रचनाकर्म

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गिद्धों की तरह शिकार करती मीडिया

वुसअतुल्लाह ख़ान, वरिष्ठ पत्रकार, पाकिस्तान से बीबीसी हिंदी के लिए दो रोज़ पहले पाकिस्तानी पंजाब के शहर साहिवाल के क़रीब हाईवे पर एक गाड़ी में सवार सात में से चार यानी मां-बाप-बेटी और गाड़ी ड्राइव करने वाला फ़ैमिली फ़्रेंड पुलिस ने चरमपंथी होने के शक में गिरफ़्तार करने की बजाय उन्हें मार डाला. सरकार ने जैसे कि रिवाज है तुरंत एक जांच कमेटी बना दी. अब एक और रिपोर्ट आएगी. कुछ पुलिसवाले सस्पेंड होंगे और चंद दिनों में यह मामला भी ऐसे पिछले कई मामलों की तरह इधर-उधर हो जाएगा. मगर ऐसे मामलों में मीडिया खोज लगाने की होड़ में जिस बुरी तरह से एक्सपोज़ होती है वह भी किसी एनकाउंटर... Read more
रामनाथ गोयनका

मीडिया पुरस्कार चैय्ये.. सबसे प्रतिष्ठित वाला

[caption id="attachment_3921" align="alignleft" width="100"] प्रशांत राजावत. सम्पादक मीडिया मिरर[/caption] एडीटर अटैक प्रशांत राजावत- सम्पादक मीडिया मिरर  सर्दी में साहित्य का मेला सजता है, किताबों का मेला भी। तो वहीं अवार्ड फंक्शन भी इन्ही दिनों परवान चढ़ते हैं। अभी हमसब रामनाथ गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार से रीते नहीं हैं कि एक औऱ निजी संस्थान की ओर से मीडिया अवार्ड देने की घोषणा की गई। इसीक्रम में भारतीय जनसंचार संस्थान भी अवार्ड के लिए आवेदन पत्र निकाल चुका है। अपने जयपुर वाले जेएलएफ में तो अवार्ड मिलते ही हैं। दरअसल मुझे इस विषय पर लिखने का ख्याल कुछ ऐसे आय़ा कि रामनाथ गोयनका पुरस्कार की सूची जब मैं इंडियन एक्सप्रेस में देख रहा... Read more
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में रवीश कुमार।

क्या 2019 में टीवी के दर्शकों को कोई काम नहीं है

एनडीटीवी के कार्यकारी सम्पादक रवीश कुमार की कलम से  कहीं से घूमते-फिरते हुए आकर बैठे और बिठाए गए ये लोग गिनती में दो, चार, छह और कभी-कभी दस भी होते हैं। कई साल से आते-आते इनके चेहरे पर टीवी की ऊब दिखने लगी है। जो नया आता है वो भी इसी टाइप के टीवी को देखते-देखते ऊबा हुआ लगता है। बहस के दौरान कोई मेज़ पर पसर जाना चाहता है, कोई कुर्सी पर पीछे तक झुक कर पीठ सीधी कर लेना चाहता है। कुछ वक्ता तो बोलते वक़्त सोते नज़र आते हैं और कुछ को बोलते हुए सुनकर सोने का मन करने लगता है। किसी के कान से स्काइप की... Read more
स्मिता प्रकाश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार की समीक्षा बाया पुण्य प्रसून वाजपेयी

साहेब कभी एंकात में बैठ कर सोचियेगा आपने कितना वक्त बर्बाद किया.... ------------------------------------------------------------------------------------------ 95 मिनट का इंटरव्यू । प्रधानमंत्री का इंटरव्यू । नये साल के पहले दिन का इंटरव्यू । और टेलीविजन स्क्रिन पर इंटरव्यू की उम्र महज दो घंटे रही तो अखबार के पन्ने पर इंटरव्यू चार कालम की जगह लेकर भी खबर ना बन सकी । तो क्या ये इंटरव्यू लेने वाले की पत्रकारिय सक्षमता पर सवालिया निशान है या फिर प्रधानमंत्री की समझ या समझाने की सोच का खोखलापन है । जहा सवाल कोई से भी हो लेकिन हर सवाल पर सफाई के साथ अपनी सफलता दिखाने बताने की चाह इस तरह लबालब हो कि मन की... Read more
Narendra Modi

मैं संघी व एवीबीपी के गुंडों से कभी नहीं मिला

-एडीटर अटैक- 15 दिन के अंतराल में चौथी बार में पढ़ने को मिल रहा है कि संघी गुंडे होते हैं और कहने वाले कोई अनपढ़ या जाहिल लोग नहीं हैं। देश के प्रबुद्धजन। पत्रकार और लेखक। मुझे दुख होता है ये सुनकर कि संघी गुंडे होते हैं। मैंने जिन संघियों को देखा, जाना और समझा। वो आदर्श व्यक्तियों की श्रेणी में रखे जा सकते हैं। संघियों (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) की जब बात होती है तो आज से 17-18 साल पीछे मेरा मन चला जाता है। मुझे याद पड़ता है कि मैं 8वीं कक्षा में होऊंगा। मेरे बड़े भैय्या बीजेपी की छात्रशाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एवीबीपी) के नगर मंत्री... Read more
राहुल गांधी

लोकसभा टीवी सम्पादक को प्रिय हैं आंख मारते ” राहुल गांधी”

