रचनाकर्म

‘कादम्बिनी ‘ आखिर लाकडाउन की बलि चढ़ा दी गई- बाल पत्रिका ‘ नंदन’ के साथ

- विष्णु नागर, लेखक व पत्रकार  साठ साल का सफर पूरा कर 'कादम्बिनी ' आखिर लाकडाउन की बलि चढ़ा दी गई- बाल पत्रिका ' नंदन' के साथ। ' कादम्बिनी ' से हालांकि मेरा संबंध बारह साल पहले ही छूट गया था और अब वह पत्रिका मुझे भेजा जाना भी बंद हो चुका था मगर उसके अतीत से पहले पाठक के रूप में और बाद में उसके संपादक के समकक्ष जिम्मेदारी संभाल चुकने के कारण उससे एक लगाव था ,इसलिए यह खबर मेरे लिए भी दुखद है।टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की राह पर देर से ही सही, हिंदुस्तान टाइम्स समूह भी आ गया।कादम्बिनी प्रबंधन की उपेक्षा का शिकार तो मेरे कार्यकाल... Read more
अल्पना

साहित्यिक शनिवार में अल्पना सुहासिनी की ग़ज़लें

परिचय--  नाम- डॉ. अल्पना सुहासिनी शिक्षा-बी.ए. ऑनर्स (हिन्दी),  एम.ए. हिन्दी, पी.एच.डी.(हिन्दी) पता - राजनगर एक्सटेंशन, गाजियाबाद. मेल आई डी - 2011alpana@gmail.com सम्प्रति -  भूतपूर्व मे दैनिक भास्कर अखबार में उपसम्पादक, फिलवक्त- आकाशवाणी हिसार में आकस्मिक उद्घोषिका, दूरदर्शन हिसार में एंकर साथ ही अनेक राष्ट्रीय साँस्कृतिक साहित्यिक मंचों का संचालन एवम कविता-पाठ,  अंतर्राष्टीय फिल्म फेस्टिवल हरियाणा मे मंच-संचालन, राष्ट्रीय थियेटर फेस्टिवल में  मंच-संचालन। ज़ी न्यूज़,  इँडिया न्यूज़, दूरदर्शन दिल्ली आदि सहित कई टी.वी चैनलों से काव्य-पाठ ग़ज़लें 1.सितारा अपना बलंदी पे जगमगाएगा, कभी तो ऐसा हमारा भी वक़्त आएगा। सुनोगे जब भी कहीं कोई गीत उल्फ़त का, तुम्हारा दिल भी मेरे नग़्मे गुनगुनाएगा । कहीं पे बात चलेगी कभी मुहब्बत की, हरेक... Read more

India: A year of throttling journalism in Kashmir

On the first anniversary of the Indian government’s sudden decision to strip Indian-administered Kashmir of its semi-autonomy and simultaneously disconnect telecommunications there, Reporters Without Borders (RSF) has examined the current state of press freedom in this northern territory with the help of its journalists. In the light of their alarming accounts, RSF calls on the Indian government to immediately change its policy or go down in history as a regime that deprived the region’s 8 million inhabitants of reliable news and information at the height of a pandemic. The streets of Srinagar, the Kashmiri capital, were completely deserted this morning. The only human presence were the paramilitaries who are occupying... Read more

हनुमान चालीसा में निहित जिंदगी के सूत्र

कई लोगों की दिनचर्या हनुमान चालीसा पढ़ने से शुरू होती है। पर क्या आप जानते हैं कि श्री *हनुमान चालीसा* में 40 चौपाइयां हैं, ये उस क्रम में लिखी गई हैं जो एक आम आदमी की जिंदगी का क्रम होता है। माना जाता है तुलसीदास ने चालीसा की रचना मानस से पूर्व किया था। हनुमान को गुरु बनाकर उन्होंने राम को पाने की शुरुआत की। अगर आप सिर्फ हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं तो यह आपको भीतरी शक्ति तो दे रही है लेकिन अगर आप इसके अर्थ में छिपे जिंदगी के सूत्र समझ लें तो आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं। हनुमान चालीसा सनातन परंपरा में... Read more
मंगला रानी

साहित्यिक शनिवार में प्रो.मंगला रानी की कविताएं

मीडिया मिरर की साहित्यिक शनिवार प्रस्तुति में हम आज पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय पटना में हिंदी विभाग की प्रोफेसर मंगला रानी की कविताएं आपको पढ़वा रहे हैं। यहां प्रोफेसर मंगला रानी का पूर्ण परिचय इस उद्देश्य से बताया जा रहा है ताकि शोध छात्र व हिंदी में दिलचस्पी लेने वाले सुधीजन उनकी किताबों व व्यक्तिगत रूप से उनसे मार्गदर्शन व लाभ ले सकें। हिंदी में प्रोफेसर मंगला रानी का कार्य अनुकरणीय है। देश विदेश में उन्होंने हिंदी को गौरवान्वित किया है।  प्रोफेसर मंगला रानी का परिचय प्रो. मंगला रानी, डी.लिट् हिंदी विभाग, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना. dr.mangalarani@gmail.com 9431417345 पुस्तक प्रकाशित- 1. हिंदी साहित्य:मूल्यान्वेषण 2. धर्म एवं दर्शन में जीवन के मूल्य 3. साहित्य... Read more
पत्रकारिता व मीडिया

