war singh

नामवर सिंह

जैसे हम हैं, वैसे ही रहें: नामवर सिंह

नामवर सिंह उन साहित्यकारों में से हैं, जो लिखित के साथ-साथ वाचिक परंपरा में भी आते हैं। इस दृष्टि से वे देश के साहित्यालोचकों में अकेले हैं, जिन्होंने अपने व्याख्यानों से हिंदी क्षेत्र में आलोचनात्मक विवेक का प्रसार किया है। साथ ही हिंदी आलोचना को नई दृष्टि दी। वे वाद-विवाद और संवाद के लिए जाने जाते हैं। नामवर सिंह ने अपने जीवन के साथ-साथ साहित्य, समाज और राजनीति पर बेबाक तरीके से राय व्यक्त की है। यह बातचीत संजीव कुमार और ज्ञानेन्द्र कुमार संतोष ने की है। पढ़ें पूरी बातचीत-   सवाल- अपने आरंभिक साहित्यिक जीवन के बारे में बताएं? जवाब- बात उन दिनों की है जब मैं उदय प्रताप कॉलेज में इंटरमीडिएट की... Read more