एडीटर अटैक- [caption id="attachment_4169" align="alignleft" width="300"] चटखारे ले लेकर राष्ट्रीय मुद्दे पर राष्ट्रीय चैनलों पर स्पेशल बुलेटिन[/caption] वैसे तो राहुल गांधी चर्चा में रहते ही हैं पर कल से फिर एक बार किसी खास वजह से चर्चा में हैं। वो वजह है उनका आंख मारना। आंख तो लोग मारते रहते हैं। हाहाहा। पर राहुल गांधी मारते हैं तो एकदम धांसू टाइप। पूरे देश का मीडिया उनके इस अदा का दीवाना है। आज के ही अखबारों की बात करें तो राष्ट्रीय राजधानी के तमाम बड़े अखबारों में पहले पन्ने पर राहुल गांधी की आंख मारती फोटो सुपर कैप्शन के साथ उपलब्ध है। वहीं देश के लोकप्रिय न्यूज चैनलों में राहुल गांधी... Read more

सलमान खान फिल्मी दुनिया के सबसे नेक इंसान

सलमान खान मतलब? सुपरस्टार। सुपरस्टार। सुपरस्टार।  ठीक है सलमान खान हमारे, आपके, सबके सुपरस्टार हैं। उनकी फिल्में पारिवारिक होती हैं। वो ऑनस्क्रीन किसी अभिनेत्री को चूमते नहीं। तमाम बातें। पर वो तमाम बातें भी जो सलमान को ख़लनायक की तरह हमारे दिलो दिमाग के प्रस्तुत करती हैं, वो हैं... हमारी प्यारी एश्वर्य़ा को मारने पीटने वाला शख्स, एश्वर्या को अपना थूक पीने के लिए विवश करने वाला शख्स, एश्वर्या के घर जाकर उसे गाली देने वाला शख्स, सड़क पर बेगुनाहों की जान लेने वाला शख्स, बेजुबान हिरण को मारने वाला शख्स। तो ऐसे में सलमान बेड ब्वाय के रूप में भी जाने जाते हैं। अच्छे औऱ बुरे सलमान को आप... Read more
बीबीसी

पत्रकारिता को लेकर मैं सकारात्मक क्यों नहीं?

बीते सप्ताह नॉएडा में न्यूज़ चैनल की एंकर राधिका कौशिक आत्महत्या कर लेती हैं। बीते एक वर्ष में वैसे ये किसी महिला पत्रकार की तीसरी आत्म हत्या है। आप कहते हैं मैं सकारात्मक रहूँ। रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर की 2018 की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट आ गयी है, जिसमे कहा गया है की भारत पत्रकारों के लिए 5 वां ख़तरनाक देश है, पर आप कहते हैं मैं सकारात्मक रहूँ। etv हैदराबाद से एंकर रूमाना को सिर्फ इसलिए संस्थान ने निकाल दिया क्योंकि उसने अपने बॉस द्वारा किये जा रहे यौन उत्पीड़न का विरोध किया और शिकायत की थी। और आप कहते हैं मैं सकारात्मक रहूँ। रूमाना के पत्र पढ़िये। भड़ास में, मिरर में... Read more
हाल ही में 2 दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 न्यूज चैनलों को साक्षात्कार दिए। पहले जी न्यूज और फिर टाइम्स नाउ। प्रधानमंत्री के साक्षात्कार देते ही सोशल मीडिया में हल्ला मच गया।

पूरे कार्यकाल में पत्रकारों से क्यों बचते रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

मोदी की राह पर ही राष्ट्रपति भी हैं, उनके भी मीडिया सचिव पत्रकारों से दूरी बनाकर रखते हैं मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली।  ये हमेशा से कहा जाता रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कम बोलते हैं। पत्रकारों से चर्चा नहीं करते। मीडिया सम्मेलनों में भाग नहीं लेते। लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  तो पत्रकारों से बातचीत मामले में मनमोहन से भी फिसड्डी साबित हुए हैं। आजतक की खबर की मानें तो  नरेंद्र मोदी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में प्रेस कांफ्रेंस एक भी नहीं की, एडीटर कांफ्रेंस एक भी नहीं की, विदेश दौरे पर सवाल जवाब एक भी बार नहीं किए। अन्य मौकों पर सवाल जवाब एक बार भी नहीं। हां... Read more
द टेलीग्राफ का ऐतिहासिक पन्ना

द टेलीग्राफ बिहार संस्करण की बंदी का निष्कर्ष

द टेलीग्राफ के पटना संस्करण की बंदी मीडिया के व्यवसाय में फैली अनिश्चितता का विस्तार है. उमेश कुमार राय पटना और पत्रकारिता की फिज़ाओं में एक ख़बर पिछले हफ्ते भर से तैर रही थी- अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ का बिहार संस्करण बंद होने वाला है. 14 दिसंबर की सुबह जब हॉकरों ने अखबारों का बंडल घरों में फेंका, तब यह ख़बर सच निकली. द टेलीग्राफ के पहले पन्ने पर बाईं तरफ 11 शब्दों की एक मुख़्तसर सी सूचना छपी थी- द टेलीग्राफ का बिहार संस्करण 15 दिसंबर 2018 से बंद हो जाएगा. पिछले ही साल झारखंड के साथ कई अन्य राज्यों में हिंदुस्तान टाइम्स ने भी अपने संस्करण बंद करने... Read more