पत्रकार और पत्रकारिता बड़े संकट में

- - - - - - शकील अख्तर   (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। नवभारत टाइम्स के राजनीतिक संपादक और चीफ आफ ब्यूरो रहे हैं।) क्या कभी वह दिन भी आ सकता है जब अख़बार बिना पत्रकारों के निकलें और न्यूज चैनल बगैर पत्रकारों के चलें? आज की भयावह स्थिति को देखते हुए यह कोई असंभव बात नहीं लगती। आंशिक रूप से तो यह अभी भी कई बड़े अखबारों में हो रहा है। उनके अलग नाम से रोज निकलने वाले परिशिष्ट में पत्रकार होते ही नहीं हैं। पूरे 12- 16 पेज ब्रांड की टीम खुद निकालती है। यह करीब करीब पेड अख़बार होता है और इसमें पैसा देकर आप कुछ भी... Read more

भारत-नेपाल संबन्ध और मीडिया की भूमिका

एडीटर अटैकः डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर   मैं छः सात दिन पहले जी न्यूज के सम्पादक सुधीर चौधरी का ट्वीट पढ़ रहा था जिसमें उन्होंने लिखा था कि नेपाल तो हमारे चैनलों से ही डर गया, भारत जब सामने आएगा तो क्या होगा। सुधीर चौधरी की ये टिप्पणी नेपाल में भारतीय चैनलों के प्रसारण प्रतिबंध पर थी। मामला दरअसल ये है कि कुछ भारतीय निजी चैनलों ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और चीनी महिला राजदूत होउ यांकी मामले में मसालेदार खबरें चलाईं। एक चैनल ने दोनों के संबंधों को हनीट्रेप से जोड़ कर बताया। इसके बाद नेपाल में भारतीय चैनलों के प्रसारण को बैन कर दिया... Read more

फाटन की गोली ले लो साहब…

[caption id="attachment_5154" align="alignleft" width="253"] जानवरों के प्रति मनुष्य की क्रूरता को दर्शाता एक चित्र[/caption] एडीटर अटैक- डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर   मुझे याद है मैं उत्तरप्रदेश के चित्रकूटधाम कर्वी स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने के लिए बैठा था। वहां कुछ आदिवासी जनजाति के लोग कुछ ऐसा बड़बड़ाते हुए निकल रहे थे कि फाटन की गोली ले लो साहब.. जैसे आमतौर पर रेलवे स्टेशनों में लोग तमाम दूसरी चीजें बेंचते हैं। मुझे वैसा ही लगा। महानगरीय स्टेशनों की अपेक्षा कर्वी बेहद छोटा और कह सकते हैं जंगल से जुड़ा स्टेशन है। आपसपास पहाड़ियां औऱ घने जंगल हैं। मैंने आवाज सुनकर सोचा कि कोई खाने पीने की ही वस्तु होगी जिसे... Read more
डीडी न्यूज

पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं कैसे दूं…

एडीटर अटैक-डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक, मीडिया मिरर pratap.prashant@rediffmail.com उमंग, उल्लास और उत्साह का तो ये दौर ही नहीं है। फिर भला शुभकामनाओं की बात कैसे हो भला। मुझे आश्चर्य़ है इन हालातों में कैसे कोई पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं दे सकेगा औऱ कैसे कोई ले सकेगा। जब पत्रकार आज जिंदगी औऱ रोटी के बीच झूल रहे हैं। उन्हें दो में से किसी एक को चुनना है और वो क्या चुनेंगे। हम सब जानते हैं। सूचना मिल रही है कि कल हिंदुस्तान पटना का टैबलॉयड स्मार्ट युवा बंद कर दिया गया है। औऱ वो भी हमेशा के लिए। इस टैबलायड से जुड़े दर्जनभर पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया... Read more
विद्यादर्शन

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेषः क्यों बचेंगे अखबार

उमेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार एवं सलाहकार आकाशवाणी दिल्ली सामाजिक हो या राजनीतिक या फिर आर्थिक व्यवस्था, समूचे तंत्र और सोच पर कोरोना संकट का प्रभाव परिलक्षित हो रहा है। ऐसे में मीडिया भला कैसे अछूता रहता! कोरोना संकट ने निश्चित तौर पर अखबारों के प्रसार पर असर डाला है, लिहाजा अखबारों की कमाई भी घटी है और उनके पृष्ठ भी। इसकी वजह से एक वर्ग मानने लगा है कि अब अखबार खत्म हो जाएंगे। यह भी कहा जाने लगा है कि संकट की इस घड़ी से अखबारों का निकल पाना मुश्किल होगा, लिहाजा वे बिखर जाएंगे और हो सकता है कि आस्ट्रेलिया के विद्वान रोस डाउसन के मुताबिक अखबारों की... Read more