखनऊ से थे। दिल्ली में रहते थे। भारतीय प्रशासनिक सेवा में थे। उनकी याद में उनकी एक खूबसूरत कविता अर्जुन (कविता - उमेश चौहान) अर्जुन बनकर तनकर खड़ा हूँ युद्ध - क्षेत्र में मुझे कोई भय नहीं अन्याय के साथ खड़े महारथियों का मुझे कोई संकोच नहीं विवेकहीन अपनों का वध करने जमें मुझे कोई जरूरत नहीं कृष्ण जैसे किसी सारथी की भी क्योंकि आज तक मैंने स्वयं ही थामी है अपने जीवन - रथ के स्यंदनों की लगाम मैं अस्त्र - शस्त्रों के युद्ध में पारंगत नहीं अतः लड़ूँगा अपने शब्दों के सहारे... Read more
येव्गेनी

धीमा प्यार / येव्गेनी येव्तुशेंको की कविता

रूसी कवि की याद कल केंसर से येव्गेनी का निधन हो गया उन्हें याद कर रहे रूस में रह रहे भारतीय मूल के प्रोफेसर अनिल जनविजय। अनिल ने येव्गेनी की कविताओं का रूसी से हिंदी अनुवाद किया है। येव्गेनी येव्तुशेंको अपनी सोवियत संघ विरोधी राजनीतिक कविताओं की वजह से सारी दुनिया में मशहूर हुए थे। लेकिन उन्होंने बेहतरीन प्रेम-कविताएँ भी लिखी हैं। यहाँ पेश है उनकी एक ख़ूबसूरत प्रेम-कविता। नीचे कविता-पाठ करते हुए कवि की तस्वीर। धीमा प्यार / येव्गेनी येव्तुशेंको की कविता क्या आप इर्कूत्स्क गए हैं कभी वहाँ आपने देखी होंगी बेहद सुन्दर खिड़कियाँ और उनसे झाँकती उनसे भी कहीं अधिक ख़ूबसूरत लड़कियाँ गर्व झलकता है जिनके चेहरों... Read more
Asima Bhatt

असफल प्रेमिकाएँ

असफल प्रेमिकाएँ Asima Bhatt की कविता वो प्रेतात्माएं नहीं थीं वो प्रेमिकाएँ थीं वो खिलना जानती थीं फूलों की तरह महकना जानती थीं खुशबू की तरह बिखरना जानती थीं हवाओं की तरह बहना जानती थीं झरनो की तरह उनमें भी सात रंग थे इंद्रधनुषी उनमें सात सुर थे उनकी पाज़ेब में थी झंकार . वो थीं धरती पर भेजी हब्बा की पाकीज़ा बेटियां जिन्हें और कुछ नहीं आता था सिवाय प्यार के वो बार बार करती थीं प्यार असफल होती थीं. टूटती थीं बिखरती थीं फिर सम्हलती थीं जैसे कुकनूस पक्षी अपनी ही राख से फिर फिर जी उठता है फिर प्यार करती थीं उसी शिद्दत से, उसी जुनून से... Read more
पवन करण

पवन करण जी ग्वालियर से हैं, उनकी कविता आपके लिए

रचनाकर्म पवन करण जी ग्वालियर से हैं, उनकी कविता आपके लिए। चोटी मैं मन में सोचता इसके लंबे बालों की कितनी कातिल चोटी गुंथती है कमर के नीचे तक गुथी जब यह तुम्हारी पीठ के नीचे दब जाती मुझे बहुत चिढ़न होती जितनी देर तक वह नीचे दबी रहती मैं बेचैन बना रहता सोचता कि पीठ के नीचे उसका दम घुट रहा होगा तुम्हें हमेशा यही लगता कि मैं तुम्हें देख रहा हूं मगर मैं जब तुम इसे बना रही होतीं तब तुम्हें नहीं तुम्हारे हाथों इसे बनते देखता मेरी इस बात पर तुम हंस देतीं जब मैं तुमसे यह कहता कि जब तुम मुझसे दूर जाया करो अपनी चोटी... Read more
नीलम सक्सेना की कविता

नीलम सक्सेना की कविता

नीलम संघ लोक सेवा आयोग में संयुक्त सचिव हैं। हाल ही में उनका कविता संग्रह भी आया है। आशिक़ बार बार मैं अपने दिल के किवाड़, ताले डालकर बंद कर देती हूँ, और फेंक देती हूँ उसकी चाबी, जंगल में ऊँची घास के बीच कि कोई उसे ढूँढ़ ही न पाए; पर तुम हो कि तब तक दस्तक देते रहते हो, जब तक मैं हारकर, किवाड़ ही नहीं उखाड़ देती! यूँ कब तक पीछा करते रहोगे मेरा? क्या थकती नहीं हैं तुम्हारी आँखें, उस बासी सी मेरी सूरत को देखते हुए? क्या चाहते हो मुझसे? और कब तक मुझसे यूँ इश्क़ करते रहोगे? ए जोश! सच कहूँ तो तुमने ही... Read more